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दिल्ली में भूकंप झेलने लायक नहीं 80 फीसदी इमारतें.

Published On :    5 Feb 2019   By : MN Staff
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हाल ही में दिल्ली- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और जम्मू कश्मीर में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. इस भूकंप का केंद्र हिंदूकुश में था. झटकों से कोई नुकसान तो नहीं हुआ मगर इसने लोगों के दिलों में डर जरूर बैठा.



नई दिल्ली : हाल ही में दिल्ली- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और जम्मू कश्मीर में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. इस भूकंप का केंद्र हिंदूकुश में था. झटकों से कोई नुकसान तो नहीं हुआ मगर इसने लोगों के दिलों में डर जरूर बैठा दिया. 


इस भूकंप की तीव्रता तो कम थी मगर सवाल यह उठता है कि अगर दिल्ली जैसे शहर में भूकंप आया तो क्या होगा? जानकारों के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की इमारतें औसत से तेज भूकंप की स्थिति में भी सुरक्षित नहीं है. 


उत्तर-पूर्व के सभी राज्य, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्से जोन-5 में ही आते हैं. सिस्मिक जोन-4 में आने वाले देश के बड़े शहरों की तुलना में देश की राजधानी दिल्ली में भूकंप की आशंका ज्यादा बताई जाती है. 


भूगर्भशास्त्री के मुताबिक इसके पीछे का कारण दिल्ली का भारत और यूरेशिया प्लेट के मिलने से बने हिमालय के निकट होना है. धरती के अंदर की हलचल का खामियाजा यहां के लोगों को उठाना पड़ता है. चिंता तब और बढ़ जाती है जब आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि शहर की इमारतें भूकंप झेलने के मानकों के अनुसार नहीं बनी है. 


विशेषज्ञों के मुताबिक दिल्ली में 70 से 80 फीसदी इमारतें बड़ी तीव्रता के भूंकप का झटका झेलने योग्य नहीं है. यमुना के पूर्वी और पश्चिमी किनारे पर इमारतों का निर्माण मिट्टी की पकड़ के जांच को नजरअंदाज करके किया गया है. 


मगर सार्क डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर के मुताबिक अगर हम लातूर में आए भूकंप को ध्यान में रखे तो दिल्ली में असुरक्षित इमारतों के साथ बहुत ही सुरक्षित इमारतें भी है. तमाम आशंकाएं बस अनुमान पर आधारित है. नागरिक और सरकार सजग होकर अपनी जिम्मेदारी निभाए तो इस खतरे से निपटा जा सकता है



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