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मोदी सरकार में बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि के आए अच्छे दिन

Published On :    31 Jul 2020   By : MN Staff
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जीरो वसूली और 746 करोड़ माफ करने के बावजूद एसबीआई ने दिया 1200 करोड़ का लोन, प्रशांत भूषण ने साधा निशाना



नई दिल्ली : ऐसा लगता है की मोदी ने जनता को अच्छे दिन का जो आश्वासन दिया था वो आम जनता के लिए बल्कि उद्योपतियों के लिए था. क्यो की पीएम मोदी के कार्यकाल में ही माल्या, नीरव मोदी जैसे कई उद्योगपतिं सरकारी बैंकों को हजारों करोड़ का चूना लगाकर विदेश फरार हो गए हैं. अब एक और खबर आई हैं जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने निशाना साधा हैं. खबर यह हैं की बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि को एसबीआईने 746 का कर्जा माफ करने के बावजूद 1200 करोड़ रूपए का कर्जा दिया हैं.

दरअसल भारतीय स्टेट बैंक ने एक शेयरहोल्डर को दी गई जानकारी में बताया है कि उसने रुचि सोया इंडस्ट्रीज पर 746 करोड़ रुपये का कर्जा माफ कर दिया है. फाइनेंशियल ईयर 2019-20 में बैंक की ओर से यह लोन माफ किया गया है. खुद बैंक ने माना है कि इस लोन पर वह एक रुपये की भी वसूली नहीं कर सका है. इससे पहले इन्सॉल्वेंसी ऐंड बैकरप्सी कोड के तहत मंजूर प्लान के जरिए एसबीआई को 883 करो़ड़ रुपये की वसूली करनी थी. एक तरफ बैंक ने रुचि सोया पर बकाये लोन की वसूली नहीं की और दूसरी तरफ उसी कंपनी के अधिग्रहण के लिए बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद को 1,200 करोड़ रुपये का लोन दिया है.

वेबसाइट मनी लाईफ डॉट इन की रिपोर्ट को ट्विटर पर शेयर करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मशहूर अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने निशाना साधा हैं. प्रशांत भूषण ने ट्वीट किया, ‘746 करोड़ रुपये में से जीरो रिकवरी और राइट आफ के बाद भी स्टेट बैंक ने रुचि सोया को खरीदने के लिए पतंजलि को 1,200 करोड़ रुपये का कर्ज दिया है. निश्चित तौर पर साथियों के लिए अच्छे दिन आए हैं. इसके आगे उन्होंने लिखा, ‘यह सिर्फ पब्लिक का पैसा है, इसमें हमारे साथियों पर खर्च क्यों नहीं किया जाना चाहिए?



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दरअसल बैंकों के कंसोर्टियम ने बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद को रुचि सोया के अधिग्रहण के लिए कुल 3,200 करोड़ रुपये का कर्ज दिया है. इसमें सबसे ज्यादा एसबीआई ने 1,200 करोड़ रुपये की रकम कर्ज के तौर पर दी है. इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक ने 700 करोड़ रुपये, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 600 करोड़ रुपये, सिंडिकेट बैंक से 400 करो़ड़ और इलाहाबाद बैंक से 300 करोड़ का कर्जा दिया हैं.



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बता दें कि रुचि सोया पर कई बैंकों का कुल 12,146 करोड़ रुपये बकाया था. बैंकरप्सी कोर्ट के समक्ष एसबीआई के नेतृत्व में बैंकों ने इसके लिए क्लेम किया था. एसबीआई का सबसे ज्यादा 1,800 करोड़ रुपये बकाया था, लेकिन एसबीआई ने 883 करोड़ रुपये वसूलने की बात कही थी. दूसरे नंबर पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का 816 करोड़ रुपये, पीएनबी का 743 करोड़, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक इंडिया का 608 करोड़ रुपये और डीबीएस का 243 करोड़ रुपये बकाया था. भारतीय स्टेट बैंक की ओर से बैंक के शेयरहोल्डर और पुणे स्थित सजग नागरिक मंच के प्रेसिडेंट विवेक वेलांकर से कुछ़ दस्तावेज शेयर किए गए हैं. इसके मुताबिक बैंक ने रुचि सोया से मार्च, 2020 तक कोई वसूली नहीं की है.


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