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अंधेरे में मूलनिवासी छात्रों का भविष्य

Published On :    16 Apr 2018   By : MN Staff
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की फीस में 5-17 फीसदी की बढोत्तरी



कोलकाता: शासक वर्ग लगातार मूलनिवासी बहुजन समाज के छात्रों का भविष्य चौपट करने के लिए हर रोज कोई न कोई कानून लागू कर रहा है। इसी कानून के तहत उच्च और प्रोफेशनल शिक्षा को महंगा बनाकर उनको शिक्षा के वंचित करने का षड्यत्र कर रहा है। 


इस बात का सनसनीखेज खुलासा तब हुआ जब पता चला कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) की फीस में भारी मात्रा में बाढोतरी कर दी गयी है।


दैनिक मूलनिवासी नायक प्रमुख संवाददाता से मिली जानकारी के अनुसार इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेट (आईआईएम) से पढ़ाई करना अब इस वर्ष से और ज्यादा महंगी हो गयी है। करीब आठ आईआईएम ने 2018-20 के बैच के लिए फीस में ज्यादा की बाढोतरी कर मैनेजमेंट की शिक्षा को महंगा बना दिया है। 


इसी के साथ कुछ आईआईएम में इसे बढ़ाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। गौरतलब है कि आईआईएम अहमदाबाद, बैंगलोर, कोलकत्ता और इंदौर जैसे टॉप इंस्टीट्यूट्स के अलावा हाल के वर्षों में खुले रोहतक, रांची, त्रिची, उदयपुर और अमृतसर के आईआईएम ने फीस में 05 फीसदी से लेकर 17 फीसदी के बीच बढ़ोतरी की है। इसके पीछे महंगाई का दबाव, फैकल्टी की सैलरी और इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च बढ़ने जैसे कारण बताए जा रहे हैं।


आपको बताते चले कि इंस्टीट्यूट के आधार पर छात्रों को जहां एमबीए के कोर्स के लिए 65,000 रुपये से 02 लाख रुपये के बीच अधिक चुकाने होंगे। वहीं आईआईएम अहमदाबाद की ओर से इस वर्ष फीस बढ़ाने के बाद अब देशभर के आईआईएम में दो वर्ष के पोस्ट ग्रेजुएट मैनेजमेंट प्रोग्राम की फीस 09 लाख से 22 लाख रुपये के बीच हो गई है। 


जबकि इस वर्ष फीस बढ़ाने वाले आईआईएम ने आईआईएम बैंगलोर की फीस अब बढ़कर 21 लाख रुपये हो गयी है। जो पिछले वर्ष 19.5 लाख रुपये की फीस से यह लगभग 08 फीसदी अधिक है। आईआईएम इंदौर ने भी फीस 02 लाख रुपये से बढ़ाकर 16 लाख रुपये कर दिया है। 


सभी आईआईएम में सबसे अधिक फीस लेने वाले आईआईएम अहमदाबाद ने हाल ही में फीस 21 लाख रुपये से बढ़ाकर 22 लाख रुपये कर दी है। आईआईएम अहमदाबाद ने लगातार तीसरे वर्ष फीस भी बढ़ाई है। आईआईएम कलकत्ता ने भी फीस में 01 लाख रुपये की वृद्धि की है और आगामी सेशन के लिए यह 21 लाख रुपये होगी। 


इसके अलावा आईआईएम रोहतक के डायरेक्टर, धीरज शर्मा ने बताया, ‘पुराने और मिड लेवल के हमारे जैसे आईआईएम के लिए फीस में बढ़ोतरी करना अब एक मजबूरी हो गई है। पहले 10 वर्षों के बाद आईआईएम को खुद रेवेन्यू हासिल करना है और अपने फंड के दम पर इंस्टीट्यूट चलाना है। फैकल्टी की सैलरी बढ़ी है, मेस की लागत बढ़ी है और सिक्योरिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे खर्चों में भी वृद्धि हुई है। 


इसके मद्देनजर फीस बढ़ाना जरूरी है।’ आईआईएम रोहतक को खुले हुए जल्द ही 10 वर्ष पूरे हो जाएंगे। इंस्टीट्यूट ने इस वर्ष अपनी फीस लगभग 7 पर्सेंट बढ़ाई है। आईआईएम रांची ने फीस में 12 पर्सेंट की बढ़ोतरी की है और यह 12.5 लाख रुपये से बढ़कर 14 लाख रुपये हो गई है। 


एक्सपर्ट्स का कहना है कि फीस में बढ़ोतरी का यह ट्रेंड आने वाले वर्षों में भी जारी रहने का अनुमान है। इसका मतलब यह हुआ कि मोदी सरकार मूलनिवासी छात्रों को उच्च एवं प्रोफेशनल शिक्षा से वंचित करने के लिए ही इस शिक्षा को महंगा कर दिया है।



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