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पिछले तीन साल में लगातार घटी युपीएससी, एसएससी और आरआरबी से भर्तीयां

Published On :    14 Jan 2019   By : MN Staff
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कर्मचारी चयन आयोग एसएससी द्वारा पिछले कुछ सालों में निकाली गई भर्तियों के लिए आवेदन करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है.



नई दिल्ली: कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) द्वारा पिछले कुछ सालों में निकाली गई भर्तियों के लिए आवेदन करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है. हालांकि, नियुक्तियां घटी हैं. आयोग के मुताबिक उन्होंने पिछले दस सालों में दूसरी बड़ी भर्ती 2015-16 वित्तीय वर्ष में की है. 


यूपीए कार्यकाल के दौरान आयोग ने 2012-13 में 83 हजार 591 नियुक्तियां की थी. इसके बाद दूसरी सबसे बड़ी भर्ती 2015-16 में की गई. आयोग ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी देते हुए बताया कि ये नियुक्तियां तमाम मंत्रालयों और विभागों में की गई हैं. आयोग में आरटीआइ के माध्यम से पिछले कुछ सालों में आए आवेदन, उससे प्राप्त राजस्व और नियुक्तियों के बारे में पूछा गया था. 


आयोग ने जवाब दिया कि इस तरह का कोई आंकड़ा केंद्रीकृत रूप से नहीं रखा जाता. लेकिन वार्षिक रिपोर्ट में इन सभी जवाबों का जिक्र है. वार्षिक रिपोर्ट से पता चलता है कि एसएससी को सबसे ज्यादा 2016-17 में नौकरियों के लिए दो करोड़ आवेदन प्राप्त हुए. इससे पहले 2015-16 में एक करोड़ 48 लाख 27 हजार और 2014-15 में एक करोड़ 77 लाख 90 हजार से अधिक आवेदन तमाम पदों के लिए मिले हैं. 


रिपोर्ट के अनुसार 2014-15 में 58 हजार 66 और 2015-16 में 25 हजार 138 लोगों की नियुक्ति की गई है. 2012 से 2017 तक आवेदनों से प्राप्त शुल्क से एसएससी को 336 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व मिला. हालांंकि परीक्षा व अन्य कार्यों की वजह से खर्च की रकम इन्हीं सालों में 578 करोड़ रुपए से अधिक दर्शाई गई है. 


2016-17 में सबसे अधिक 71 करोड़ 67 लाख रुपए का राजस्व जमा हुआ. संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की ओर से बताए गए वेबसाइट लिंक से मिली जानकारी के अनुसार 2013-14 में 27 लाख 53 हजार, 2014-15 में 32 लाख 67 हजार और 2015-16 में 29 लाख 20 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए. 


परीक्षा में सिर्फ 16 लाख 17 हजार, 16 लाख 24 हजार और 15 लाख 27 हजार लोग ही शामिल हुए. वहीं इससे पहले 2006-07 में 11 लाख 8 हजार, 2007-08 में 10 लाख 99 हजार, 2008-09 में 9 लाख 41 हजार ही आवेदन आयोग को प्राप्त हुए थे. 2015-16 में 56 पदों के लिए निकाली गई भर्ती विज्ञापन के बाद रद्द की गई.


जिसमे  सहायक प्रोफेसर, शोध अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी और अपर निदेशक जैसे पद शामिल थे. आरटीआइ में जानकारी दी गई कि 2015 से 2018 तक तीन वित्तीय वर्षों में आयोग ने आवेदन शुल्क के रूप में 80 करोड़ रुपए का राजस्व इकट्ठा किया है.
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