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फसल बीमा योजना की सफलता के गान के बीच निजी कंपनियों ने खारिज किए 75 फीसदी दावे

Published On :    6 Apr 2021   By : MN Staff
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे देशव्यापी आंदोलन के मद्देनजर अपनी सरकार को ‘किसान हितैषी’ दिखाने के एजेंडा के तहत 13 जनवरी को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) का गुणगान किया और योजना के पांच साल पूरा होने को लेकर किसानों को बधाई दी थी.



नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे देशव्यापी आंदोलन के मद्देनजर अपनी सरकार को ‘किसान हितैषी’ दिखाने के एजेंडा के तहत 13 जनवरी को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) का गुणगान किया और योजना के पांच साल पूरा होने को लेकर किसानों को बधाई दी थी. अपने एक ट्वीट में उन्होंने दावा किया कि इस योजना ने प्रकृति के प्रकोप से किसानों को बचाया है और करोड़ों किसानों को लाभ पहुंचाया है. 


इसी तरह नैनीताल के एक किसान खीमानंद पांडे के पत्र का जवाब देते हुए मोदी ने कहा कि फसल बीमा योजना के तहत दावा निपटारे की पारदर्शी प्रक्रिया, किसानों के कल्याण के लिए उनकी कोशिशों को दर्शाता है. जबकि, आधिकारिक दस्तावेज दर्शाते हैं कि किसानों द्वारा दायर किए गए फसल बीमा दावों को खारिज करने की संख्या में नौ गुना की बढ़ोतरी हुई है. इसमें से 75 फीसदी से अधिक दावे प्राइवेट कंपनियों द्वारा खारिज किए गए हैं.


आलम ये है कि बीमा कंपनी एचडीएफसी एर्गो ने कम से कम 86 फीसदी और टाटा एआईजी ने किसानों द्वारा दायर किए गए 90 फीसदी से अधिक दावों को खारिज कर दिया. वहीं रिलायंस जनरल ने 61 फीसदी से अधिक और यूनिवर्सल सोम्पो ने 72 फीसदी से अधिक फसल बीमा दावों को खारिज किया है. यह बात द वायर द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत प्राप्त किए गए दस्तावेजों के तहत ये जानकारी सामने आई है.


कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के दस्तावेजों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016-17 से 2019-20 के बीच छोटे स्तर पर हुए नुकसान को लेकर किसानों द्वारा दायर किए गए कम से कम 13.03 लाख दावों को खारिज किया गया है. इस दौरान किसानों ने सरकारी एवं प्राइवेट कंपनियों के सामने कुल 1.02 करोड़ दावे दायर किए थे. इसमें से 22.56 लाख दावे प्राइवेट कंपनियों के यहां दायर किए थे, जिसमें से 9.87 लाख दावे खारिज कर दिए गए. इस तरह प्राइवेट कंपनियों ने किसानों के 43.75 फीसदी दावों को खारिज कर दिया. वहीं सरकारी बीमा कंपनियों के सामने किसानों ने इस तरह के 54.53 लाख दावे दायर किए थे, जिसमें से 3.16 लाख दावों को खारिज कर दिया गया.



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दस्तावेज से यह भी पता चलता है कि जॉइंट वेंचर कंपनी एसबीआई जनरल, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की 70 फीसदी हिस्सेदारी है, के यहां कुल 25.35 लाख दावे दायर किए गए थे और इन्होंने ने सभी का भुगतान किया है. कुल मिलाकर देखें, तो साल 2017-18 में किसानों के 92,869 दावे, 2018-19 में 2,04,742 दावे और वित्त वर्ष 2019-20 में 9,28,870 दावों को खारिज किया गया है. मंत्रालय ने कहा है कि साल 2020-21 के लिए फसल बीमा दावों की गणना प्रक्रिया अभी चल रही है.

राज्य-वार स्थिति
इस मामले में यदि राज्य-वार आंकड़े देखें तो छोटे स्तर पर हुए नुकसान के चलते किसानों द्वारा दायर किए गए फसल बीमा दावे सबसे ज्यादा राजस्थान में खारिज किए गए हैं. यहां 2017-18 से 2019-20 के बीच बीमा कंपनियों ने कुल 3,84,017 दावों को खारिज किया है. इसमें से 3,61,984 दावे, साल 2019-20 में ही खारिज किए गए थे. इसके बाद दूसरे नंबर पर गुजरात है, जहां 2018-19 और 2019-20 में बीमा कंपनियों ने किसानों के 2,78,376 दावों को खारिज किया था. इसमें से 2,74,466 दावे सिर्फ 2019-20 में खारिज किए गए.


रिकॉर्ड के मुताबिक राज्य में 2017-18 में इस तरह के किसी फसल बीमा दावे को खारिज नहीं किया गया था. तीसरे नंबर पर हरियाणा है, जहां बीमा कंपनियों ने तीन सालों में 1,96,795 फसल बीमा दावों को खारिज किया है. इसमें से 2017-18 में 22,851 दावे, 2018-19 में 83,540 दावे और 2019-20 में 90,404 बीमा दावों को खारिज किया गया था. वहीं उत्तर प्रदेश में 2017-18 से 2019-20 के बीच किसानों के कुल 1,35,512 दावों को खारिज किया गया, जिसमें से अकेले 2019-20 में 1,09,935 दावों को बीमा कंपनियों ने खारिज किया था. इस दौरान महाराष्ट्र में 90,377 दावे, मध्य प्रदेश में 60,132 दावे, आंध्र प्रदेश में 21,358 दावे, छत्तीसगढ़ में 28,167 दावे, पश्चिम बंगाल में 15,183 दावों और तेलंगाना में 8,830 दावों को खारिज किया गया था.



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बता दें कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कुल 18 बीमा कंपनियां काम कर रही हैं, जिसमें से पांच सरकारी, 12 प्राइवेट और एक जॉइंट वेंचर कंपनी है. सरकारी कंपनियों में एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी (एआईसी), यूनाइटेड इंडिया, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी और न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी शामिल है. वहीं प्राइवेट कंपनियों में आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, बजाज आलियांज, भारती एक्सा, चोलामंडलम एमएस, फ्यूचर जनराली, एचडीएफसी एर्गो, टाटा एआईजी, रिलायंस जनरल इत्यादि शामिल हैं. वहीं किसानों एवं कृषि कार्यकर्ताओं का ये आरोप रहा है कि ये कंपनियां बहुत अधिक मात्रा में प्रीमियम वसूल रही हैं, लेकिन नुकसान होने पर पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलता है.

एचडीएफसी एर्गो
कृषि मंत्रालय के दस्तावेजों के मुताबिक बीमा कंपनी एचडीएफसी एर्गो को साल 2016-17 से 2019-20 के बीच प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों द्वारा कम से कम 3,74,503 दावे प्राप्त हुए थे, जिसमें से कंपनी ने 3,38,047 दावों को खारिज कर दिया. रबी 2019-20 सीजन में कंपनी ने उत्तर प्रदेश के किसानों का 17,432 दावा खारिज था तो उस बीच कंपनी के यहां कुल कितने दावे दायर किए गए थे. गणना करने पर पता चलता है कि बीमा कंपनी ने किसानों के कम से कम करीब 86 फीसदी दावों को खारिज किया है. सभी बीमा कंपनियों को मिलाकर सबसे ज्यादा एचडीएफसी ने ही फसल बीमा दावों को खारिज किया है.

यूनिवर्सल सोम्पो
एचडीएफसी के बाद सबसे ज्यादा यूनिवर्सल सोम्पो ने किसानों के 2,29,705 दावों को खारिज किया है. कंपनी को 2016-17 से 2019-20 के बीच कुल 3,17,732 फसल बीमा दावे प्राप्त हुए थे. इस तरह बीमा कंपनी ने 72 फीसदी से अधिक दावों को खारिज किया है. दस्तावेजों के मुताबिक खरीफ 2018 सीजन में हरियाणा के किसानों ने 35,575 बीमा दावा दायर किया था, लेकिन यूनिवर्सल सोम्पो ने इसमें से 21,116 दावों को खारिज कर दिया. इसी तरह खरीफ 2019 सीजन के लिए गुजरात में किसानों ने 1,70,890 दावा दायर किया था, लेकिन बीमा कंपनी ने 1,17,415 दावों को खारिज कर दिया.

अन्य कंपनियां
किसानों के फसल बीमा दावों को खारिज करने के मामले में तीसरे नंबर पर सरकारी बीमा कंपनी एआईसी है, जिसने 2016-17 से 2019-20 के बीच कुल 2,09,242 दावों को खारिज किया, जबकि इस दौरान किसानों द्वारा 3,58,949 दावे दायर किए गए थे. वहीं बजाज आलियांज ने साल 2016-17 से 2019-20 के बीच किसानों के 1.96 लाख फसल बीमा दावों को खारिज किया है. इस दौरान कंपनी के सामने कुल 8.20 लाख दावे दायर किए गए थे. जबकि, अनिल अंबानी की रिलायंस कंपनी भी पीछे नहीं है. इसकी बीमा इकाई रिलायंस जनरल ने साल 2016-17 से 2019-20 के बीच किसानों के 99,742 दावों को खारिज किया है.


सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बड़ी बीमा कंपनी आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने 2016-17 से 2019-20 के बीच 71,887 दावों को खारिज किया है. इस दौरान किसानों ने 1,32,724 दावे दायर किए थे. इसका अर्थ ये हुआ कि आईसीआईसीआई ने किसानों के 54 फीसदी से अधिक दावों को खारिज किया है. वहीं किसानों के फसल बीमा दावों को खारिज करने के मामले में बीमा कंपनी टाटा एआईजी का भी यही हाल है. 


इसमें 2016-17 से 2019-20 के बीच किसानों के 35,102 फसल बीमा दावों को खारिज किया है, जबकि इस दौरान कंपनी के सामने 38,917 दावे दायर किए गए थे. इस तरह टाटा ने 90 फीसदी से अधिक फसल बीमा दावों को खारिज किया है. इसके अलावा, यदि अन्य बीमा कंपनियों को देखें तो वर्ष 2016-17 से 2019-20 के बीच भारती एक्सा को कुल 27,287 फसल बीमा दावे प्राप्त हुए, जिसमें से उन्होंने 11,002 दावों को खारिज कर दिया.


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