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भाजपा की सत्ता में वादाखिलाफी का टूटता रिकार्ड

Published On :    16 Apr 2018   By : MN Staff
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जब से देश की सत्ता में संघ के नेतृत्ववाली मोदी सरकार सत्ता में काबिज हुई उसने अपने तीन वर्ष से अधिक समय के कार्यकाल में सबसे अधिक धोखेबाजी देश का भविष्य कही जानेवाली युवा पीढ़ी के साथ की है।



जिस समय से देश की सत्ता में संघ के नेतृत्ववाली मोदी सरकार सत्ता में काबिज हुई उसने अपने तीन वर्ष से अधिक समय के कार्यकाल में सबसे अधिक धोखेबाजी देश का भविष्य कही जानेवाली युवा पीढ़ी के साथ की है। 


इस सरकार ने सत्ता में आने से पूर्व देश के करोड़ां शिक्षित बेरोजगारां को रोजगार मुहैया कराने का वादा किया था। जिसने सबका साथ, सबका विकास का नारा लगाने में ही बिता दिये जिसके दूर-दूर तक कही भी दर्शन होते नहीं दिख रहे हैं जिसका साफ-साफ ये अर्थ निकलता है इस सरकार ने केवल दिखावटी घोषणाएँ करने का काम किया है। 


इसीलिए शोसल मीडिया ने संघसंचालित सरकार को फैंकू, की उपाधि दी है इसका मतलब यह हुआ कि मोदी सरकार ने कुछ काम करने की बजाय सबसे अधिक हल्ला मचाने का काम किया है जिसमें देश के मनुवादी मीडिया ने भी भरपूर सहयोग किया है। 


जो शासक वर्ग आदतसी बन चुकी हैं। मोदी सरकार ने सत्ता में सवार होकर अपने तीन वर्ष के शासनकाल में कोई नया काम करने की बजाएँ काँग्रेस की नीतियां को नया रूप देकर लागू करने का काम किया है। जिसका परिणाम सभी के सामने है कि देश के युवा शिक्षा लेने के बाद भी रोजगार की तलाश में दर-दर की ठोकरे खानें को मजबूर है।


इन करोड़ां मजबूर युवाओं में 99 प्रतिशत बेरोजगार, युवा एससी, एसटी, ओबीसी एवं मायनॉरिटी समुदाय के हैं। इसी प्रकार का हाल करने के लिए देश की राजनीति का भविष्य तय करने वाले राज्य उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव ईवीएम के माध्यम से भाजपा स्थापित हो चुकी है। 


भाजपा ने करने के लिए अपना घोषणा पत्र जारी किया था जिसमे 70 लाख युवाओं को रोजगार देने का पूरा करने का वादा भी किया है लेकिन यहाँ पर सवाल है कि जिसने आरक्षण का परिपालन में न करके सबसे पहले अपनी ओझी मानसिकता का परिचय दे दिया तो यह कैसे कहा जा सकता है और इसकी क्या गारण्टी है? वह सत्ता में आने के बाद पूरा ही करेगी।


देश में 70 वर्ष से सत्ता और विपक्ष की भूमिका में रहते हुए शासक वर्ग की राजनैतिक पार्टियां को सरकारां ने आज तक लड़कियां को ग्रेजुएट तक निःशुल्क शिक्षा का प्रबंधन क्यां नहीं किया क्योंकि देश के आजादी मिलने के बाद से सत्ता इन्हीं भाजपा एवं काँग्रेस के हाथों में रही है यानि यां कहा जाय कि पूरी संविधानिक पावर व शक्ति शासक वर्ग के हाथां में ही रही है


और आज भी है तो फिर अब जब सदियां से अधिकार वंचित वर्गां एससी, एसटी, ओबीसी एवं धर्म परिवर्तित अल्पसँख्यकां में बामसेफ, भारत मुक्ति मोर्चा कार्यक्रमां की बदौलत जागृति बढ़ रही है और शासक वर्ग के आज तकब किये गये मूलनिवासी विरोधी यानि संविधान विरोधी कृत्यां की सारी पोल खुल चुकी है और जानकारी बढ़ने से मूलनिवासी बहुजनां के भा.मु.मो. के साथ लाभबंद होने से रोकने के लिए शासक वर्ग ने गरीबां, युवाओं एवं महिलाओं के साथ धोखबाजी की हैं लुभावनेवादे घोषणा पत्र में शामिल करके सत्ता में सवार हो चुकी है। 


देश में आर्थिक नीतियाँ भाजपा और काँग्रेस ने मिली भगत से लागू किया जो मूलनिवासी बहुजनां के हक और संवैधानिक अधिकार खत्म करने का खतरनांक षड्यंत्र था जिसे काँग्रेस, बीजेपी और आरएसएस तीनां ने मिलकर यह फार्मूला निकाला और इसे हथियार के तौर पर लागू किया और आज वे संविधान को बिना छुए ही 85 प्रतिशत मूलनिवासी बहुजन समाज को मिले अधिकारां को खत्म करने का काम किया है


जो इनकी सबसे खतरनांक चाल है यह चाल क्यां चली गयी क्यांकि सदियों से अधिकार वंचित मूलनिवासी बहुजनां को सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक अधिकारां की संविधान द्वारा गारण्टी दी गयी है जिससे वे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में शासक वर्ग को टक्कर मिलने लगी जिसे शासक वर्ग (ब्राह्मण) आज तक हजम नहीं कर पा रहा हैं। 


इसलिए शासक वर्ग ने इन सभी अधिकारां से वंचित करने के लिए नई आर्थिक नीतियां का रास्ता चुना जो काँग्रेस ने अपने शासनकाल में नई आर्थिक नीतियां को लागू किया जिसका भरपूर समर्थन भारतीय जनता पार्टी ने भी किया क्यांकि उस समय सत्ता में काँग्रेस और विपक्ष में भाजपा रही है वहीं आज सत्ता में भाजपा है और विपक्ष में काँग्रेस है। 


जो इस समय काँग्रस की नीतियां को नया नाम देकर लागू कर रही है जिसका नाम मेक इन इण्डिया, स्किल इन इण्डिया, डिजीटल इण्डिया, स्टार्ट अप इण्डिया जैसे पूंजीपति हितैषी कार्यक्रम लागू कर रही है। 


ये सभी कार्यक्रम काँग्रेस की नीतियां का परिवर्तित स्वरूप है। जिसका एक मकसद भारत में लागू संविधान को खत्म करना है। जिससे देश के मूलनिवासी बहुजनां के हक एवं अधिकार लगातार खत्म हो रहे हैं और 85 प्रतिशत मूलनिवासी बहुनज समाज की हजारों समस्याआें का अम्बार लग रहा है जिसमें अशिक्षा, गरीबी, बरोजगारी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, भुमखरी और नक्सलवाद जैसी हजारां समस्याएँ पैदा हो रही है जिससे मूलनिवासी बहुजन समाज जूझ रहा है। 


जो इन्हीं काँग्रेस, भाजपा, कम्यूनिष्टां की मिली भगत का परिणाम है जो आज अप्रत्यक्ष रूप से मोदी सरकार की आर्थिक नीतियां का समर्थन कर रहे हैं। क्योंकि ये सभी राजनैतिक दल 3.5 प्रतिशत विदेशी ब्राह्मणों के हैं। 


जिसका एक मात्र मकसद है मूलनिवासी बहुजन समाज को सदियां पुरानी स्थिति में पहुँचाना और अपनी वर्ण, भेद, जातिभेद, अश्पृश्यता तथा क्रमिक, असमानता पर आधारित व्यवस्था को थोपना है। 


इसीलिए ये सब मिलकर एक साथ बैठकर काम कर रहे हैं ये केवल अगल-अलग राजनैतिक रूप में बँटे दिख रहे हैं जिसका मकसद (एससी, एसटी, ओबीसी एवं मायनॉरिटी) के लोगां को गुलाम बनाये रखना है। 


जो आज हम सभी को हजारां समस्या का मूल कारण है यानि आज भी हम इन ब्राह्मणां द्वारा उस स्थिति में पहुँचा दिये गये है जहाँ हम कथित आजादी के समय में थे। लेकिन उस समय भारत में इस प्रकार की स्थिति का निर्माण नहीं हुआ था जिस स्थिति का निर्माण इन विदेशी ब्राह्मणों की 70 वर्ष की सत्ता में हो गया है। 


गुलाम भारत में मात्र 17 करोड़ लोग गरीबी रेखा में थे तथा देश की मुद्रा यानि रूपया की कीमत एक डॉलर के बराबर थी तथा देश के ऊपर एक रूपया का कर्ज नहीं था तथा बेरोजगारी का नामो निशान नहीं था। 


जो आज बेरोजगार, शिक्षित युवाआें की सँख्या 20 करोड़ हो चुकी है लेकिन सन् 1947 को सत्ता स्थानांतरण के बाद इन विदेशी ब्राह्मणां की सत्ता के कारण यहाँ के मूलनिवासी बहुजन आज अशिक्षा, गरीबी, बेकारी जैसी हजारों समस्याओं में झोक दिया हैं इन ब्राह्मणां की 70 वर्ष की सत्ता में आज देश के ऊपर 86.95 लाख करोड़ का कर्ज हो चुका है जो इस समय प्रत्येक व्यक्ति के ऊपर लगभग 50 हजार का कर्ज है और भारतीय मुद्रा की हालत तो पंख कटे पंक्षी की तरह हो गयी है। 


जिसकी कीमत आज एक डॉलर बराबर 68 रूपये है जिससे देश की आर्थिक प्रगति का अन्दाजा लगाया जा सकात हैं। कथित आजादी के समय जो 18 करोड़ लोग गरीबी रेखा पर जीवन जी रहे थे उनकी सँख्या कम होने की बजाएँ बढ़कर आज 83 करोड़ से अधिक हो चुकी है और शासक वर्ग ने 83 करोड़ लोगों को एक नई स्थिति में पहुँचाने का काम किया है उस रेखा का नाम है भुखमरी की रेखा। 


इतनी ही आज 35 करोड़ लोगों को शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध नहीं है 20 करोड़ लोग खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर है और 35 करोड़ लोगां को एक वक्त का खाना नसीब नहीं हो रहा है।

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