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मोदी सरकार के पास नहीं है स्विस बैंक में छिपाए गए काले धन का कोई आधिकारिक अनुमान

Published On :    27 Jul 2021   By : MN Staff
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पिछले 10 वर्ष से स्विस बैंक में छिपाये गये काले धन का केंद्र सरकार के पास कोई आधिकारिक अनुमान नहीं है. सोमवार को लोकसभा में विन्सेंट एच पाला के प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने यह बात कही.



नई दिल्ली : पिछले 10 वर्ष से स्विस बैंक में छिपाये गये काले धन का केंद्र सरकार के पास कोई आधिकारिक अनुमान नहीं है. सोमवार को लोकसभा में विन्सेंट एच पाला के प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने यह बात कही. उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में विदेशों में छिपाये गये काले धन को वापस लाने के लिए सरकार ने अनेक प्रयास किये हैं जिनमें काला धन एवं कर अधिरोपण कानून को प्रभावी करना, विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करना आदि शामिल हैं.


चौधरी ने बताया कि इस साल 31 मई तक काला धन अधिनियम, 2015 की धारा 10(3)/10(4) के तहत 66 मामलों में निर्धारण आदेश जारी किये गये हैं जिसमें 8,216 करोड़ रुपये की मांग की गयी है. उन्होंने कहा कि एचएसबीसी मामलों में लगभग 8,465 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति को कर के अधीन लाया गया है और 1,294 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है.


आईसीआईजे (खोजी पत्रकारों का अंतरराष्ट्रीय संघ) मामलों में लगभग 11,010 करोड़ रुपये की अघोषित आय का पता चला है. चौधरी ने कहा कि पनामा पेपर्स लीक मामलों में 20,078 करोड़ रुपये के अघोषित जमाधन का पता चला है. वहीं पेराडाइज पेपर्स लीक मामलों में लगभग 246 करोड़ रुपये के अघोषित जमाधन का पता चला है.


गौरतलब है कि एचएसबीसी एक बहुराष्ट्रीय बैंकिंग और वित्तीय सेवा संगठन है, वहीं पनामा पेपर्स लीक मामले में भारत सहित दुनिया के कई प्रमुख लोगों द्वारा कर चोरी के पनाहगाह माने जाने वाले देशों में काला धन छिपाने की बात सामने आई थी. पेराडाइज पेपर्स लीक मामलों में खोजी पत्रकारिता से जुड़े एक संगठन ने कालेधन से जुड़े कुछ नये पेपर्स लीक किये थे. वहीं, वित्त राज्य मंत्री चौधरी ने बताया कि कालाधन कर अधिरोपण अधिनियम 2015 के तहत 107 से अधिक अभियोजन शिकायतें दर्ज की गई हैं.


बता दें कि पिछले महिने स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक की तरफ से जारी सालाना डेटा के मुताबिक, साल 2020 के दौरान स्विस बैंकों में भारतीयों और संस्थानों व कंपनियों का जमा धन बढ़कर 2.55 अरब स्विस फ्रैंक (करीब 20,700 करोड़) से अधिक हो गया. 2019 में स्विस बैंकों में जमा धन 6628 करोड़ रुपए थे. यानी साल 2020 में स्विस बैंकों में कुल जमा राशि साल 2019 की तुलना में बढ़ कर 286 प्रतिशत हो गई. कुल जमा राशि 13 साल में सबसे ज्यादा है जो साल 2007 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर है.



यह भी पढ़े : ब्रिटिश हाईकोर्ट से माल्या को तगड़ा झटका, दिवालिया घोषित करने से अब जब्त हो सकेगी सारी संपत्ति


हालांकि भारत सरकार ने उन रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया था, जिसमें दावा किया गया है कि स्विट्जरलैंड के बैंकों में भारतीयों का जमा पैसा बढ़कर 20 हजार करोड़ के पार पहुंच गया है. सरकार ने  उन खबरों का खंडन करते हुए कहा था कि जिनमें भारतीयों के स्विट्जरलैंड में कथित तौर पर काला धन रखने का आरोप है और कहा कि उसने स्विस अधिकारियों से जमा पैसों के बारे में जानकारी सत्यापित करने के लिए उसने संपर्क साधा है और सूचना की मांग की है.  



हालांकि, विपक्षी दलों ने स्विस बैंकों में जमा भारतीय नागरिकों का व्यक्तिगत पैसा और कंपनियों का पैसा 2020 में बढ़कर 20,700 करोड़ रुपये से अधिक हो जाने को लेकर केंद्र पर निशाना साधा था और कहा था कि सरकार श्वेत पत्र लाकर देशवासियों को बताए कि यह पैसा किनका है और विदेशी बैंकों में जमा कालेधन को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?


बता दें कि काला धन और विदेश में जमा पैसा लंबे समय से राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है. 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान यह मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. तमाम चुनावी दावे किए गए हैं कि स्विस बैंक में जमा काला धन वापस भारत लाकर लोगों के खातों में 15-15 लाख रुपये जमा करने का वादा किया था, लेकिन सात साल बीत जाने के बावजूद उसने अपने इस वादे को पूरा करने के लिए कुछ नहीं किया. काले धन को वापस लाना तो दूर बल्कि इसमे अब रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो गई है.


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