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किसानों की संख्या घट कर बढ़ रहा बीमा कंपनियों का राजस्व वप्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

Published On :    12 Jan 2019   By : MN Staff
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मोदी सरकार ने अप्रैल 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लॉन्च की, अधिकांश किसानों को इसके दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया था.



नई दिल्ली: मोदी सरकार ने अप्रैल 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लॉन्च की. अधिकांश किसानों को इसके दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया था, ताकि किसानों आर्थिक मदद मुहैया कराई जा सके. इस योजना के तहत किसानों को प्रीमियम के तौर पर इंश्योर्ड राशि का 2 फीसद (खरीफ फसल) और 1.5 प्रतिशत (रबि फसलों के लिए) देने का प्रावधान किया गया है. 


हालांकि, जिस वर्ष इसे लागू किया गया उस साल 4 करोड़ से ज्यादा किसानों ने योजना के तहत पंजीकरण कराया था. लेकिन पिछले दो वर्षों से बीमा का लाभ लेने वाले किसानों की संख्या लगातार घट रही है. इसके बावजूद बीमा कंपनियों का राजस्व लगातार बढ़ता जा रहा है.


वर्ष 2016 में जब यह योजना लॉन्च की गई उस साल 4 करोड़ किसानों ने फसलों का बीमा कराया था. लेकीन साल 2017 में यह आंकड़ा 3.48 करोड़ और 2018 में 3.33 करोड़ तक पहुंच गया. वहीं, वर्ष 2015-16 में इस योजना से बीमा कंपनियों ने 5,614 करोड़ रुपए जुटाए थे. 


साल 2016-17 में 22,362 करोड़ और 2017-18 में 25,046 करोड़ रुपए का राजस्व संग्रह किया गया. फसल बर्बाद या नष्ट होने की स्थिति में दावा ठोकने वाले किसानों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. दरअसल, पहले नष्ट फसलों के मूल्यांकन में काफी समय लग जाता और बाद में बीमा कंपनियों की तरफ से दावे की राशि देने में लेट-लतीफी होती है. 


लंबी कागजी कार्रवाई के चलते इस योजना के प्रति किसानों की दिलचस्पी लगातार कम होती जा रही है. फसल बीमा योजना के कारण किसानों को एक नई समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है. कृषि लोन के लिए अप्लाई करने वाले किसानों के साथ बैंक की ओर से मनमानी की जा रही है. 


‘मिंट’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों की ओर से किसानों को जबरन फसल बीमा योजना दिया जा रहा है. दरअसल, कृषि लोन लेने वाले किसानों की राशि से बीमा का प्रीमियम काट लिया जा रहा है. यहां तक कि बैंक किसानों को प्रीमियम भुगतान की रसीद भी नहीं दे रहे हैं. लोन लेने वाले किसानों से यह भी नहीं पूछा जाता है कि वह फसल बीमा योजना लेना चाहते हैं या नहीं.
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