×
भारत /

सरकारी कर्मचारी को अपने राजनीतिक विचार व्यक्त करने का अधिकार त्रिपुरा हाईकोर्ट ने निलंबन किया खारिज

Published On :    13 Jan 2020   By : MN Staff
शेयर करें:


लिपिका पॉल नाम की याचिकाकर्ता को उनके रिटायरमेंट से चार दिन पहले ही राज्य मछली पालन विभाग ने दिसंबर 2017 में एक राजनीतिक कार्यक्रम में भाग लेने और फेसबुक पर राजनीतिक पोस्ट लिखने के कारण निलंबित कर दिया था.



नई दिल्ली : त्रिपुरा हाईकोर्ट ने बीते गुरुवार को अपने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसले में राजनीतिक रैली में शामिल होने और फेसबुक पोस्ट लिखने के कारण नौकरी से निलंबित की गईं एक महिला कर्मचारी का निलंबन खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा, ‘सरकारी कर्मचारी को बोलने की आजादी है.’ कोर्ट ने कहा कि त्रिपुरा सिविल (कंडक्ट) रूल्स, 1988 के रूल 5 के तहत प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए सरकारी कर्मचारी को अपने राजनीतिक विचार व्यक्त करने का अधिकार है.


मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी ने कहा, ‘याचिकाकर्ता को एक सरकारी कर्मचारी के रूप में बोलने की आजादी से अछूता नहीं रखा जा सकता है. ये एक मौलिक अधिकार है, जिस पर पाबंदी सिर्फ कानून के आधार पर लगाई जा सकती है. आचरण नियमों के नियम पांच के उप-नियम 4 के तहत तय की गई सीमारेखा को ध्यान में रखते हुए उन्हें अपने विचार रखने और अपने तरीके से जाहिर करने का अधिकार है.’ नियम 5(1) के मुताबिक कोई भी सरकार कर्मचारी किसी भी राजनीतिक दल का सदस्य या उससे जुड़ा नहीं हो सकता है. नियम (4) के तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकता है.



ये भी पढ़िए : अमेरिका कश्मीर में इंटरनेट पर पाबंदी और नेताओं की हिरासत पर चिंतित


उन पर आचरण नियमों के नियम 5 और केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के नियम 9 (2) (बी) के तहत राजनीतिक रैली में भाग लेने और किसी राजनीतिक नेता के खिलाफ अपमानजनक और अभद्र टिप्पणी करके राजनीतिक पार्टी के खिलाफ प्रचार करने का आरोप लगाया गया था.
अनुशासनात्मक कार्रवाई के मामलों में अपने सीमित अधिकार क्षेत्र की ओर ध्यान दिलाते हुए अदालत ने कहा, ‘आमतौर पर कोर्ट उस समय दखल नहीं देता है जब विभाग ने सिर्फ चार्जशीट जारी किया हो और विभागीय कार्रवाई होनी बाकी हो. हालांकि ऐसे मामले जरूरत आते है जिसमें कोर्ट को तय करना होता है कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप किसी दुराचार की श्रेणी में आते हैं या नहीं.’



कोर्ट ने पाया कि जबकि पॉल राजनीतिक रैली के दौरान उपस्थित थीं लेकिन इससे ये स्पष्ट नहीं होता कि वो रैली में भाग ले रही थीं. जस्टिस कुरैशी ने कहा कि ‘उपस्थित होने’ और ‘भाग लेने’ में अंतर होता है और सिर्फ याचिकाकर्ता के वहां उपस्थित होने से ये नहीं तय होता कि उनका राजनीतिक रूप से कोई ताल्लुक है.कोर्ट ने यह भी कहा कि पॉल के फेसबुक पोस्ट में कुछ भी ऐसा नहीं लिखा था जिससे ये पता चलता हो कि उन्होंने किसी राजनीतिक पार्टी के खिलाफ बोला है. 


इस आधार पर कोर्ट ने पॉल के निलंबन को खारिज कर दिया और सरकार को निर्देश दिया कि वे दो महीने के भीतर रिटायरमेंट के बाद दी जाने वाली सभी सुविधाएं उन्हें दी जाएं. बता दें कि लिपिका पॉल नाम की याचिकाकर्ता को उनके रिटायरमेंट से चार दिन पहले ही राज्य मछली पालन विभाग ने दिसंबर 2017 में एक राजनीतिक कार्यक्रम में भाग लेने और फेसबुक पर राजनीतिक पोस्ट लिखने के कारण निलंबित कर दिया था.


PAY BACK TO THE SOCIETY NATIONWIDE AGITATION FUNDDonate Here



संपर्क करें

आपके पास अगर कोई महत्वपुर्ण जानकारी, लेख, ओडीयो, विडीयो या कोई सुझाव हैै तो हमें नीचे दिये ई-मेल पर मेल करें.:

email : news@mulniwasinayak.com


MN News On Facebook

लोक​प्रिय
भारत ने अपने यहां बना लिया हैं नकली अयोध्या, राम भी भारतीय
योगी के मंत्री ने बाढ़ रोकने के लिए दिये पूजा के निर्देश
समाचार एजेंसी पीटीआई पर लगाया 84 करोड़ रुपये से ज़्यादा का ज
एचएएचसी अस्पताल बगैर नोटिस दिए ही 84 नर्सों को नौकरी से कि
शारीरिक रूप से अक्षम लोग एससी/एसटी जैसा लाभ पाने के हक़दार
नोटबंदी के 4 साल बाद पुराने नोट बदलने की तिरुपति मंदिर की
पाला बदलने वाले विधायक बने मध्यप्रदेश में मंत्री
बैंक अथवा पोस्ट ऑफिस से अधिक रक्कम निकालने पर कटेगा ज्या
रूस में कोरोना वैक्सीन का मानव परीक्षण सफल
मंत्री के बेटे को नाइट कर्फ्यू का पालन न करने पर रोका
विकास दुबे के बहाने ब्राह्मणों के समर्थन में उतरी बसपा
लॉकडाउन में सरकारी कंपनियों की हालत खराब, निजी कंपनियाँ
एचडीएफसी बैंक में ऑटो लोन जारी करनें में हुआ करोड़ों का खे
आतंकी विकास दुबे को मिला था नेता, अफसर और उद्योगपतियों का
दविंदर सिंह ने पाक उच्चायोग के साथ साझा की संवेदनशील जान
कैशलेस भारत बनाने में कोरोना वायरस की अहम भूमिका
जासूसी के आरोप में बीएसएफ जवान गिरफ्तार
गलवान घाटी के फिंगर 4 में अभी भी चीनी सेना मौजूद
श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के परिचालन में 110 प्रवासी मजदूरों क
छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति पर कॉमेडी करना पड़ा महंगा
COPYRIGHT

All content © Mulniwasi, unless otherwise noted or attributed.


ABOUT US

It is clear from that the lack of representation given to our collective voices over so many issues and not least the failure to uphold the Constitution - that we're facing a crisis not only of leadership, but within the entire system. We have started our “Mulnivasi Nayak“ on web page to expose the exploitation and injustice wherever occurring by the brahminical forces & awaken the downtrodden voiceless & helpless community.

Our Mission

Media is playing important role in democracy. To form an opinion is the primary work in any democracy. Brahmins and Banias have controlled the fourth pillar of the democracy, by which democracy is in danger. We have the mission to save the democracy & to make it well advanced in common masses.

© 2018 Real Voice Media. All Rights Resereved
 e - Newspaper