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मुसलमानों को निशाना बनाने का नया हथकण्डा

Published On :    23 May 2018   By : MN Staff
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जैसे-जैसे लोकसभा आम चुनाव का समय तेजी से नजदीक आ रहा है वैसे वैसे शासक वर्ग (यूरेशियन ब्राह्मण) धर्मपरिवर्तित अल्पसंख्यक विशेषरूप से मुस्लिम को टार्गेट करने के नये नये तरीके ईजाद कर रहा है। इसके लिए उसने एक बार फिर जवाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय को अपनी राजनीति का केन्द्र बिन्दु बना दिया है जो आज चर्चा में बना हुआ है। उच्च शिक्षण संस्थानों को वर्तमान संघ की सरकार ने जंग का मैदान बनाने से कोई भी कसर नहीं छोड़ी है। शिक्षण संस्थानों में भारतीय जनता पार्टी की दखलनदाजी किसी से भी छिपी नहीं है। वर्तमान समय से वह इस प्रकार के कार्य संचालित करने का काम कर रही है। वर्तमान समय में केन्द्र की मोदी सरकार के कर्ता धर्ता संघ ने मुस्लिमों को निशाना बनाने का नया हथकण्डा शुरू कर दिया है। जिसने जवाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय में इस्लामिया आतंकवाद कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव करके विवाद शुरू कर दिया है। संघ की सरकार के इस हथकण्डे का एक मात्र उद्देश्य मुसलमानों को टार्गेट करना है। इस विवादित कोर्स को लेकर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग एवं विश्वविद्यालय में ठन गयी है। जिसके सम्बंध में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को एक नोटिस जारी किया है जिसमें अल्पसंख्य आयोग ने इस्लामिक आतंकवाद पर एक कोर्स शुरू करने का मूलकारण जानना चाहा है।


अल्पसंख्यक आयोग के प्रमुख जफरूल इस्लाम का कहना है कि प्रस्तावित पाठ्यक्रम के बारे में फैली खबरों के माध्यम से स्वतः संज्ञान लेते हुए आयोग ने इसे शुरू करने के पीछे का कारण बताने को कहा है। किस आधार पर जे.एन.यू. में इस्लामिक आतंकवाद का कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव है। जानकार लोगों का कहना है कि एक सप्ताह पहले 18 मई 2018 को जे.एन.यू. में 145वीं अकादमिक परिषद की बैठक में आतंकवाद से जुड़ा पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला किया गया है। जिन लोगों ने 145 अकादमिक परिषद में इसको शुरू करने का प्रस्ताव किया उन्हीं के छात्र नेताओं ने इसका तुरन्त ही विरोध शुरू करने का फैसला किया क्योंकि इसको मुद्दा बनाया जा सके।


क्योंकि दिल्ली का जवाहर लाल नेहरू हमेशा ही बामपंथियों एवं संघियों का गढ रहा है जहां पर कांग्रेस का एनएसयूआई छात्र संगठन और भाजपा का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और आइसा (वामपंथियों) का छात्र संगठन सक्रिय रहते हैं जो देखने में सिर्फ अलग अलग दिखते हैं लेकिन वे शासक वर्ग की व्यवस्था एवं सत्ता के हित में मैचुअल अण्डर स्टेडिंग (मिलीभगत) से काम करते हैं। इसका सीधा सा उदाहरण सभी के सामने है कि जे.एन.यू. में आतंकवाद कोर्स शुरू करने की बात होते ही इन मनुवादी छात्र संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया इससे क्या होगा कि मामला अब मीडिया के माध्यम चर्चा का विषय बनेगा जिसको शासक जाति के लोगों ने आने वाले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रख कर ही किया गया है। क्योंकि इन्होंने जो भी हथकण्डे अपनाये हैं वे तात्कालिक नहीं बल्कि दूरगामी मकसद हासिल करने के लिए किए हैं।


जिसको चर्चा का विषय बनाकर मनुवादी दलों के छात्र संगठन इसका विरोध करके यह दिखाने की कोशिश को समझने की जरूरत है। जिसमें कांग्रेस का छात्र संगठन इसका विरोध करता है और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस्लामिक आतंकवाद पाठ्यक्रम का समर्थन कर रहा हैं जिसका जिन्न शासकवर्ग ने छोड़ दिया है। जिनका निशाना केवल धार्मिक अल्पसंख्यक के साथ-साथ विशेष रूप से 

मुसलमानों को निशाना बनाना है और इस्लामिक आतंकवाद कोर्स के नाम पर मुस्लिमों आतंकवादी बनाने का षड्यंत्र है। जिससे उन समुदायों या जातियों को शासक वर्ग के समर्थन में खड़ा करना है जो अभी बामसेफ, भारत मुक्ति मोर्चा की विचारधारा से नहीं जुड़ सकी है। ऐसे समुदायों को हिन्दू बनाकर अगले लोकसभा चुनाव में राजनैतिक फायदे की इबारत लिखने की शुरूआत जवाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय से हो चुकी है। जिसको सभी मूलनिवासी बहुजनों को समझने की जरूरत है जिसको हम बारीकी से समझना होगा तभी हम विदेशी ब्राह्मणों की अत्याचारी व्यवस्था से आजाद हो सकते हैं।

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