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मूलनिवासियों में झगड़ा लगाने का घातक षड्यंत्र

Published On :    23 Mar 2018   By : MN Staff
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देश की राजनीति की दिशा तय करने वाले सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में करारी हार के बाद संघ संचालित भाजपा सरकार ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है क्योंकि उसको यह अच्छी तरह पता लग चुका है कि आज मूलनिवासी बहुजन समाज किस हद तक जाग चुका है और उसका अगला कदम क्या-क्या हो सकता है। 


बामसेफ, भारत मुक्ति मोर्चा के माध्यम से आ रही जनजागृति का परिणाम है जो देश में लगातार जागृति का कार्यक्रम से अनवरत ढंग से जारी है क्योंकि इस महत्वपूर्ण मामले में मानवता के सच्चे हितचिंतक, विश्वरत्न डा. बाबासाहब अम्बेडकर ने 20 मार्च 1927 को महाड़ में महत्वपूर्ण बात कही थी कि जागृति का दीपक निरन्तर जलाकर रखना। 


उनके बताए गए क्रांतिकारी संदशों का पालन करने वाला एक मात्र संगठन बामसेफ, भारत मुक्ति मोर्चा एवं उसके द्वारा गठित 60 ऑफसूट संगठन हैं जो निरन्तर अपने महापुरूषों के ऐतिहासिक संघर्ष को देश के मूलनिवासी बहुजन समाज को अवगत करा रहा है। 


अपने पुरखों का इतिहास जानकर टुकड़ों में बांटा गया मूलनिवासी बहुजन समाज आज तेजी से एक मंच पर धु्रवीकृत हो रहा है, जिसका परिणाम सामने है कि हाल ही में सम्पन्न हुए उत्तर प्रदेश की दो लोकसभा सीटों के उपचुनाव में अपने आपको अपराजेय समझने वाली भारतीय जनता पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा, जिसके दूरगामी परिणाम का आकलन करने के बाद योगी सरकार ने बामसेफ, भारत मुक्ति मोर्चा के माध्यम से तेजगति से मूलनिवासियों के धु्रवीकरण को रोकने के लिए संघी नुक्सों का सहारा लेना शुरू कर दिया है 


जिसमें मूलनिवासी बहुजन में बढ़ते भाईचारा और एकता को भंग करने के लिए आरक्षण का नया खेल शुरू किया है जिसका एकमात्र मकसद धु्रवीकरण को रोकना है। इस नये खेल में योगी सरकार एससी को एससी और ओबीसी को ओबीसी से आपस में झगड़ा लगाने का सरकार ने खेल खेला है जिसमें योगी सरकार ने गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव एससी को साधने की कवायद शुरू कर दी है। 


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस खेल से कई निशाने साधें हैं जिसका सबसे अहम मकसद मूलनिवासी बहुजनों में आ रही आपसी समझ को भंग करने का हथकण्डा है और उत्तर प्रदेश में नये राजनैतिक धु्रवीकरण को रोकना है क्योंकि जब आरक्षण आज एकदम शून्य हो चुका है यह किसी से छिपा नहीं है जिसको शासक वर्ग ने नई आर्थिक नीतियों के नाम पर संविधान को बगैर हाथ लगाये ही खत्म कर दिया है। 


फिर कौन से आरक्षण की बात योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं जिसको वे गैर यादव पिछड़ों और गैर जाटव अनुसूचित वर्ग को अलग से देने की बात कर रहे हैं। क्योंकि संवैधानिक प्रावधानों के हिसाब से आरक्षण अर्थात प्रतिनिधित्व केन्द्र का मामला है राज्य उसको न तो घटा सकती है और न ही बढ़ा सकती है। 


जब तक इसके लिए संसद राष्ट्रपति के माध्यम से अध्यादेश जारी नहीं करते हैं गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव एससी को अलग से आरक्षण देने की बात योगी आदित्यनाथ किस मुंह से कह रहे जब 49.5 प्रतिशत अधिक आरक्षण नहीं देने का सुप्रीम कोर्ट सीमा तय कर चुका है यह सिर्फ मूलनिवासी बहुजन समाज एससी, एसटी, ओबीसी में झगड़ा लगाने की बहुत बड़ी साजिश का हिस्सा है। 


जो भारतीय जनता पार्टी के गड़बड़ाते समीरणों का सबूत है क्योंकि आज एससी, एसटी, ओबीसी एवं मायनॉरिटी तेजी के साथ बामसेफ, भारत मुक्ति मोर्चा के साथ लामबन्द हो रहा है। जो आरक्षण का दाव अब योगी आदित्यनाथ ने खेला है अब यह चलने वाला नहीं है क्योंकि अब बहुजन समाज विदेशी यूरेशियन लोगों के हर हथकण्डे से वाकिफ हो चुका है। 


जिसका महत्वपूर्ण श्रेय केवल बामसेफ, भारत मुक्ति मोर्चा जैसे मूलनिवासी संगठनों को जाता है जो लगातार 40 वर्षों से इन विदेशी यूरेशियन की हर साजिशों को प्रमाण सहित नेस्तनाबूत कर रहा है जिससे इनकी हर साजिश वर्तमान में नाकाम साबित हो रही है। 


जिससे शासक जातियों में लगातार हतासा बढ़ती जा रही है जिसमें शासक वर्ग खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है। और देश के मूलनिवासी बहुजन समाज के धडों को अलग आरक्षण देने की बात करके आजादी के आन्दोलन से ध्यान भटकाने का काम कर रहा है। 


अगर योगी आदित्यनाथ को चाहिए कि वे अपनी केन्द्र की सरकार को कहे जो इन वर्गों को आरक्षण देने के लिए बगैर किसी देरी के इस बात का अध्यादेश जारी करें क्योंकि आज केन्द्र और राज्य दोनों में उनकी पार्टी की सरकार है जिसके पास आरक्षण देने का अधिकार है मगर हमको इस बात का यकीन है कि केन्द्र की सरकार ऐसा कभी भी करने वाली नहीं है क्योंकि जिस पार्टी ने आरक्षण का हमेशा विरोध किया हो वह आरक्षण नहीं दे सकती है जो मूलनिवासी बहुजनों को प्रतिनिधित्व के अधिकार से लगातार वंचित करने का काम कर रही है इसीलिए इन मनुवादी पार्टियों को उखाड़ फैकना होगा जिसका मौका कुछ माह बाद आने वाला है जिसमें सभी मूलनिवासी मिलकर मनुवादी दलों को सबक सिखाना होगा तभी हमें आने वाली पीढ़ियों का भविष्य निर्माण कर सकते हैं।

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