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स्वच्छ भारत सेस बंद करने के बाद भी सरकार ने वसूला 2100 करोड़ रुपये का टैक्स आरटीआई से खुलासा

Published On :    11 Jan 2019   By : MN Staff
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केंद्र की मोदी सरकार ने स्वच्छ भारत सेस खत्म किए जाने के बाद भी इसके तहत जनता से लगभग 2100 करोड़ रुपये का टैक्स वसूल लिया है.



नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार ने स्वच्छ भारत सेस खत्म किए जाने के बाद भी इसके तहत जनता से लगभग 2100 करोड़ रुपये का टैक्स वसूल लिया है. सूचना का अधिकार आवेदन में इसका खुलासा हुआ है.वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने के लिए कई सारे सेस खत्म कर दिए गए थे. स्वच्छ भारत सेस को भी एक जुलाई, 2017 से खत्म कर दिया गया था. 


लेकीन राजस्व विभाग के ‘सिस्टम और डेटा प्रबंधन के निदेशालय जनरल’ ने आरटीआई आवेदन के तहत जानकारी दी है कि एक जुलाई, 2017 के बाद 2067.18 करोड़ रुपये का स्वच्छ भारत सेस वसूला गया है. जानकारी के मुताबिक एक अप्रैल 2017 से लेकर 31 मार्च 2018 तक में 4242.07 करोड़ रुपये का स्वच्छ भारत सेस वसूला गया है. 


इसमें से एक अप्रैल 2017 से एक जुलाई 2017 के बीच कुल मिलाकर 2357.14 करोड़ का स्वच्छ भारत सेस वसूला गया. इस हिसाब से साल 2017-18 में स्वच्छ भारत सेस बंद किए जाने के बाद एक जुलाई 2017 से लेकर 31 मार्च 2018 तक में 1884.93 करोड़ रुपये वसूल लिए गए. इसी तरह साल 2018-19 के दौरान एक अप्रैल 2018 से लेकर 26 दिसंबर 2018 तक में 182.25 करोड़ रुपये वसूले गए हैं. 


इस हिसाब से कुल मिलाकर देखें तो सरकार द्वारा स्वच्छ भारत सेस बंद किए जाने के बाद भी अब तक में 2067.18 करोड़ रुपये जनता से वसूल लिए गए हैं. स्वच्छ भारत सेस खत्म किए जाने के बाद भी इसके तहत पैसा वसूलना सरकार पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. बता दें कि साल २०१५ में स्वच्छ भारत सेस लागू किया गया है. 


इसके तहत सभी सेवाओं पर 0.5 फीसदी का सेस लगता है. आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक साल 2015 से 2018 तक में कुल 20,632.91 करोड़ रुपये स्वच्छ भारत सेस के रूप में वसूला गया है. सरकार का दावा है कि स्वच्छ भारत सेस के तहत एकत्रित फंड का उपयोग स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत विभिन्न शौचालयों के निर्माण, सामुदायिक स्वच्छता परिसरों, ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन, सूचना शिक्षा व संचार और प्रशासनिक व्यय के लिए किया जाता है. 


इसे लागू करना और उपयोग प्रमाण पत्र देने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है. एक तरफ सरकार द्वारा स्वच्छता सेस खत्म किए जाने के बाद भी करदाताओं से करोड़ों रुपये का टैक्स वसूला गया है, वहीं दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने द वायर  की ओर से दायर आरटीआई आवेदन में ये जानकारी नहीं दी कि इन पैसों को किस काम के लिए खर्च किया गया है.


पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने सिर्फ इस बात की जानकारी दी है कि इस सेस के तहत जितनी राशि इकट्ठा की गई है, उसमें से कितनी राशि जारी की गई और कितना खर्च किया गया है.
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