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कालाधन और नकली नोट ख़त्म करने के तर्क किया था खारीज

Published On :    9 Nov 2018   By : MN Staff
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आठ अगस्त को नोटबंदी के दो साल पूरे हो गए. हालांकि अभी तक इस सवाल का कोई जवाब नहीं मिल पाया है कि आखिर नोटबंदी से देश को क्या मिला.



नई दिल्ली: आठ अगस्त को नोटबंदी के दो साल पूरे हो गए. हालांकि अभी तक इस सवाल का कोई जवाब नहीं मिल पाया है कि आखिर नोटबंदी से देश को क्या मिला. इस बीच नोटबंदी से जुड़ा एक नया खुलासा सामने आया है.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक आठ नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोटबंदी की घोषणा करने से लगभग चार घंटे से कम समय पहले भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड ने इस योजना को तो सहमति दे दी थी, लेकिन इसे लागू करने के लिए सरकार द्वारा बताए गए दो मुख्य तर्कों को खारिज कर दिया था. 


आरबीआई को सात नवंबर 2018 को वित्त मंत्रालय द्वारा नोटंबदी का प्रस्तावित मसौदा मिला था. इसमें सरकार ने ये तर्क दिया था कि 1000 और 500 के नोटों को चलन से बाहर करने पर काला धन और नकली नोटों पर लगाम लगेगी. हालांकि आरबीआई के निदेशकों ने सरकार के इस तर्क को ठुकरा दिया था. 


आरबीआई ने कहा, ‘ज्यादातर काला धन कैश में नहीं है बल्कि ये वास्तविक क्षेत्र की संपत्तियां जैसे कि सोना और रियल इस्टेट..में है और नोटबंदी से इन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.’ वहीं नकली नोट के मामले में मंत्रालय ने बोर्ड को बताया था कि ज्यादातर नकली नोट 1000 और 500 के नोट में हैं और इनकी संख्या कुल मिलाकर लगभग 400 करोड़ हैं. 


इस पर बोर्ड ने कहा कि अगर नकली नोटों की ही चिंता है तो 400 करोड़ नकली नोटों को कुल नोटों की तुलना में देखा जाए तो ये कोई बहुत बड़ी संख्या नहीं है.


आरबीआई बोर्ड ने लिखित में कहा था कि बड़े मूल्य के नोटों को चलन से बाहर करने पर मेडिकल और पर्यटन के क्षेत्र में नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. आने वाले पर्यटकों की समस्या की ओर ध्यान खींचते हुए आरबीआई निदेशकों ने कहा, ‘घरेलू और लंबी दूरी के यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. 


क्योंकि हो सकता है कि वे केवल उच्च मूल्य के नोट्स ला रहे हों और उन्हें रेलवे स्टेशनों/हवाई अड्डों पर टैक्सी ड्राइवरों के भुगतान के लिए कठिनायों का सामना करना पड़ सकता है. इससे पर्यटकों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.’


आरबीआई के मिनट्स ऑफ मीटिंग में लिखा है कि नोटबंदी के मुद्दे को केंद्र सरकार और आरबीआई के बीच छह महीने से चर्चा चल रही थी, जिसके दौरान ‘इनमें से अधिकतर मुद्दों पर चर्चा की गई थी.’ भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने यह भी कहा कि प्रस्तावित उद्देश्यों के अलावा, ‘प्रस्तावित कदम से वित्तीय समावेश और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भुगतान करने को प्रोत्साहित करने का एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करता है, क्योंकि लोग बैंक खातों और इलेक्ट्रॉनिक साधनों के उपयोग से नकदी भुगतान के लाभ देख सकते हैं

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