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देश में वायरस स्थानांतरण बहुत हद तक काबू हो चुका है

Published On :    22 May 2020   By : MN Staff
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पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रोफेसर डॉ. आर. बाबू ने कहा, वैश्विक स्तर के मुकाबले देश में कोविड-19 (कोरोना वायरस) से मरने वालों का चार्ट निश्चित तौर पर फिलहाल नीचे की तरफ जा रहा है.



बंगलूरू : भारत की गोदी मीडिया झूठी खबरें फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ती है. चाहे मामला किसी से जुड़ा हो या नहीं, खासकर मुस्लिमों को लेकर तो और ज्यादा आक्रामक हो जाती है. इसी तरह से कोरोना वायरस को लेकर भी देखा जा रहा है कि देश में महामारी को लेकर जनता में खौफ भरा जा रहा है. इस मामले में गोदी मीडिया सबसे आगे है. किसी अच्छी खबर को बुरी खबर बनाने में तनिक भी देरी नहीं कर रहे हैं.


मालूम हो कि देश में अगर लॉकडाउन को इस महीने के अंत में खत्म कर दिया जाए तो भी कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों को चरम पर पहुंचने में जुलाई के मध्य तक का समय लगेगा. यह दावा करते हुए एक नामी महामारी विशेषज्ञ ने मंगलवार को कहा कि चरम पर पहुंचने के बावजूद देश में पिछले दो महीने के दौरान किए गए रोकथाम के मजबूत उपायों के कारण संक्रमण के मामलों में ‘मामूली बढ़ोतरी’ ही दिखाई देने की संभावना है.



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पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रोफेसर डॉ. आर. बाबू ने कहा, वैश्विक स्तर के मुकाबले देश में कोविड-19 (कोरोना वायरस) से मरने वालों का चार्ट निश्चित तौर पर फिलहाल नीचे की तरफ जा रहा है. डब्लूएचओ के साथ करीब छह साल तक काम कर चुके डॉ. बाबू कर्नाटक में पोलियो संक्रमण के ट्रांसमिशन पर काबू करने के लिए जिम्मेदार रहे हैं. उन्होंने कहा, इसका मतलब है कि देश में वायरस स्थानांतरण पर बहुत हद तक काबू किया गया है. उन्होंने कहा, अगर आप 30 मई को लॉकडाउन हटाते हैं तो हम जुलाई मध्य के करीब संक्रमण की पीक पर होंगे, क्योंकि इसके लिए आपको तीन इंक्यूबेशन पीरियड से गुजरना होगा, जो करीब डेढ़ महीना बैठता है.



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उन्होंने यह भी कहा कि इतना समय यह जानने के लिए पर्याप्त होगा कि नियंत्रित नहीं किए जाने की स्थिति में यह बीमारी कैसे फैलती है. उन्होंने कहा, यह कहना जल्दबाजी होगा, लेकिन अब भारत में अनियंत्रण जैसा कभी कुछ नहीं होगा. क्योंकि यदि आप लोगों को आज भी आजाद कर देते हैं तो वे वायरस फोबिया के कारण उन कामों को नहीं करेंगे, जिन्हें वे करते थे. उन्होंने कहा, ऐसे में हमारे पास संक्रमितों की उछाल उस स्थिति के मुकाबले कम रहने की संभावना है, जो स्थिति शुरुआत में ही कुछ नहीं किए जाने से बन सकती थी.



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