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सलाखों के पीछे सबसे ज्यादा मूलनिवासी समाज

Published On :    22 Jul 2019   By : MN Staff
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मध्य प्रदेश की जेलों में बंद हैं क्षमता से 47 प्रतिशत अधिक कैदी



भोपाल :   मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक जेलों की क्षमता 28,601 कैदियों की है. लेकिन, यहाँ 42,057 कैदी बंद हैं. यानी क्षमता से 47 प्रतिशत अधिक कैदी हैं. यह बात मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रदेश के गृह मंत्री बाला बच्चन ने बताया. 


प्रदेश विधानसभा में शनिवार को प्रश्न काल के दौरान कांग्रेस के विधायक मुन्नालाल गोयल द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में प्रदेश के गृहमंत्री बाला बच्चन ने बताया कि 31 दिसंबर 2018 तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की जेलों में कुल 42,057 कैदी बंद थे. जबकि, जेलों की क्षमता 28,601 कैदियों की है. 


उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की जेलों में क्षमता से 47 फीसद अधिक कैदी बंद हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश की जेलों की क्षमता बढ़ाने के लिये प्रयास कर रही है. एक सवाल के लिखित जवाब में गृहमंत्री ने बताया कि प्रदेश की सभी 125 जेलों में वीडियों कॉन्फ्रेसिंग की सुविधा उपलब्ध है.


बता दें कि इसी साल अप्रैल महीने में जारी किए गए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक देश की 1,400 जेलों में बंद 4.33 लाख कैदियों में से 67 प्रतिशत कैदी विचाराधीन हैं. इसके अलावा 1,942 बच्चे भी हैं जो अपनी माताओं के साथ जेल में रह रहे हैं. 


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एनसीआरबी की रिपोर्ट के ही अनुसार, 31 दिसंबर, 2016 तक कुल 4,33,003 कैदी जेल में बंद थे. इन कैदियों में 1,35,683 दोषी, 2,93,058 विचाराधीन और 3,089 निरुद्ध किए गए थे. जेल में बंद विचाराधीन और दोषी कैदियों की संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है.


अगर कैदियों के बारे में पूरा डाटा निकाला जाय तो हैरान करने वाले आंकड़े आयेंगे. क्योंकि, इन कैदियों में सबसे ज्यादा एससी, एसटी, ओबीसी और मुसलमान कैदी हैं. यही नहीं इन कैदियों में फाँसी की सजा पाने वाले भी एससी, एसटी, ओबीसी और मुसलमान समुदाय से सबसे अधिक हैं. 


20 मई 2016 के एक रिपोर्ट के अनुसार 20 राज्यों एवं एक केन्द्र शासित प्रदेश की जेलों में बंद फांसी की सजा पाये373 कैदियों और उनके परिवार वालों के बातचीत के आधार पर तैयार रिपोर्ट में चौंकाने वाल आंकड़े आये थे कि 74.1 फीसदी कैदी फांसी की सजा पाने वाले आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग से हैं. यह बात सिद्ध करती है कि एससी, एसटी, ओबीसी और मुसलमानों को जानबूझकर न केवल जेलों में डाला जा रहा है, बल्कि उनको फांसी की सजा भी सुनाई जा रही है.

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