×
भारत /

10 फीसदी सवर्ण आरक्षण भरने के लिए घटाया एससी, एसटी ओर ओबीसी का आरक्षण

Published On :    16 Oct 2020   By : MN Staff
शेयर करें:


संविधान लागू होने के बाद देश में सबसे ज्यादा विवाद आरक्षण पर हो रहा हैं. जिसमें कहा गया कि आरक्षण केवल 10 सालों के लिए था और 50 फीसदी से ज्यादा नहीं दिया जा सकता. इसके अलावा आर्थिक आधार पर आरक्षण कि बात खुब चल रही है, जब की संविधान में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है.



नई दिल्ली : संविधान लागू होने के बाद देश में सबसे ज्यादा विवाद आरक्षण पर हो रहा हैं. जिसमें कहा गया कि आरक्षण केवल 10 सालों के लिए था और 50 फीसदी से ज्यादा नहीं दिया जा सकता. इसके अलावा आर्थिक आधार पर आरक्षण कि बात खुब चल रही है, जब की संविधान में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है. फिर भी वर्तमान भाजपा सरकार ने गरीब ब्राम्हण और तत्सम उँची जातियों के लिए आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान कर दिया. अब सामने आया है की 10 फीसदी सवर्ण आरक्षण भरने के लिए एससी एसटी ओर ओबीसी का आरक्षण घटा दिया गया.


इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सिलेक्शन यानी आईबीपीएस द्वारा हाल ही में जारी की गई भर्ती अधिसूचना के अनुसार, 10 फीसदी आरक्षण को भरने के लिए एससी एसटी ओर ओबीसी का आरक्षण को घटा दिया गया है. आईबीपीएस  ने हाल ही में बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पंजाब एंड सिंध बैंक और यूको बैंक में रिक्त पदों को भरने के लिए आवेदन लिए गए थे. 


कुल 1,417 पदों में से ओबीसी के लिए 300, एससी के लिए 196 और एसटी के लिए  89 पद आरक्षित थे. दिलचस्प बात यह है कि गरीब सवर्णोंके लिए 10 प्रतिशत के आधार पर 142 पद आवंटित किए गए हैं. इसके अलावा लगभग 50 फीसदी यानी 690 पद अनारक्षित वर्ग के लिए छोड़ दिए गए हैं.


परीक्षा लिखने वाले राष्ट्रीयकृत बैंक के एक कर्मचारी ने कहा, मामला शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित होने के बावजूद केंद्र ने जल्दबाजी में इसे लागू किया, यह संविधान के खिलाफ है. पिछड़े वर्ग का 6 प्रतिशत और एससी, एसटी का 3.5 फीसदी आरक्षण कम करके उसे गरीब सवर्णां को बहाल किया गया. संख्या के अनुपात में देखा जाए तो 52 फीसदी ओबीसी को मात्र 27 फीसदी आरक्षण दिया गया है. जो दिया उसे भी पुरी तरह लागू नहीं किया. वर्तमान में ओबीसी की महज 5 से 7 फीसदी भागीदारी है, जब की शासन-प्रशासन और न्यायपालिका में आधी हिस्सेदारी उनकी होनी चाहिए थी. लेकिन क्रिमिलिअर लगाकर उनकी भागीदारी कम कर दिया और अब उनके हिस्से का आरक्षण आर्थिक तौर पर पिछड़े उच्च जातियों को दिया जा रहा है.



यह भी पढ़े : बिहारः राज्य में बाढ़ से बर्बाद हुआ 7.54 लाख हेक्टेयर फसली क्षेत्र



भाजपा की आरक्षण के मुद्दे पर क्या भूमिका रही है ये हमें समझना जरूरी है. भाजपा का संघ का मातृ संगठन है. संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने दिल्ली के कार्यक्रम में आरक्षण समाप्त करने का बयान दिया था. इससे भाजपा आरक्षण को लेकर किस प्रकार से सोच रही है, ये कोई अलग से बताने की बात नहीं है.


वहीं, मेरीट का डंका बजाने वाले ब्राम्हणों का कटऑफ मार्क्स से भी कम था. 2019 की यूपीएससी की एग्जाम के प्रीलिम के लिए जहां ओबीसी का कटऑफ 95.34फीसदी, एससी का 82 और एसटी का 77.34 फीसदी था, वहीं गरीब कहे जाने वाले ब्राम्हण और तत्सम उँची जाति के लिए वह 90 फीसदी था. 


अगर मुख्य परीक्षा कि बात करें तो ओबीसी के लिए 718, एससी के लिए 706 और एसटी के लिए 699 मार्क्स की कटऑफ थी और ब्राम्हणों के लिए 696 मार्क्स की कटऑफ थी. इससे साफ जाहिर होता है कि जो लोग मेरीट की बात करते है वह ओबीसी के मेरीट के साथ भी स्पर्धा करने लायक नहीं है. अब पिछडे सवर्ण का कट ऑफ कम होने से कार्यक्षमता पर इसका कोई असर नहीं होगा? दरअसल, सरकार को मेरीटधारी, या कार्यक्षम लोग नहीं बल्कि केवल उंची जाति के लोग चाहिए, जो ब्राम्हणी व्यवस्था को बनाए रखे.



यह भी पढ़े : लॉकडाउन के चलते 1930 की महामंदी के बाद सबसे गहरी मंदी से जूझ रही है दुनिया : विश्व बैंक



ब्राम्हण और तत्सम उँची जातियों को आरक्षण देते वक्त भाजपा सरकार ने संविधान को ताक पर रख कर महज 72 घंटों में इसे लागू कर दिया. इतनी तत्परता अन्य किसी आरक्षण को लागू करने के लिए न काँग्रेस और न भाजपा ने दिखाई. जब की इस 10 फीसदी आरक्षण बहुजन समाज ने काफी ज्यादा विरोध किया था. उनका सबसे ज्यादा विरोध इस बात को लेकर था कि ब्राम्हणों को आरक्षण देने के आड में कहीं एससी एसटी और ओबीसी का आरक्षण खत्म कर दे.


बता दें कि 10 फीसदी सवर्ण आरक्षण का मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों कि पीठ के सामने लंबित है, मगर फिर भी सरकार उसे जबरण लागू करवा रही है और इसके लिए वे बहुजनों के अधिकारों कि बलि चढ़ा रहे है.



PAY BACK TO THE SOCIETY NATIONWIDE AGITATION FUNDDonate Here



संपर्क करें

आपके पास अगर कोई महत्वपुर्ण जानकारी, लेख, ओडीयो, विडीयो या कोई सुझाव हैै तो हमें नीचे दिये ई-मेल पर मेल करें.:

email : news@mulniwasinayak.com


MN News On Facebook

लोक​प्रिय
बामसेफ और राष्ट्रीय मूलनिवासी संघ के 37 वे वर्चुअल अधिवेश
बिहार में उपेंद्र कुशवाहा का गठबंधन बन सकता हैं किंगमेकर
सरकार की आलोचना के लिए जनता को प्रताड़ित नहीं किया जा सकता
गुर्जर आरक्षण को लेकर आंदोलन तेज, करौली- भरतपुर में इंटरन
भाजपा की जनसभा मे 200 लोग भी नहीं जुटे, गुस्से में उमा भारती
प्रधानमंत्री की सभा में उडी नियमों की जमकर धज्जियाँ, खूद
रक्षा मंत्रालय ने ठुकराई सैनिको के हालात देखने लेह जाने
आरोग्य सेतु एप किसने बनाया, सरकार को नहीं पता
क्लीन चिट के बावजूद निलंबन नहीं किया जा रहा रद्द
सुशांत सिंह मामले में जी न्यूज़, इंडिया टीवी ने मांगी माफी,
भूपेश बघेल सरकार ने माफ किया टाटा पर लगा 200 करोड़ का जुर्मान
अशोका विजयादशमी पर पंजाब, हरियाणा में फुंके रावन की जगह प
उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र रावत की बढ़ी मुश्किले, हाईको
बिहार में पहले चरण के वोटिंग के दौरान कई जगह ईवीएम हुई खरा
पक्षतात के आरोप से घिरी फेसबुक की अधिकारी आंखी दास ने दिय
बामसेफ के 37वें वर्चुअल राष्ट्रीय अधिवेशन की जोरदार तैया
बिहार के मतदाताओं में बढ़ा भाजपा-जेडीयू गठबंधन के प्रति व
संघ परिवार से जुड़े दल के कार्यकर्ता ने ताजमहल परिसर में ल
प्रवासी मजदूर घर नहीं जा सकते, लेकिन देश में आ रहे अवैध हथ
बिहार में बाढ़ ने मचाया था हाहाकार, किसी दल ने नहीं बनाया च
COPYRIGHT

All content © Mulniwasi, unless otherwise noted or attributed.


ABOUT US

It is clear from that the lack of representation given to our collective voices over so many issues and not least the failure to uphold the Constitution - that we're facing a crisis not only of leadership, but within the entire system. We have started our “Mulnivasi Nayak“ on web page to expose the exploitation and injustice wherever occurring by the brahminical forces & awaken the downtrodden voiceless & helpless community.

Our Mission

Media is playing important role in democracy. To form an opinion is the primary work in any democracy. Brahmins and Banias have controlled the fourth pillar of the democracy, by which democracy is in danger. We have the mission to save the democracy & to make it well advanced in common masses.

© 2018 Real Voice Media. All Rights Resereved
 e - Newspaper