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राम मंदिर के नींव में डाला जाएगा टाइम कैप्सूल, जिसमें राम मंदिर के होंगे साक्ष

Published On :    28 Jul 2020   By : MN Staff
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देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहें हैं. पूरे देश की जनता कोरोना महामारी का सामना कर रही हैं. कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए अनलॉक.2 में स्कूल, कॉलेज से लेकर संभी शैक्षिक संस्थान बंद हैं.



नई दिल्ली : देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहें हैं. पूरे देश की जनता कोरोना महामारी का सामना कर रही हैं. कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए अनलॉक.2 में स्कूल, कॉलेज से लेकर संभी शैक्षिक संस्थान बंद हैं. सभी तरह की धार्मिक और सामाजिक संस्था की सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया हैं. विवाह में 50 और मयत में 20 लोगों को शामिल होने की इजाज़त दी गई हैं. ऐसे स्थिती में राम मंदिर ट्रस्ट की और से पांच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों राम मंदिर का शिलान्यास करने की खबरे आ रही हैं. इस बिच एक खबर ऐसी आ रही जो चौंकाने वाली हैं. कहा जा रहा हैं की राम मंदिर नींव के नाचे टाइम कैप्सूल डाला जाएगा ताकि आगे चलकर विवाद पैदा ना हो.


अमर उजाला की खबर के अनुसार भविष्य में फिर से ऐसा कोई सवाल या विवाद न खड़ा हो, इसके लिए एक अहम कदम भी उठाने की चर्चा है. राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने कहा था कि राम मंदिर की नींव में 2000 फीट नीचे टाइम कैप्सूल डाला जाएगा, जिसमें राम मंदिर से जुड़े साक्ष्य होंगे. ऐसा इसलिए किया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियों में कभी इस तरह का विवाद हो तो सच्चाई का पता लग सके. हालांकि मंगलवार को ट्रस्ट के ही एक अन्य सदस्य ने इससे इनकार कर दिया. ट्रस्ट के सदस्य चंपत राय ने टाइम कैप्सूल की ख़बरें को निराधार करार दिया.


बता दें कि टाइम कैप्सूल एक कंटेनर है, जिसमें मौजूदा वक्त से जुड़े कागज़ात रखे जाते हैं. कंटेनर आमतौर पर एलॉय, पॉलिमर, पाइरेक्स मैटेरियल से बनता है. वैक्यूम होने के कारण टाइम कैप्सूल कंटेनर हर मौसम में सुरक्षित रहता है. यहां तक कि आग भी इस कंटेनर को जला नहीं सकती. कंटेनर जमीन की गहराई में रहता है और हजारों सालों तक इसे नुकसान नहीं होता है.



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टाइम कैप्सूल का विदेशों में खूब चलन है. भारत में पहली बार इसे 15 अगस्त, 1973 में इस्तेमाल किया गया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पहली बार लाल किले के सामने जमीन के नीचे एक टाइम कैप्सूल रखा था. आजादी की 25वीं सालगिरह पर टाइम कैप्सूल तैयार करवाया गया, जिसमें आजादी के बाद की घटनाओं और तथ्यों से जुड़े कई कागज़ात रखे हुए हैं. ये बात उस वक्त की अखबारों की सुर्खियाँ बनी थी. इसपर इंदिरा गांधी के खिलाफ विवाद भी हुआ था.



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बता दें कि अयोध्या यानी साकेत में राम मंदिर निर्माण के लिए किए जा रहे भूमी समतलीकरण के दौरान मोर्य कालिन बुद्ध के अवशेष मिले थे. जिसके बाद पूरे देशभर में हंगामा मचा था. इसके बाद बुद्धिष्ठ इंटरनैशनल नेटवर्क इस संगठन की और से साकेत बचाओं नाम से पूरे देशभर आंदोलन कर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौपा गया था. उनका दावा हैं की अयोध्या यह पुरानी साकेत नगरी हैं जो बौद्ध स्थल हैं. अब राम मंदिर के नींव में टाइम कैप्सूल डाला जाने के खबर के बिच शोसल मीडिया मे यह चर्चा हैं की आगे चलकर आयोध्या यानी साकेत पर कोई दावा ना करने और और राम मंदिर के साक्ष मिले. इसलिए मंदिर के नींव में टाइम कैप्सूल डालने की योजना हैं.


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