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मोदी सरकार को किसान आंदोलन से राजनीतिक और आर्थिक नुक़सान

Published On :    18 Feb 2021   By : MN Staff
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किसी भी पार्टी के लिए राजनीतिक नुक़सान आर्थिक नुक़सान से ज़्यादा बड़ा होता है. किसान आंदोलन की वजह से केंद्र की बीजेपी सरकार की माथे पर चिंता की लकीरें साफ़ दिखने लगी है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ बीजेपी का ख़ुद का आकलन है कि 40 लोकसभा सीटों पर किसान आंदोलन असर डाल सकता है.



नई दिल्ली : किसी भी पार्टी के लिए राजनीतिक नुक़सान आर्थिक नुक़सान से ज़्यादा बड़ा होता है. किसान आंदोलन की वजह से केंद्र की बीजेपी सरकार की माथे पर चिंता की लकीरें साफ़ दिखने लगी है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ बीजेपी का ख़ुद का आकलन है कि 40 लोकसभा सीटों पर किसान आंदोलन असर डाल सकता है. 


राजनीतिक क़ीमत का एक अंदाज़ा तो सरकार ने ख़ुद लगा लिया है, लेकिन उनके इस फ़ैसले का तात्कालिक आर्थिक नुक़सान भी देखने को मिल रहा है. स्पष्ट है कि बीजेपी किसान आंदोलन से चिंतित है, फिर भी क़ानून को लागू करने लिए अटल निश्चय किए बैठी है. इसका एक ही कारण है कि उसके पास ईवीएम मशीन है. आने वाले चुनाव में भी ईवीएम के माध्यम से बीजेपी सरकार बना लेगी, उसको न तो आम जनता के वोटों की जरूरत है और न ही किसानों के वोटों की जरूरत है.  


देशभर में संयुक्त किसान मोर्चा ने 18 फ़रवरी को चार घंटे के लिए रेल रोक दिया. जबकि इसके पहले भी किसानों ने रेल का चक्का जाम कर दिया था. दिल्ली बॉर्डर पर किसान आंदोलन शुरू होने से पहले दो महीने तक पंजाब में चला. इस दौरान किसानों ने कई (तक़रीबन 30 से ज़्यादा) रेलवे स्टेशनों के बाहर धरना दिया तो कई जगह पटरियों पर धरना दिया. इस दौरान रेल यातायात पंजाब में बाधित रहा और मालगाड़ियाँ भी प्रभावित रही. 



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नवंबर के अंत तक के अनुमान के मुताबिक़ भारतीय रेल को तकरीबन 2400 करोड़ का नुक़सान हुआ था. नहीं, सड़क परिवहन मंत्री ने बजट सत्र के दौरान लोकसभा को बताया कि किसान आंदोलन की वजह से कई टोल प्लाज़ पर शुल्क जमा नहीं हो पा रहा है. इससे रोज़ाना 1.8 करोड़ रुपए का नुक़सान हो रहा है. इसके साथ ही दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर पिछले 82 दिन से किसानों का धरना प्रदर्शन चल रहा है. तकरीबन 150 करोड़ का नुक़सान तो सिर्फ़ टोल प्लाज़ा से हो चुका है. अगर आंदोलन लंबा चला, तो इस नुक़सान में इजाफ़ा होता जाएगा.


इस परिस्थिति में सरकार को तत्काल प्रभाव से तीनों कृषि कानून रद्द कर मामले को शांत कर देना चाहिए. क्योंकि, महत तीन कानून के चलते सरकार को अरबों रूपयों का नुकसान हो रहा है. लेकिन सरकार तीनों कानून वापस न करके देश का सबसे बड़ा नुकसान कर रही है.



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