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गुजरात में 1500 लोगों ने ली बौद्ध धम्म की दीक्षा

Published On :    27 Oct 2019   By : MN Staff
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सौराष्ट्र के सुरेंद्रनगर में रहने वाली मंजुला मकवाना ने बताया, ‘‘मैंने इस कार्यक्रम में अपने पति और 3 बच्चों के साथ बौद्ध धम्म की दीक्षा ली. बौद्ध धम्म को अपनाने का एकमात्र कारण समानता है. क्योकिं हिंदू हमें समानता का अधिकार नही दे रहे थे. अनुसूचित जातिं के खिलाफ भेदभाव व अत्याचार के काफी मामले हम देख चुके हैं. सुरेंद्रनगर इसके लिए कुख्यात है.’’



अहमदाबाद :  गुजरात के अलग-अलग इलाकों में रहने वाले 1500 अनु.जाति के लोगों ने बौद्ध धम्म की दीक्षा ली. इस कार्यक्रम का आयोजन बुद्ध लाइट इंटरनेशनल असोसिएशन (बीएलआईए)की गुजरात इकाई की ओर से किया गया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएलआईए के प्रमुख ताइवान के बौद्ध भिक्षु हसीन बाऊ ने की. वहीं, देश-विदेश के बौद्ध भिक्षुओं ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया. इस दौरान लोगों ने पहले बीएलआईए में रजिस्ट्रेशन कराया और उसके बाद बौद्ध धर्म का पालन करने का संकल्प लिया.


बीएलआईए के गुजरात अध्यक्ष तुषार श्रीपाल ने बताया कि करीब 1400 लोगों ने इस कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था. वहीं, बीएलआईए गुजरात के वरिष्ठ सलाहकार सोलंकी के मुताबिक, 1400 लोगों के अलावा कार्यक्रम में ऐसे काफी लोग मौजूद थे, जिन्होंने पहली बार बौद्ध धर्म का पालन करने का संकल्प लिया.



यह भी पढ़िए : दीपावली एक बौद्ध उत्सव है


सौराष्ट्र के सुरेंद्रनगर में रहने वाली मंजुला मकवाना ने बताया, ‘‘मैंने इस कार्यक्रम में अपने पति घनश्याम मकवाना और 3 बच्चों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया. बौद्ध धर्म को अपनाने का एकमात्र कारण समानता है. क्योकि हिंदू हमें समानता का अधिकार नही दे रहे थे. अनुसूचित जातिं के लोगों के खिलाफ भेदभाव व अत्याचार के काफी मामले हम देख चुके हैं. सुरेंद्रनगर इसके लिए कुख्यात है.’’


अहमदाबाद के नरोदा में रहने वाले निसर्ग परमार पेशे से इंजीनियर हैं.निसर्ग के परिवार के करीब 25 लोगों ने इस कार्यक्रम में बौद्ध धम्म अपनाया. परमार ने बौद्ध धम्म अपनाने को लेकर इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, ‘‘हम हिंदू धर्म का पालन करते थे, लेकिन हमें इसमें मौजूद भेदभाव पसंद नहीं है. बौद्ध धम्म समानता का संदेश देता है. ऐसे में हमने आज बौद्ध धम्म का पालन करने का संकल्प लिया. मैं चाहता हूं कि भारत पूरी दुनिया में सबसे अच्छा देश बने, लेकिन जातिवाद इस रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट है, जिसमें लोगों के साथ भेदभाव होता है.’’


बता दें कि अशोका विजया दशमी पर गुजरात के अलग-अलग हिस्सों के करीब 500 लोगों ने बौद्ध धम्म की दीक्षा ली. जिसके लिए अहमदाबाद, मेहसाणा और साबरकांठा जिले में कार्यक्रम आयोजित किए गए थे.


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