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सीएए विरोध प्रदर्शन में शामिल नाबालिग को 11 माह बाद जमानत

Published On :    20 Nov 2020   By : MN Staff
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यूपी की राजधानी लखनऊ में सीएए प्रदर्शन के बाद पुलिस ने ठाकुरगंज निवासी नाबालिग हसन (बदला हुआ नाम) को गिरफ्तार किया था. 11 महीने तक बाल सुधार गृह में रहने के बाद भले ही सेशन कोर्ट ने उसे जमानत दे दी, लेकिन अब स्कूल ने उसे रजिस्ट्रेशन डेट खत्म कहकर एडमिशन देने से इंकार कर दिया है.



लखनऊ : यूपी की राजधानी लखनऊ में सीएए प्रदर्शन के बाद पुलिस ने ठाकुरगंज निवासी नाबालिग हसन (बदला हुआ नाम) को गिरफ्तार किया था. 11 महीने तक बाल सुधार गृह में रहने के बाद भले ही सेशन कोर्ट ने उसे जमानत दे दी, लेकिन अब स्कूल ने उसे रजिस्ट्रेशन डेट खत्म कहकर एडमिशन देने से इंकार कर दिया है.


16 वर्षीय हसन ने इसी साल लखनऊ के राजकीय हुसैनाबाद इंटर कालेज से दसवीं पास की है. जब उसका रिजल्ट आया तो वह बाल सुधार गृह में ही था. रिजल्ट के बाद जब उसकी मम्मी 11वीं में एडमिशन के लिए स्कूल गईं तो वहां रजिस्ट्रेशन डेट खत्म बताकर एडमिशन के लिए मना कर दिया था. हालांकि न्यूज लाँड्री ने स्कूल की प्रिंसिपल से बात की तो उन्होंने एडमिशन का भरोसा दिया.



बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में पास होने के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे. इसी कडी में 19 दिसम्बर को लखनऊ में हुए विरोध-प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया था. जिसके बाद भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर लोगों को गिरफ्तार किया था. साथ ही सीएए प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों के चौक पर फोटो भी लगाए गए थे. जिसकी देश भर में आलोचना भी हुई थी. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने  इसका स्वतः संज्ञान लेकर राज्य सरकार को होर्डिंग हटाने के निर्देश दिए थे.


लखनऊ के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने न्यूज लाँड्री को बताया, इस घटना के बाद 19 दिसम्बर को प्रदर्शन स्थल से बहुत से लोगों को गिरफ्तार किया गया था. जिसमें बहुत से लोग फर्जी तरीके से फंसाए गए थे. इसी कड़ी में 25 दिसम्बर को 16 वर्षीय हसन (बदला हुआ नाम) को उसके मोहल्ले से मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार किया था. पुलिस ने इस पर धारा 307 सहित कुल 17 केस में मामला दर्ज किया. 



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इसके बाद इसे 11 महीने तक बाल सुधार गृह में रखा गया. वहां उसके कुछ अधिकारों का भी उल्लंघन हुआ. जैसे मिलने भी नहीं दिया जाता था. और अब उसे जमानत पर आने के बाद भी स्कूल में एडमिशन देने से मना कर रहे हैं.

सीएए-एनआरसी के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के बाद यूपी पुलिस पर नाबालिगों को गिरफ्तार करने, प्रताड़ित करने और उनके अधिकारों के हनन के काफी आरोप लगे थे. आजमगढ़ में भी पुलिस ने सीएए प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया था जिसे चार महीने तक सुधार गृह की जगह सामान्य कैदियों की जेल में ही रखा. 


उस केस की पैरवी कर रहे वकील ने न्यूज लॉन्ड्री से पुलिसिया लापरवाही की कहानी बयां की थी. पूरे उतर प्रदेश से पुलिसिया लापरवाही की ऐसी अनेक घटनाएं सामने आईं थीं. जिसमें पुलिस ने सीएए-एनआरसी के दौरान नाबालिगों को गिरफ्तार कर कुछ को तो यातनाएं भी दी थीं.



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हसन ने न्यूज लॉन्ड्री को बताया, मुझे यहीं से एक मुखबिर की सूचना पर छह दिन बाद रास्ते से पकड़ लिया था. वहां से थाने ले जाकर फिर कोर्ट में पेश किया, और वहां से जेल भेज दिया. हसन छह नवंबर को सुधार गृह से घर आया है. उसने हमसे भी गुजारिश की कि वह अब अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहता है. हसन ने कहा, सर, अगर आप करा सकते हो तो मेरा एडमिशन करा दीजिए.

राजकीय हुसैनाबाद इंटर कालेज की प्रिंसिपल वंदना मिश्रा से हसन के एडमिशन के बारे में बात की. तो उन्होंने हमें भरोसा दिलाया कि नियमानुसार अगर डेट बढ़ी है तो निश्चित ही उसका एडमिशन हो जाएगा. प्रिंसिपल ने बताया, जब उसकी मम्मी आई थीं तो डेट निकल गई थी और जब डेट दोबारा बढ़ी तो वह आई नहीं.


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