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खाली शाहीनबाग, आंदोलन को कुचने में कामयाब हुई सरकार

Published On :    24 Mar 2020   By : MN Staff
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लॉकडाउन कर खाली कराया गया शाहीनबाग धरना स्थल



नई दिल्ली : आखिरकार कोरोना वायरस की आड़ में संघी सरकार सीएए, एनपीआर और एनआरसी विरोधी आंदोलन को कुचलने में  कामयाब हो ही गई. जबकि, शाहीनबाग की प्रदर्शनकारी महिलाएं कोरोना वायरस को लेकर सरकार के हर आदेश का पालन करते आ रहीं थी. वायरस से बचाव का हर प्रकार से पालन कर रही थीं. लेकिन, यही महिलाएं तकरीबन दो महीनों से सरकार के सीएए, एनपीआर और एनआरसी को वापस लेने की मांग रही हैं. परन्तु, सरकार ने उनकी एक भी नहीं सुनी. अंतः सरकार उनके आंदोलन को कुचलने में कामयाब हो गई.


पुलिस उपायुक्त (दक्षिण-पूर्व) आरपी मीणा ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण लॉकडाउन (बंद) लागू किए जाने के बाद शाहीन बाग में प्रदर्शन स्थल को खाली करने का अनुरोध किया गया था. अधिकारी के अनुसार, जब प्रदर्शनकारियों ने जगह खाली करने से इनकार कर दिया तो कार्रवाई की गई और प्रदर्शन स्थल खाली करा लिया गया.


इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, शाहीन बाग धरना स्थल पर पहले दिन से बैठी एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा, मंगलवार सुबह धरना स्थल पर केवल 8-10 महिलाएं थीं. सुबह 7 बजे पुलिस ने उन्हें हटाया. शाहीन बाग में बहुत भारी पुलिस तैनाती है. महामारी को ध्यान में रखते हुए, प्रदर्शनकारियों की संख्या सीमित कर दी गई थी. महिला प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि पुलिस ने मंच को ध्वस्त कर दिया, पोस्टरों को हटा दिया, भारत के बड़े नक्शे को तोड़ दिया और इंडिया गेट की कलाकृति को निकाल दिया. जबकि, इससे पहले पिछले हफ्ते शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों ने कहा था कि यह निर्णय लिया गया है कि प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री के 50 से कम लोगों के जुटने के आदेश का पालन करेंगे. 


वहीं दूसरी प्रदर्शनकारी महिला ने कहा था कि बच्चों और बूढ़ों को अब धरना स्थल पर नहीं आने दिया जाएगा और प्रत्येक प्रदर्शनकारी अन्य प्रदर्शनकारियों से कम से कम एक मीटर दूर बैठेगा. फेस मास्क और सैनिटाइटर भी उपलब्ध कराए जाएंगे. सभी प्रकार से सुरक्षा को ध्यान में रखकर पालन किया गया था. यहीं तक की जनता कर्फ्यू के दौरान यहां पर केवल पांच महिलाएं थी, बाकी महिलाएं अपने चप्पलों को स्थल पर रखकर चली गई थीं. उससे पहले वायरस से बचाव के लिए एक तखत पर केवल दो ही महिलाएं बैठी रहती थीं. लेकिन, सरकार ने उन्हें यहां से हटा दिया. इसके साथ ही नौ धरना स्थलों को भी हटा दिया गया.



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डीसीपी (दक्षिण) अतुल कुमार ठाकुर ने कहा, हौज़ रानी विरोध स्थल को हटा दिया गया है. किसी को गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया. इसी तरह, जामिया विश्वविद्यालय, जाफराबाद और तुर्कमान गेट से मंगलवार सुबह प्रदर्शनकारियों को हटा दिया गया और कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है.


बता दें कि, दक्षिण पूर्व दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए का विरोध 15 दिसंबर से जारी है, जिसका नेतृत्व 300 अधिक महिलाएं कर रही थीं. इससे देश भर में इसी तरह के कई अन्य प्रदर्शन आयोजित हुए. इस विरोध प्रदर्शन में कई 80 साल से अधिक बुजुर्ग महिलाएं भी शामिल थीं. इससे पहले जनवरी में एक 25 वर्षीय व्यक्ति ने मंच से 50 मीटर दूर हवा में गोलीबारी की थी, इसके बाद भी प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे थे. अंत में सरकार उन्हें कोरोना वायरस की आड़ में हटाने में कामयाब हो गई.



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