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‘एससी, एसटी और अल्पसंख्याक फासीवादी ताक़तों को भारत पर क़ब्ज़ा नहीं करने देगा’

Published On :    22 Jul 2019   By : MN Staff
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देश बचाओ, दस्तूर बचाओ कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं का सुर



जयपुर :   भारत की अंतिम प्राधिकृत शक्ति संविधान है और इसका संचालन इसी से होगा| भारत के मुसलमान, धार्मिक अल्पसंख्यक, अनु.जाति और ट्राइबल संविधान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और किसी भी फासीवादी ताक़त को भारत पर क़ब्ज़ा नहीं करने दिया जाएगा. जयपुर में देश बचाओ, दस्तूर बचाओ कॉन्फ्रेंस में वक्ताओंने यह बात कही.समारोह का आयोजन तहरीक उलामा ए हिन्द के बैनर तले किया गया था.

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर मौलाना तौक़ीर रज़ा ने कहा कि देश में सेकुलर विचार मरा नहीं है जबकि नरेन्द्र मोदी ने देश की धर्म निरपेक्षता को नुक़सान पहुंचाने का कार्य किया है. उन्होंने कहा कि असली देशद्रोही वह है जो अपने ही भाई का क़त्ल करे. जो अपने वतन से प्रेम नहीं करता, वह सच्चा मुसलमान नहीं है. उन्होंने मुसलमानों को यदि उचित सम्मान चाहिए तो हमें अपने चरित्र को भी महान् बनाना पड़ेगा. मुसलमानों को चाहिए वह राजनीतिज्ञ और पुलिस को ख़ुश करने की बजाय अपने ख़ुदा को ख़ुश करने का प्रयास करें.




मुख्य आयोजक एवं तहरीक उलामा ए हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष खालिद अय्यूब मिस्बाही ने इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद साहब की हदीस का हवाला देते हुए बताया कि पैग़म्बर साहब ने कंघी के दांतों की बराबरी का उदाहरण देते हुए कहा था कि इसी प्रकार हर मानव बराबर है. उन्होंने कहाकि किसी भी प्रकार की प्रताड़ना के जवाब में हम किसी भी हालत में क़ानून हाथ में नहीं लेंगे. उन्होंने संविधान की रक्षा और मुस्लिम अनु.जाति, जनजाति एकता पर बल दिया. उन्होंने कहा हम हर प्रताड़ना का मुक़ाबला संविधान के दायरे में शिक्षा, एकता और संघर्ष से करेंगे. उन्होंने मुसलमानों को भावना की बजाय विवेक से सोचने की प्रवृत्ति विकसित करने की अपील की. 

डीयु के प्रोफेसर अपूर्वानन्द ने कहाकि हमें संविधान के आधार पर बराबरी का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहाकि संविधान में लिंग, भाषा, न्याय में बराबरी और भाईचारे को महत्व दिया गया है. यह राजनीतिक सत्य है. हमें संविधान की इन चार मूल भावनाओं में चौथे शब्द भाईचारे को सबसे ज्यादा ख़तरा है. उन्होंने कहाकि फासीवादी ताकतें आज मुसलमानों से भारतीय होने का सुबूत मांग रही हैं. जो उचित नही हैं.

पीयूसीएल की महासचिव कविता श्रीवास्तव ने कहाकि राजकीय संस्थाओं में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कब्ज़ा हो चुका है. भारतीय संस्थाएं जैसे थाने, अदालतों का एक हिस्सा और सामाजिक न्याय की कई संवैधानिक संस्थाएं साम्प्रदायिक हो चुकी हैं. उन्होंने राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर निकृष्टता का आरोप लगाते हुए कहाकि राज्य में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं हैं. 

ऑल इंडिया तंज़ीम उलामा ए इस्लाम के संस्थापक अध्यक्ष मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि देश बचाओ, दस्तूर बचाओ कॉन्फ्रेंस का मुख्य मुद्दा देश और संविधान बचाना है. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ‘ग़ैरों’ की सलाह पर चलती है, इसके दुष्परिणाम देश को भुगतने पड़ रहे हैं. उन्होंने कहा संविधान की रक्षा के लिए मुसलमानों, एससी और एसटी को एक साथ आगे आने होगा. 

समाजसेवी हाजी रफअत ने कहाकि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हम बहुत गंभीर हैं. उन्होने कहाकि हम मीडिया के बायकॉट की घोषणा करें, इससे बेहतर है मीडिया अपने रवैये को बदले अन्यथा मीडिया यदि मुसलमानों के विरुद्ध अपना एजेंडा चलाती है तो हम भी उससे मुंह मोड़ लेंगे. इसका जवाब हम केबल कटवाने और अख़बार बंद करने से करेंगे.

बामसेफ के प्रतिनिधि परमेन्दर ने कहाकि आज हम सभा में इसलिए जमा हो पा रहे हैं क्योंकि हमारे पुरखों ने इस संविधान की रक्षा की है. उन्होंने बामसेफ प्रमुख वामन मेश्राम के संदेश की व्याख्या करते हुए कहाकि देश और संविधान ख़तरे में हैं. जिन लोगों ने इस देश को ख़तरे में डाला है उन ज़ालिमों की पहचान होनी चाहिए. उन्होंने कहाकि हम इसलिए आज़ाद नहीं हुए क्योंकि हम पुलिस में आज भी अपनी एक प्राथमिकी दर्ज नहीं करवा पाते हैं. परमेन्दर ने कहाकि समस्या का अर्थ है दास होना और अगर हम परेशान हैं तो इसका तात्पर्य है हम स्वतंत्र नहीं हुए. उन्होंने कहाकि भारत की सत्ता विदेशों के हाथों में है. 

दिल्ली में संविधान जलाने वाले लोगों से इस देश को ख़तरा है. उन्होंने क़ुरआन की पवित्र आयत का हवाला देते हुए याद दिलाया कि यह पवित्र पुस्तक हमें पीड़ित के साथ खड़े होने का आदेश देती है. आदिवासियों को जंगलों से बेदख़ल किया जा रहा है, दलितों से छुआछूत किया जा रहा है और पिछड़ों का मानसिक शोषण जारी है. उन्होंने इस सामाजिक और राजनीतिक शोषण के विरुद्ध बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा के आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया. उन्होंने ईवीएम मशीन को राक्षस की संज्ञा दी और चुनाव को पुराने बैलेट पेपर से करवाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया.

जेएनयु के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ हफ़ीज़ुर्रहमान ने कहाकि सत्ता का चरित्र विचारधारा पर होता है परन्तु राष्ट्र को बहुवाद पर चलाए जाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहाकि मुसलमानों को भावना की बजाय शिक्षा और रोज़गार के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना होगा. उन्होंने कहाकि जिस प्रकार महात्मा बुद्ध की विचारधारा को भारत से अधिक विदेशों में मान्यता मिली, आज यह स्थिति महात्मा गांधी के लिए बनाई जा रही है. हम मानते हैं कि यह देश भीमराव अम्बेडकर की विचारधारा पर ही चल सकता है.
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