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झारखंड में बीजेपी की सरकार ने नियमों का उल्लंघन कर, दी अडानी को जमीन

Published On :    4 Dec 2018   By : MN Staff
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झारखंड सरकार पर आदिवासियों की ज़मीन बल-पूर्वक अडानी के हवाले करने का आरोप है.



रांची: मर्जी के खिलाफ खेतिहर जमीनों का अधिग्रहण रिपोेर्ट में दावा. झारखंड सरकार पर आदिवासियों की ज़मीन बल-पूर्वक अडानी के हवाले करने का आरोप है. आरोपों के मुताबिक झारखंड की सरकार ने नियमों का उल्लंघन करते हुए गोड्डा ज़िले के माली और इसके आसपास के गावों की खेती योग्य भूमि अडानी समूह की एक कंपनी को दे डाली.


इस दौरान संशोधित भूमि अधिग्रहण कानून का बड़े स्तर पर उल्लंघन किया गया. 2016 में  प्रदेश की बीजेपी सरकार द्वारा आदिवासियों से संबंधित कानून में संशोधन भी सवालों के घेरे में है. क्योंकि, अडानी ग्रुप ने जिन जमीनों का अधिग्रहण किया है, वे सभी आदिवासी बहुल गांवों की हैं. 


बिजनस स्टैंर्ड ने इंडियास्पेंड के हवाले से गांव के किसानों की पूरी दास्तान अपनी रिपोर्ट में बताई है. रिपोर्ट के मुताबिक माली गांव के किसानों का कहना है कि पुलिस बल के साथ कंपनी के लोग अपने साजो-सामान के साथ गांव में दाखिल हुए और खेतों पर कब्जा जमा लिया. 


इस दौरान उनके विरोध को पुलिस ने बल-पूर्वक दबा डाला. संथाल आदिवासी समाज से ताल्लुक रखने वाले किसानों ने बताया कि अधिग्रहण के वक़्त गांव में एक आदमी पर तकरीबन 10-10 पुलिस बल तैनात किए गए थे. इस दौरान फर्जी तरीके से उनकी सहमति के बगैर खेतों पर कब्ज़ा जमाया गया.


अडानी समूह के साथ माली और इससे जुड़े प्रभावित गांवों की लड़ाई 2016 से शुरू होती है. राजधानी रांची से करीब 380 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में अडानी समूह की ‘अडानी पावर(झारखंड)लिमिटेड’ ने करीब 2,000 एकड़ जमीन पर कोल फायर प्लांट लगाने का फैसला किया. 


गौतम अडानी की कंपनी ने इस बाबत जमीन की मांग झारखंड सरकार के सामने रखी.  जिसे हरी झंडी दे दी गयी.अडानी की कंपनी का लक्ष्य इस प्लांट से 2022 तक विद्युत का उत्पान शुरू कर देना है. यहां से पैदा हुई सारी बिजली बांग्लादेश को बेची जाएगी. 


गौरतलब है कि अगस्त, 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे के दौरान बिजली बेचने का मसौदा तैयार हुआ था. इस दौरान पीएम मोदी के साथ बांग्लादेश गए उद्योगपतियों में गौतम अडानी भी शामिल थे. 


ज़ब भूमि अधिग्रहण का नया कानून बना था तब तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा था कि कॉरपोरेट सेक्टर को जमीन चाहिए तो सीधे किसान के पास जाएं और खरीद लें. लेकिन, इंडियास्पेंड के हवाले से बताया गया है कि गोड्डा में अडानी के पावर प्लांट को लगाने में राज्य सरकार की भूमिका काफी अहम रही है.


6 मई, 2016 और अगस्त 2016 को अडानी ग्रुप ने झारखंड सरकार को चिट्ठियां लिखीं. इनमें गोड्डा जिले के 10 गांवों से 2,000 एकड़ भूमि अधिग्रहित करने की मांग की गयी. मई,2016 में ही झारखंड सरकार ने आदिवासी कानून में संशोधन किया था.


जिसके मुताबिक कमर्शियल इस्तेमाल के लिए आदिवासियों की जमीन खरीदी जा सकती है. जिसके बाद मार्च, 2017 में राज्य सरकार ने 6 गांवों से 917 एकड़ जमीन अधिग्रहित करने की बात कही. कॅप्शन-मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गांव वालों का आरोप है कि उनके दर्द को किसी ने महसूस नहीं किया है.


सभी सरकारी दफ्तरों और राज्यपाल को भी चिट्ठी लिखी. लेकिन, कहीं भी सुनवाई नहीं हुई. कंपनी के कर्मचारियों ने उनकी खड़ी फसलें तबाह कर दी. जबकि, उन्होंने कई महीनों तक दिन-रात मेहनत करके उसे सींचा और बोया था. फसल उजड़ जाने से वह दाने-दाने के लिए मोहताज हैं.


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