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बुद्ध की क्रांतिकारी धरती पर फिर सामाजिक परिवर्तन क्रांति का आगाज

Published On :    16 Apr 2018   By : MN Staff
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‘‘दीन बचाओ, देश बचाओ’’ के नारों से गूंज उठा बिहार का ऐतिहासिक गांधी मैदान गांधी मैदान में उमड़ा 85 प्रतिशत मूलनिवासियों को जनसैलाब



भारत मुक्ति मोर्चा के माध्यम से ‘‘दीन बचाओ, देश बचाओ’’ को पटना में ऐतिहासिक सफलता के साथ सपन्न

पटना:  बहुजनों के आंदोलन के अग्रदूत तथागत बुद्ध की धरती बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में भारत मुक्ति मोर्चा, इमारत शरिया और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के माध्यम से ‘दीन बचाओ, देश बचाओ’ विशाल रैली का आयोजन रविवार 15 अप्रैल 2018 को ऐतिहासिक सफलता और हर्षोल्हास के साथ सम्पन्न हुआ। 


इस विशाल रैली में अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी और अल्पसंख्यक अर्थात 85 प्रतिशत मूलनिवासी बहुजन समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर न केवल हिस्सा लिया, बल्कि दीन बचाओ, देश बचाओं का संकल्प भी लिया। 


इस रैली का नजारा उस वक्त और ज्यादा रोचक हो गया जब दीन बचाओ, दस्तूर बचाओं के नारों से बिहार का चप्पा-चप्पा गूंज उठा। इस बात की गवाही बिहार की वो सड़कें दे रही हैं जो भीड़ की वजह से दिनभर जाम में फंसी रहीं। सूत्रों के अनुसार इस रैली में चार लाख से ज्यादा लोगों ने उपस्थित होकर ब्राह्मणवाद की नींव हिला दी है। 


एवं इस रैली ने आज साबित कर दिया कि एससी, एसटी और ओबीसी से हजारों साल से उसका बिछड़ा हुआ भाई मुसलमान आज एक हो गया है। इस रैली से बिहार सरकार से लेकर प्रशासन तक चौकन्ना था। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रैली की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी की गई थी। 


गांधी मैदान में जगह-जगह दंडाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों को महिला और पुरुष बल के साथ तैनात किया गया। मैदान के साथ-साथ शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर पुलिस तैनात किए गए थे। बड़ी-बड़ी इमारतों से भी मैदान की सुरक्षा का ख्याल रखा गया था। 


रैली को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पांच हजार सुरक्षाकर्मी, 300 डंडाधिकारी व 350 पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती की गई थी। सुरक्षा के साथ-साथ एंबुलेंस एंव चिकित्सक भी तैनात थे।


दैनिक मूलनिवासी नायक स्थानीय संवाददाता ने जानकारी देते हुए बताया कि इस विशाल रैली का उद्घाटन अमीर-ए-शरीयत मौलाना मोहम्मद वली रहमानी ने किया। वहीं वक्ताओं के रूप में हुज्जतुल इस्लाम हजरत मौलाना सैयद कलबे जव्वाद साहब नकवी (किबला मुजतहिद, लखनऊ), हजरत मौलाना खलीलुर रहमान सज्जाद नोमानी (प्रवक्ता ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड), हजरत मौलाना उमरैन महफूज रहमानी (माननीय सचिव ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड), हजरत मौलाना असगर इमाम मेहदी सलफी साहब (अमीर जमीयत अहल-ए-हदीस), हजरत मौलाना रफीकी कासमी (जमात-ए-इस्लामी हिन्द, नई दिल्ली) हजरत मौलाना अबु तालिब रहमानी (सदस्य ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, कोलकाता), हजरत मौलाना ओबैदुल्लाह खान (आजमी पूर्व सदस्य राज्यसभा एवं सदस्य ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड) आदि ने बारी-बारी से संबोधित किया। 



वहीं इस विशाल रैली की अध्यक्षयता भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम ने किया। रैली में उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए वामन मेश्राम ने कहा कि आज देश में लोकतंत्र नहीं है, बल्कि लोकतंत्र के स्थान पर ब्राह्मण तंत्र स्थापित हो चुका है। ब्राह्मणों ने ईवीएम और मीडिया के माध्यम से लोकतंत्र पर कब्जा कर चुके हैं। इसलिए संविधान और देश दोनों खतरे में है। 


आगे उन्होंने कहा कि मीडिया चार प्रकार का है। पहला-इलेक्ट्रोनिक मीडिया है, जिस पर 100 फीसदी ब्राह्मणों का कब्जा है। दूसरा प्रिंट मीडिया है, जिसमें दो विभाग होते हैं, एक अखबार और दूसरा किताबों का प्रकाशन होता है। 


सारे प्रकाशन समूह ब्राह्मणों के ही है, और अखबार जैसे टाईम्स ऑफ इण्डिया, इण्डियन एक्सप्रेस, दैनिक जागरण और अमर उजाला भी ब्राह्मणों के ही है, इण्डियन एक्सप्रेस का मालिक विवेक गोयंका, टाईम्स ऑफ इण्डिया ग्रुप का मालिक विनीत जैन है। हिन्दी के सभी अखबार भी उन्हीं लोगों के हैं। उसके बाद तीसरा मीडिया ट्रेडिश्नल (पारम्परिक) मीडिया है। 


मुरारी बापू, आशाराम बापू, डोंगरे महाराज, ओझा महाराज जैसे जितने भी महाराज लोग हैं, ये सारे-के-सारे लोग ब्राह्मण धर्म यानि असमानता के प्रचारक हैं। आप लोग इन्हें संत कहते हैं, जबकि ये लोग संत नहीं हैं, ये ब्राह्मण धर्म के प्रचारक हैं। इस तरह से ट्रेडिशनल मीडिया पर भी ब्राह्मणों का ही कब्जा है। चौथा मीडिया मौखिक मीडिया है। इस देश में लगभग 1562 भाषाओं के अंतर्गत 4500 बोली भाषा बोली जाती है। 


मगर इनमें से किसी भाषा को इस देश में शासन से मान्यता नहीं दी है। ब्राह्मण ग्रंथ भाषा बोलता है और ‘ग्रंथ भाषा’ ही लिखता है और शासन ने उसे ही मान्यता दी है। इस प्रकार लोकतंत्र के जो चार स्तम्भ हैं, इन सारे स्तम्भों पर ब्राह्मणों का कब्जा हैं। उसके अलावा मिलिट्री पर ब्राह्मणों का नियंत्रण है। राज्यों के राज्यपाल जो संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राज्यों पर नियंत्रण करते हैं, राज्यपालों पर भी उन्हीं का नियंत्रण है। 


विश्वविद्यालय, शिक्षा प्रणाली पर नियंत्रण करनेवाले उप कुलपति भी ब्राह्मण है। विश्वविद्यालयों पर उनका नियंत्रण है। सिलेबस पर भी ब्राह्मणों का नियंत्रण है। यानी देश में लोकतंत्र दूर-दूर तक ही दिखाई नहीं दे रहा है। अरे भाई लोकत्रतं होगा तब न दिखाई देगा यहां तो ब्राह्मणतंत्र है। 


अंत में वामन मेश्राम ने कहा कि जिस तरह से मीडिया ब्राह्मणतंत्र स्थापित करने में मदद कर रहा है उसी तरह से ईवीएम भी ब्राह्मणतंत्र स्थापित करने में ज्यादा मददगार साबित हो रहा है। यानी मीडिया और ईवीएम दोनों देश और संविधान के लिए खतरा है, इसलिए देश और संविधान को बचाने के लिए ईवीएम को तोड़ना ही होगा। 


हजरत मौलाना खलीलुर रहमान सज्जाद नोमानी

भारतीय जनता पार्टी की सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एजेंडा लागू करना चाहती है। उन्होंने तीन तलाक बिल, समान नागरिक कानून संहिता और मस्जिदों पर अजान के लिए लाउडस्पीकरों का मुद्दा उठाया है। हम किसी भी सूरत में शरीयत में किसी की दखलंदाजी को बर्दाश्त नहीं करेंगे।


इमारत शरिया के नाजिम अनीसुर रहमान कासमी

यह एक गैर राजनीतिक कार्यक्रम है और आग्रह किया कि इसे राजनीति से जोड़कर न देखा जाए।

मौलाना उमरेन महफूज रहमानी

अररिया, फूलपुर और गोरखपुर में जनता ने केंद्र को तीन तलाक दे दिया है। उन्होंने कहा कि कौम कमजोरों की हिफाजत के लिए आगे आये। इस मौके पर अबू तालिब रहमानी ने कहा कि जिस का पिता मजबूत होता है उसके वंशज भी मजबूत होते है। उन्होंने आगे कहा कि 5 लाख मुस्लिम महिलाओं ने हस्ताक्षर कर केंद्र को सौंपा फिर भी तीन तलाक बिल का हल अभी तक नहीं निकल सका है। इसलिए हमें दीन और देश अर्थात संविधान और देश दोनों को बचाना है।

महासचिव मौलाना वली रहमानी

हमने चार साल इंतजार किया और सोचा कि बीजेपी संविधान के तहत देश चलाना सीख लेगी। उन्होंने आगे कहा कि मुसलमानों के पर्सनल लॉ बोर्ड पर हमला किया जा रहा है। हमें अपने लोगों और देशवासियों को बताना पड़ रहा है कि देश के साथ-साथ इस्लाम पर भी खतरा है।


हजरत मौलाना ओबैदुल्लाह खान आजमी

नीतीश कुमार बीजेपी के सहयोग से सरकार चला रहे हैं।ऐसे में नीतीश मुसलमानों को किसी भी तरीके से नाराज नहीं करना चाहेंगे। लिहाजा राज्य सरकार इस सम्मेलन के आयोजन को लेकर पूरा सहयोग और समर्थन दे रही है।


इमारत शरिया 

रैली को समाज में सांप्रदायिक तत्वों के खिलाफ चेतावनी देने के लिए बुलाया गया है जो शांति को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं और हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सद्भाव बनाए रखने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए भी कहा गया है।




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