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राष्ट्रीय किसान मोर्चा ने देशभर में फूंगा विधायकों का पुतला

Published On :    14 Sep 2020   By : MN Staff
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क्षेत्रीय विधायक पार्टियों के वफादार बनकर किसानों का सत्यानाश करवा रहे हैं : रामसुरेश वर्मा



नई दिल्ली : केन्द्र सरकार द्वारा किसान विरोधी अध्यादेश के खिलाफ सोमवार 14 सितंबर 2020 को राष्ट्रीय किसान मोर्चा के द्वारा देशभर में विधायकों का पुतला फूंगा गया. राष्ट्रीय किसान मोर्चा का यह तीसरे चरण का आंदोलन था. जबकि, पहला चरण और दूसरा चरण बीत चुका है. 16 अगस्त को पहले चरण में देशभर के 550 जिलों में जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया गया था. वहीं 31 अगस्त को दूसरे चरण धरना प्रदर्शन के साथ देशभर के 543 सांसदों का पुतला दहन किया गया और ज्ञापन सौंपा गया था.


बता दें कि केन्द्र की मोदी सरकार ने किसानों के नाम पर तीन अध्यादेश जारी किया है. ये तीनों अध्यादेश केवल पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाया गया है. इस अध्यादेश से देश के किसानों का रत्तीभर भी फायदा नहीं है, बल्कि सबसे ज्यादा नुकसान है. इसलिए राष्ट्रीय किसान मोर्चा सरकार के इस अध्यादेश का न केवल पूरजोर विरोध कर रहा है, बल्कि इसके खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन भी चला रहा है.


सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आंदोलन के तीसरे चरण में देशभर के 550 जिलों के तहसील मुख्यालयों पर रैली प्रदर्शन के साथ ही क्षेत्रीय विधायकों का पुतला फूंकर किसानों ने तत्काल प्रभाव से सरकार द्वारा जारी तीन कृषि अध्यादेश वापस लेने की मांग की. 


किसान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिन विधायकों का पुतला दहन किया जा रहा है ये वे विधायक हैं जो किसानों के वोट से विधायक तो बन जाते हैं, मगर सरकार द्वारा किसानों के खिलाफ बनाए जा रहे कानून के खिलाफ आवाज नहीं उठाते हैं. इसका मतलब है कि ये विधायक सरकार द्वारा किसान विरोधी कानून बनाने में शामिल हैं. इसलिए हम लोग इन विधायकों का पुतला दहन कर रहे हैं.



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किसान प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पूरे भारत में लगभग 1250 विधायक हैं. यही विधायक राज्यसभा सदस्य चुने जाते हैं, यही नहीं जब विधानसभा सत्र चलता तो यही विधायक उसमें शामिल होते हैं. लेकिन लगभग सभी प्रदेशों में किसानों के विक्रय उपज का एक साल से लेकर 10 साल का बकाया राशि है. राज्यसभा में कोई आवाज नहीं उठाते हैं. 


यही नहीं देश में प्राकृतिक आपदा का शिकार हुए हुए किसानों का स्थलीय निरीक्षण भी सही तरीके से नहीं करवाते हैं. और न ही उनके फसलों का लागत मूल्य का सही आकलन करवाकर क्षतिपूर्ति मूल्य में 50 प्रतिशत जोड़कर किसानों को दिलवाने की कोशिश करते हैं. हैरानी तो इस बात की है कि ये विधायक न तो राज्यसभा के अंदर किसानों के लिए लड़ते हैं और न ही बाहर, बल्कि पार्टियों का वफादार बनकर किसानों का सत्यानाश करवा रहे हैं.



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सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय किसान मोर्चा, सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि अध्यादेश का कड़ा विरोध कर रहा है और मांग करता है कि सरकार, किसान विरोधी इन तीनों अध्यादेशों को वापस ले. अगर सरकार किसान विरोधी इन अध्यादेशों को वापस नहीं लेती है तो  राष्ट्रीय किसान मोर्चा, आने वाले समय में सरकार के खिलाफ देशभर में आर-पार की लड़ाई शुरू करेगा. यह भी बता दें कि इस आंदोलन में बहुजन क्रांति मोर्चा, भारत मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, राष्ट्रीय मूलनिवासी अति पिछड़ी अनुसूचित जाति जागृति मोर्चा, राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा सहित हजारों संगठनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और आने वाले समय में होने वाले आंदोलन साथ सहयोग देने का आश्वासन दिया.



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