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महाराष्ट्र : मंदिरों के खुले कपाट, स्कूलों पर लटके ताले

Published On :    21 Nov 2020   By : MN Staff
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बीएमसी के सारे स्कूल 31 दिसंबर तक बंद



मुंबई : कोरोना महामारी के कारण देश भर में जहां एक तरफ मंदिरों के कपाट खोले जा रहे तों वहीं दूसरी तरफ स्कूलों में ताले जड़े जा रहे हैं. तकरीबन 9 महीनों से स्कूलों पर ताले लटक रहे हैं. इसका असर जितना अमीरों के बच्चों पर नहीं पड़ा है उससे ज्यादा गरीब तबकों के बच्चों पर पड़ा है. क्योंकि, अमीरों के बच्चे ऑनलाइन क्लास कर रहे हैं, इससे उनकी पढ़ाई निरंतर जारी है. लेकिन गरीब तबका पूरी तरह से शिक्षा से वंचित हो चुका है. यहां तक की गरीब तबकों के बच्चे धीरे-धीरे यह भी भूल रहे हैं कि स्कूल क्या होते हैं. 


सरकार का कहना है कि यह फैसला कोरोना महामारी को देखते हुए लिया गया है. लेकिन, सवाल है कि अगर स्कूल खोलने से महमारी बढ़ रही है तो क्या मंदिरों के खोलने से महमारी थम रही है? कुल मिलाकर कोरोना महामारी ने ब्राह्मणवादी सरकारों को देश के भविष्य कहे जाने वाले बच्चों का भविष्य बर्बाद करने के लिए एक सुनहरा अवसर दे दिया है. यही कारण है कि सरकार इस अवसर का फायदा उठाते हुए ऐसा फैसला ले रही है.


गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों को 31 दिसंबर तक बंद रखने का फैसला किया है. मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर ये फैसला लिया गया है. मेयर किशोरी पेडनेकर ने कहा कि बीएमसी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी स्कूल 31 दिसंबर तक बंद रहेंगे. मुंबई में कोविड-19 मामलों में वृद्धि के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है. 23 नवंबर को स्कूल दोबारा नहीं खुलेंगे.



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देश के अन्य राज्यों की तरह महाराष्ट्र सरकार ने भी दिवाली के बाद स्कूलों को फिर से खोलने की योजना बनाई थी. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा था कि सभी एहतियाती उपाय बरतते हुए दिवाली के बाद स्कूलों को फिर से खोला जाएगा. उन्होंने कहा था कि छात्रों के लिए सुरक्षा के सभी मानकों को ध्यान में रखते हुए एक एसओपी तैयार की है. इसके मुताबिक, स्कूलों में शिफ्ट के अंतर्गत पढ़ाई की जाएगी.हालांकि, राजधानी में बढ़ते संक्रमण ने एक बार फिर स्कूलों को खोलने के सरकार के इरादे पर पानी फेर दिया है.


वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि राज्य में 23 नवंबर से एक बार फिर कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को खोला जाएगा. सरकार ने कहा है कि इस दौरान शिक्षण संस्थानों में छात्रों की उपस्थिति 50 फीसदी से कम होनी चाहिए. इस फैसले के तहत आधे छात्रों को कॉलेज जाकर पढ़ाई करनी होगी. वहीं, आधे छात्र घर पर रहकर ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई करेंगे.



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