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सैनिकों के ऊपर आफत ही आफत

Published On :    16 Mar 2019   By : MN Staff
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आईएल एंड एफएस बांड में डूबी 210 करोड़ की सेना बीमा निधि



नई दिल्ली: पूर्व सैनिक के कल्याण की अहम निधि आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड (एजीआईएफ) की 210 करोड़ की राशि टॉक्सिक आईएल एंड एफएस बांड में फंस गई है. मतलब जनरल से लेकर जेसीओ और जवान सभी रैंक की बीमा किस्तों की करोड़ों की रकम डूबने का खतरा बन चुका है. 


हाल ही में, भारतीय सेना के अधिकारियों ने आईएल एंड एफएस के नए बोर्ड से मिलकर इस समस्या के समाधान की मांग की. लेकिन इस बात का कोई सीधा जवाब नहीं मिला कि इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? आईएल एंड एफएस समूह के मुख्य संचार अधिकारी ने कहा, हमसे संपर्क करने के लिए धन्यवाद! हम उस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. 


बता दें कि सदस्यों की जमा राशि के साथ ब्याज और बोनस का भुगतान एक सैनिक की सेवानिवृत्ति पर किया जाता है. किसी सदस्य की मृत्यु होने पर परिक्वता की राशि का भुगतान मृत्यु लाभ के साथ उसके अगले रिश्तेदार को किया जाता है. 15 साल की सेवा के बाद कोई सदस्य अपने बच्चों की शिक्षा/ विवाह के लिए परिपक्वता लाभ का 50 फीसदी निकाल सकता है. इसके अलावा, मकान की मरम्मत या सेवानिवृत्ति के अंतिम दो साल के दौरान वाहन के लिए परिपक्वता राशि का 90 फीसदी निकाल सकता है.


सेवा के दौरान मृत्यु होने वाले सैन्यकर्मियों के परिवारों को बीमा लाभ 50 लाख अधिकारियों को और 25 लाख जेसीओ/ओआर को प्रदान किया जाता है, वहीं मासिक राशि क्रमशः 5,000 और 2,500 रुपये है.


आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड एक्सटेंडेड इंश्योरेंस स्कीम में सैनिकों को सेवा से मुक्त होने पर बीमा कवर प्रदान की जाती है. इसमें अधिकारियों को छह लाख रुपये और अधिकारी से नीचे के रैंक के सैन्यकर्मियों को तीन लाख रुपये सेवानिवृत्ति के बाद 26 साल के लिए या 75 साल की उम्र तक के लिए प्रदान किए जाते हैं. 


पूर्व सैनिक की मृत्यु हाने पर उनके परिवार द्वारा यह राशि प्राप्त की जाती है. हाल ही में इसमें संशोधन करके इसे अधिकारी व अधिकारी से नीचे के रैंक वालों के लिए क्रमशः 10 लाख और पांच लाख कर दिया गया है. यह उनके लिए है जो इस स्कीम में एक जनवरी 2014 के बाद शामिल हुए हैं.


यही नहीं घायल या बीमार होने के कारण समय से पहले सेवा से अशक्त होकर बाहर हो जाते हैं. शतप्रतिशत अशक्तता वाले अधिकारियों और जेसीओ/ओआर को क्रमशः 25 लाख और 12.5 लाख की राशि मिलेगी. बड़ा सवाल यह है कि इस निधि पर कौन नजर रख रहा है? अगर यह विशाल राशि विषाक्त आईएल एंड एफएस बांड में फंसती है तो कौन इसका दायित्व लेगा इसका जवाब नहीं है.

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