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पीएम केअर फंड में सरकारी कर्मचारियों के वेतन से काटकर जमा कराए 157 करोड़

Published On :    15 Oct 2020   By : MN Staff
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पीएमओ ने जवाब देने से किया इनकार



नई दिल्ली : पहले ही विवादों में घीर चुके पीएम केअर फंड को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार और पीएम मोदी विपक्षी दलों के निशाने पर हैं. ऐसे में एक और खबर आई हैं की केंद्र की मोदी सरकार ने केंद्रिय कर्मचारियों के वेतन से पैसा काटकर पीएम केअर फंड में 157 करोड़ रूपये जमा कराए. 


केंद्र का सबसे बड़ा सरकारी विभाग रेलवे से लेकर 50 विभागों के कर्मचारियों के वेतन से पैसा काटकर पीएम नागरिक सहायता और पीएम केयर फंड में राहत के लिए 157.23 करोड़ रुपये जमा कराए गये. इंडियन एक्सप्रेस के इस बात की जानकारी आरटीआई के जरिये मिली.

पीएम केयर्स फंड में दान देने वालों में सबसे टॉप पर रेलवे है जिसने 146.72 करोड़ रुपये का योगदान दिया है. एक आरटीआई के जवाब में रेलवे ने कहा कि कर्मचारियों से कंट्रीब्यूशन के जरिये पीएम केयर्स फंड में योगदान दिया गया है. आरटीआई जानकारी के आधार पर इस सूची में दूसरे नंबर पर अंतरिक्ष विभाग है. विभाग ने 5.18 करोड़ रुपये जमा कराए. विभाग ने कहा कि कि कर्मचारियों द्वारा किया गया योगदान व्यक्तिगत रूप से उनके वेतन से किया गया है.

हालांकि, कई प्रमुख विभाग, जैसे कि प्रधान मंत्री कार्यालय (पीएमओ), गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले लोग और डाक विभाग जैसे बड़े नियोक्ता ने इंडियन एक्सप्रेस के आरटीआई प्रश्नों का जवाब नहीं दिया. पीएम केअर फंड को मैनेज करने वाले पीएमओ ने पहले भी प्राप्त राशि के विवरण को देने से मना कर दिया था.



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एक आरटीआई के जवाब में पीएमओ का कहना था कि आरटीआई अधिनियम की धारा 2 (एच) के तहत पीएम केयर्स फंड एक सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है. हालांकि, पीएम केअर फंड के संबंध में प्रासंगिक जानकारी वेबसाइट चउबंतमे.हवअ.पद पर देखी जा सकती है. इसकी वेबसाइट के अनुसार 31 मार्च तक
3,076.62 करोड़ रुपये का कोष था, जिसमें से 3,075.85 करोड़ रुपये स्वैच्छिक योगदान के रूप में मिले थे.

इससे पहले अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस द्वारा आईटीआर रिकॉर्ड की पड़ताल में इस फंड से जुड़ी कई जानकारी सामने आई थीं. इसमें कहा गया था कि पीएम केअर फंड में न सिर्फ केंद्रीय शिक्षा संस्थानों से बल्कि कम से कम सात पब्लिक सेक्टर बैंकों, सात अन्य प्रमुख वित्तीय संस्थानों व बीमा कंपनियों और भारतीय रिजर्व बैंक ने मिलकर 204.75 करोड़ रुपए जुटाए.

ये बड़ी रकम इन सभी के स्टाफ की सैलरी काट कर इस फंड में पहुंचाई गई. रिकॉर्ड्स के मुताबिक, एलआईसी, जीआईसी यानी जनरल इन्सुरंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और नैशनल हाउसिंग बैंक ने भी लगभग 144.5 करोड़ रुपए के आसपास की रकम इस फंड के लिए दी. ये रुपए इन्होंने अपने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी सीएसआर आवंटन और अन्य प्रावधानों से इतर दिए हैं.



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बता दें कि कोरोना महामारी के चलते उपजे हालात पर खर्चा करने के लिए 28 मार्च को पीएम केयर्स फंड बनाया गया था. जब देश में सरकारी पीएम आपदा फंड हो इसके बावजूद पीएम मोदी ने पीएम केअर फंड की स्थापना की. पीएम केयर्स फंड यह सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है यह कह कर सरकार इस फंड में जमा हुए नीधी के खर्च को लेकर जानकारी देने से मना कर रही. जब की यही सराकर पारदर्शीता को ढोल पीटती है. 


इस फंड में जमा हुए पैसों के खर्च को लेकर यदि सरकार को कोई ड़र नहीं हैं तो विपक्षी दलों के साथ ही जनता को भी इसकी जानकारी देना चाहिए और जो लोग इस फंड में अफरातफरी के आरोप लगा रहे हैं उनका मुह बंद कर देना चाहिए. लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर रही है. बाकी आप समझदार हैं.


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