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अर्थशास्त्रियों ने सरकारी आंकड़ों में राजनीतिक दख़ल पर जताई चिंता

Published On :    16 Mar 2019   By : MN Staff
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देश-विदेश की शीर्ष वित्तीय संस्थाओं से जुड़े अर्थशास्त्रियों ने कहा कि वित्तीय आंकड़े नीतियां बनाने और जनता की भलाई के लिए महत्वपूर्ण है. इसलिए जरूरी है कि इन आंकड़ों को इकठ्ठा और प्रसारित करने वाली संस्थाएं राजनीतिक हस्तक्षेप का शिकार न हों और इनकी विश्वसनीयता बनी रहे.



नई दिल्ली: देश-विदेश के अर्थशास्त्रियों और समाजशास्त्रियों ने आर्थिक आंकड़ों में राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर चिंता जतायी है. कुल 108 विशेषज्ञों ने एक संयुक्त बयान में सांख्यिकी संगठनों की ‘संस्थागत स्वतंत्रता’ बहाल करने का आह्वान किया है. 


सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) आंकड़ों में संशोधन करने तथा एनएसएसओ द्वारा रोजगार के आंकड़ों को रोककर रखे जाने के मामले में पैदा हुए विवाद के मद्देनजर यह बयान आया है. इस बयान में कहा गया है कि वित्तीय आंकड़े जनता की भलाई के लिए होते हैं. नीतियां बनाने और जानकारी भरे सामाजिक विमर्श के लिए इनका होना महत्वपूर्ण है. इसलिए डाटा जुटाने के वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल और अनुमान, उनका समय से जारी होना जनता की सेवा जैसा है.


ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि इन आंकड़ों को इकठ्ठा करने और प्रसारित करने वाली केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) तथा राष्ट्रीय नमूना सर्वे संगठन (एनएसएसओ) जैसी संस्थाएं राजनीतिक हस्तक्षेप का शिकार न हों और इनकी विश्वसनीयता बनी रहे. यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर ऐसी संस्थाओं को पेशेवर स्वायत्तता दी जाती है. 


इस बयान में यह भी कहा गया कि दशकों से भारत की सांख्यिकी मशीनरी की आर्थिक से सामाजिक मानदंडों पर उसके आंकड़ों को लेकर बेहतर साख रही है. आंकड़ों के अनुमान की गुणवत्ता को लेकर प्रायरू उसकी (सांख्यिकी मशीनरी) आलोचना की जाती रही है लेकिन निर्णय को प्रभावित करने तथा अनुमान को लेकर राजनीतिक हस्तक्षेप का कभी आरोप नहीं लगा.


उन्होंने सभी पेशेवर अर्थशास्त्रियों, सांख्यिकीविद और स्वतंत्र शोधकर्ताओं से साथ आकर प्रतिकूल आंकड़ों को दबाने की प्रवृत्ति के खिलाफ आवाज उठाने को कहा. साथ ही उनसे सार्वजनिक आंकड़ों तक पहुंच और उसकी विश्वसनीयता तथा संस्थागत स्वतंत्रता बनाये रखने को लेकर सरकार पर दबाव देने को कहा है.


बयान में इस संबंध में सीएसओ के 2016-17 के संशोधित जीडीपी वृद्धि अनुमान के आंकड़ों का हवाला दिया गया है. इसमें संशोधित वृद्धि का आंकड़ा पहले के मुकाबले 1.1 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 8.2 प्रतिशत हो गया जो एक दशक में सर्वाधिक है. इसको लेकर संशय जताया गया है.


वक्तव्य में एनएसएसओ के समय समय पर जारी होने वाले श्रम बल सर्वेक्षण के आंकड़ों को रोकने और 2017- 18 के इन आंकड़ों को सरकार द्वारा निरस्त किये जाने संबंधी मीडिया रिपोर्ट पर भी चिंता जताई गई है. 


राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के प्रमुख पद से हाल में इस्तीफा देने वाले सांख्यिकविद पीसी मोहनन ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश में सांख्यिकी आंकड़ों में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप पर 108 अर्थशास्त्रियों और सामाजिक विज्ञानियों की चिंता को राजनीतिक दलों को गंभीरता से लेना चाहिए.

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