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बिहारः राज्य में बाढ़ से बर्बाद हुआ 7.54 लाख हेक्टेयर फसली क्षेत्र

Published On :    16 Oct 2020   By : MN Staff
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जहां एक ओर देश की जनता अचानक लॉकडाउन से भुखमरी का दंश रही थी अभी उभर नहीं पाई कि अब उन्हें बाढ़ ने बर्बाद कर दिया है. इस वर्ष बाढ़ से बिहार में 7.54 लाख हेक्टेयर फसली क्षेत्र प्रभावित हुआ है. वर्ष 2018 में बाढ़ से 0.034 मिलियन हेक्टेयर और वर्ष 2019 में 2.61 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र को क्षति पहुंची.



पटना : जहां एक ओर देश की जनता अचानक लॉकडाउन से भुखमरी का दंश रही थी अभी उभर नहीं पाई कि अब उन्हें बाढ़ ने बर्बाद कर दिया है. इस वर्ष बाढ़ से बिहार में 7.54 लाख हेक्टेयर फसली क्षेत्र प्रभावित हुआ है. वर्ष 2018 में बाढ़ से 0.034 मिलियन हेक्टेयर और वर्ष 2019 में 2.61 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र को क्षति पहुंची. 

आजादी के बाद 1953 से 2017 तक बिहार में बाढ़ से कुल 2.24 मिलियन हेक्टेयर फसली क्षेत्र का नुकसान हुआ, जिसका मूल्य 768.38 करोड़ रुपये है. यह जानकारी लोकसभा में सांसदों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए जवाब से मिली है.

इस वर्ष बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित जिलों में सीतामढ़ी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, दरभंगा, सारण जिले रहे. इस बार गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, लखनदेई, अवधारा समूह की नदियों ने सर्वाधिक क्षेत्र को प्रभावित किया. हालांकि बाढ़ से सबसे अधिक उत्तर बिहार के जिले प्रभावित होते हैं. उत्तर बिहार में तीन दर्जन से अधिक नदियां प्रवाहित होती हैं. 


इसमें से अधिकतर नेपाल से आने वाली नदियां हैं. जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बिहार की 13 नदियों-गंगा, कोसी-अधवारा, बूढ़ी गंडक, किलु हरोहर, पुनपुन, महानंदा, सोन, बागमती, कमला बलान, गंडक, घाघरा और चंदन नदी पर अब तक कुल 3,790 किलोमीटर तटबंध का निर्माण हो चुका है.

20 सितंबर 2020 को सांसद कार्ति पी. चिदंबरम के प्रश्न का जवाब देते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पिछले तीन वर्षों 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के दौरान बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने के कारण प्रभावित फसल क्षेत्र का विवरण देते हुए बताया था कि 2018-19 में 28 राज्यों में 17.097 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई. 



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इस विवरण में बिहार में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र की जानकारी नहीं दी गई है. वर्ष 2019-20 में पूरे देश के 114.295 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई, जिसमें बिहार में बाढ़ से प्रभावित कुल फसल 2.61 लाख हेक्टेयर थी. उन्होंने बताया कि इस वर्ष बिहार में 7.54 लाख हेक्टेयर फसली क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हुई. कृषि मंत्री द्वारा दिये गए ब्यौरे के अनुसार देश के 10 जिलों में 20.753 लाख हेक्टेयर फसल बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने से प्रभावित हुई है.

सांसद अशोक कुमार रावत द्वारा बाढ़ से होने वाले नुकसान के बारे में पूछे गए प्रश्न का जवाब देते हुए जल शक्ति और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने बताया कि वर्ष 2016 में बिहार में तकरीबन 89 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई जबकि 443.530 करोड़ मूल्य की 0.410 मिलियन हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ. बाढ़ से 16717 घर को क्षति पहुंची जिसका मूल्य 44.262 करोड़ है. बाढ़ में 254 लोगों की जान गई जबकि 246 पशुओं की मृत्यु हुई. 


जनसुविधाओं की क्षति 40.970 करोड़ की थी. फसल, घर और जन सुविधाओं की कुल क्षति 528.762 करोड़ है. जल शक्ति राज्य मंत्री ने 1953 से 2017 तक बाढ़ से हुई औसत हानि का ब्यौरा देते हुए बताया कि इस अवधि में बिहार में कुल फसल, घर और जनसुविधाओं की क्षति 2310.65 करोड़ है. इस दौरान 4.26 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र और 29.985 मिलियन आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई. कुल 2.24 मिलियन हेक्टेयर फसली क्षेत्र का नुकसान हुआ जिसका मूल्य 768.38 करोड़ रुपये है.



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बता दें कि सर्वे के अनुसार बाढ़ से बिहार में अधिकतम प्रभावित क्षेत्र 4.986 मिलियन हेक्टेयर है. यानी देश के कुल बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का 10 फीसदी हिस्सा बिहार का है. वर्ष 2006 में गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग द्वारा देश के 39 जिलों की पहचान बाढ़ प्रवण क्षेत्र के रूप में की गई, जिसमें बिहार के 15 जिले शिवहर, सीतामढ़ी, दरभंगा, गोपालगंज, सहरसा, मुजफ्फरपुर, सुपौल, मधुबनी, कटिहार, समस्तीपुर, भागलपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण, पूर्णिया और अररिया थे. इसमें शिवहर का 45.40, सीतामढ़ी का 39.63, दरभंगा का 38.69, गोपालगंज का 36.49, सहरसा का 35.38, मुजफ्फरपुर का 30.61, सुपौल का 22.61, मधुबनी का 20.53, कटिहार का 19.88, समस्तीपुर का 19.66, भागलपुर का 17.77, वैशाली का 17.53, पूर्वी चंपारण का 16.94, पूर्णिया का 15.69 और अररिया का 15.51 फीसदी क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित होता


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