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सरकारी कर्मचारियों के बाद अब प्राइवेट कर्मचारियों पर आफत?

Published On :    17 Apr 2018   By : MN Staff
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कर्मचारियों के खर्च पर जीएसटी लगाने की तैयारी में मोदी सरकार



नई दिल्ली:

♦ इस प्रस्ताव के तहत अब कर्मचारियों पर घर के किराए, टेलीफोन बिल, अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम्स, हेल्थ चेकअप्स, किराया, जिम, पेशेवर परिधनों,  मनोरंजन या ऐसे ही अन्य खर्च पर जीएसटी लग सकता है। 


जब से केन्द्र में मोदी की सरकार बनी है तब से सरकार के रोज-रोज के नाटक से न केवल सरकारी कर्मचारी तंग आ चुके, बल्कि निजी क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारी भी परेशान हो रहे हैं। 


मोदी सरकार ने पहले सरकारी कर्मचारियों के ऊपर जीएसटी थोपा और अब निजी कर्मचारियों को जीएसटी में धकेलने के लिए कमर कस चुकी है। 


दैनिक मूलनिवासी नायक विशेष संवाददाता ने इंडिया टुडे की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि सरकार ‘अप्रत्यक्ष कमाई’ को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार कर रही है। इसके लिए जरूरी नियमों में बदलाव और प्रस्ताव को काउंसिल की अगली बैठक में हरी झंडी देने के मूड में है। 


अगर ऐसा हुआ तो निजी क्षेत्र के जिन कर्मचारियों को रिम्बर्समेंट (अदायगी) के रूप में वेतन का बड़ा हिस्सा मिलता है, उन्हें टैक्स चुकाना होगा। बताया जा रहा है कि रिम्बर्समेंट को जीएसटी के दायरे में लाने का विचार अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग (एएआर) के कैंटीन शुल्क पर एक हालिया फैसले से पनपा है। 


एएआर ने कहा है कि कर्मचारी से रिकवर किया गया कैंटीन शुल्क जीएसटी के दायरे में आता है। इस फैसले से प्रभावित होकर वर्तमान नियोक्ता टैक्स बचाने के लिए कैंटीन सेवाओं का शुल्क लेना बंद कर सकते हैं, जिससे वेतन पैकेज पर प्रभाव पड़ेगा। नियोक्ता अपने कर्मचारी की कॉस्ट टू कंपनी (सीटीसी) में बढ़ोत्तरी करना नहीं चाहेंगे।


बता दें कि इंडिया टुडे ने सीए मनिंद्र तिवारी के हवाले से लिखा है कि एएआर के फैसले जीएसटी काउंसिल पर बाध्य नहीं हैं, दोनों संस्थाएं एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं। एएआर वित्त मंत्रालय के तहत काम करता है और इसका अधिकतर काम आयकर विभाग से जुड़ा है, जबकि जीएसटी पर एक अलग जीएसटी काउंसिल फैसले करती है। 


फिर भी जीएसटी काउंसिल नियमों में बदलाव करते समय एएआर द्वारा दिए गए फैसले पर विचार कर सकती है। रिम्बर्समेंट पर अभी टैक्स नहीं लगता था, क्योंकि खर्च होने और उस पर संबंधित टैक्स के भुगतान के बाद ही दावा किया जाता है। 


लेकिन इसके जवाब में तर्क दिया जा रहा है कि रिम्बर्समेंट के जरिए अप्रत्यक्ष कमाई होती है जिस पर टैक्स लगना चाहिए। इस संबंध में एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि कंपनियां बिना रसीद दिए कर्मचारियों के वेतन से रिकवरी कर टैक्स से बच रही हैं। 


अगर जीएसटी काउंसिल यह फैसला लेती है तो नौकरीपेशा कर्मचारियों को तगड़ा झटका लगेगा। इस प्रस्ताव के नियम बनने का अर्थ यह होगा कि घर के किराए, टेलीफोन बिल, अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम्स, हेल्थ चेकअप्स, किराया, जिम, पेशेवर परिधानों, मनोरंजन या ऐसे ही अन्य खर्च पर जीएसटी लग सकता है।

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