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अब आईआईएम पीएचडी योग्यता मानदंडो के विरोध में मोदी सरकार के खिलाप हो रहे लामबंद

Published On :    15 Nov 2018   By : MN Staff
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भारतीय प्रबंधन संस्थानों और सरकार के बीच पीएचडी योग्यता मानदंडो को लेकर टकराव की स्थिति पैदा हो रही है.



अहमदाबाद : भारतीय प्रबंधन संस्थानों और सरकार के बीच पीएचडी योग्यता मानदंडो को लेकर टकराव की स्थिति पैदा हो रही है. शीर्ष आईआईएम ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा हाल में घोषित पीएचडी योग्यता मानदंडों का विरोध कर रहे है. इस संबंध में सरकार के सामने अपना पक्ष तैयार करने को सभी आईआईएम के निदेशक 13 दिसंबर को बैठक करेंगे. 


आईआईएम अहमदाबाद ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर पीएचडी गाइडलाइंस पर कड़ी आपत्तियां दर्ज कराई हैं. शीर्ष प्रबंधन संस्थानों का मानना है कि सरकार ने आईआईएम में पीएचडी कार्यक्रमों के लिए जो योग्यता मानदंड तय किए हैं, वह ‘प्रतिबंध’ लगाने जैसे हैं और फेलो प्रोग्राम इन मैनेजमेंट  की प्रकृति के खिलाफ हैं. 


सरकार की ओर से 23 अक्टूबर को प्रबंधन संस्थानों के निदेशकों को पीएचडी कार्यक्रमों में प्रवेश की न्यूनतम मानदंडों के बारे में विस्तार से लिखित में जानकारी दी थी. योग्यता मानदंडों में तीन पहलुओं पर आईआईएम ने चिंता जताई है. 


इनमें डायरेक्ट एंट्री (चार वर्षीय डिग्री या बीटेक) वाले उम्मीदवारों के लिए 8 सीजीपीए, एक साल की बजाय दो वर्ष के पोस्टगैजुएट डिप्लोमा और सीए, सीएस या आईसीडब्लूए जैसी पेशेवर योग्यताओं के बावजूद स्नातक डिग्री की आवश्यकता शामिल हैं.


रिपोर्ट के अनुसार, आईआईएम इस बात से सहमत नहीं है कि एक पीएचडी कार्यक्रम को कम से कम तीन साल चलना चाहिए. उन्होंने इसे दो साल रखने का प्रस्ताव दिया था. अधिकतर पुराने आईआईएम अभी संस्थागत प्रक्रियाओं के जरिए डॉक्टोरल एफपीएम देते हैं. लेकिन आईआईएम ऍक्ट 2017 के प्रभावी होने के बाद, आईआईएम इसकी जगह पीएचडी डिग्रियां दे सकते हैं.


सरकार ने जो गाइडलाइंस जारी की हैं, वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं को ध्यान में रखकर तैयार की हैं. मंत्रालय ने कहा है कि राष्ट्रीय महत्व के सभी संस्थानों में एकरूपता होनी चाहिए. 


आईआईएम अहमदाबाद ने मंत्रालय को लिखी चिट्ठी में कहा है कि सरकार ने पीएचडी की चाह रखने वाले डायरेक्ट एंट्री उम्मीदवारों के लिए 8 सीजीपीए होने की अनिवार्यता रखी है, वहीं एफपीएम पर उसका आंतरिक डेटा यह दिखाता है कि संस्थान ने 6 सीजीपीए वाले छात्रों को भी प्रवेश दिया है. 


आईआईएम ने कहा है कि उसके आधे से ज्यादा एफपीएम पासआउट्स इंजीनियरिंग डिग्रीधारक थे और 60 फीसदी से ज्यादा उम्मीदवारों का सीजीपीए 8 से कम था| इनमें से कई अभी आईआईएम अहमदाबाद में पढ़ा रहे हैं

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