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निर्दोष आदिवासियों की गिरफ्तारियां क्यों?

Published On :    26 May 2018   By : MN Staff
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वर्तमान समय में आदिवासी बाहुल्य राज्यों में नक्सलवाद के नाम पर जो पोलिसी केन्द्र सरकार आजमा रही है वह कोई अप्रत्यासित नीति नहीं है। इसी नीति पर चलकर कांग्रेस ने निर्दोष आदिवासियों का कत्लेआम किया है। ठीक उसी प्रकार की रणनीति के हिसाब से वर्तमान संघ की सरकार भी चल रही है। इसी नीति पर चलते हुए केन्द्र की भाजपा सरकार ने नक्सलवाद के नाम पर निर्दोष आदिवासियों की धरपकड़ तेज कर दी है जिसके तहत हालही में छत्तीसगढ़ राज्य के बीजापुर में दो महिलाओं समेत 15 निर्दोष आदिवासियों को सुरक्षा बलों ने हिसासत में लिया है। देश की सरकारों द्वारा यह नीति आज से नहीं बल्कि सन् 1961 से ऐसी साजिश करके आदिवासियों को बेघर बनाया गया है। 


सन् 1964 में शुरू की गयी दामोदर घाटी परियोजना इसका उदाहरण है कि उसके प्रभावितों को आज तक इन सरकारों ने न तो कोई मुआवजा दिया है और नहीं उनके किसी सदस्य को कोई सरकारी सर्विस ही प्रदान की गयी है। जो 54 वर्षो बाद भी दामोदर घाटी के प्रमाणित आदिवासी आज बेघर होकर अपनी जिन्दगी काट रहे हैं। इस परियोजना के लागू होने पर करीब 15000 लोग (आदिवासी) विस्थापित हुए थे। जबकि उन्होंने इसकी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी लेकिन ब्राह्मणवादी मानसिकता की सरकार एवं न्यायपालिका ने उनकी एक नहीं सुनी। अगर उनके पक्ष फैसला भी दिया तो सरकारों पर कोई दबाव नहीं बनाया गया है कि इनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाय इन निर्दोष आदिवासियों को मनुवादी सोच के चलते बेघर किया है। 


अगर इन लोगों ने अपने हक एवं अधिकारों के लिए संघर्ष किया तो इन सरकारों ने उनको नक्सलवाद घोषित करते उनका नर संहार करने का षड्यंत्र किया जिससे ये अपनी आवाज न उठा सके। जबकि भारत में लागू संविधान इन आदिवासियों को विशेष अधिकार प्रदान करता है जिसका विशेष प्रावधान संविधान की पांच वीं और छठवी अनुसूचित में किया गया है। जिसको आज तक किसी भी सरकार ने लागू करने की हिम्मत नहीं दिखाई है। संविधान के खिलाफ जाकर इन आदिवासियों को अपनी षड्यंत्रकारी साजिशों से बेघर करने का काम प्राथमिकता के आधार पर किया है।


सवाल है कि इन्होंने इन आदिवासियों को बेघर क्यों किया क्योंकि जिन क्षेत्र में आदिवासी निवास करते हैं उस जमीन के नीचे 89 प्रकार के खनिजतत्व पाये जाते हैं जिनकी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत हजारों करोड़ में होती है जिसको हासिल करने के लिए ही इन मनुवादी सरकारों ने इन क्षेत्रों में 70 साल बाद भी संविधान की 5वीं व 6वीं अनुसूचि को जानबूझ कर लागू नहीं किया है। इन्हीं खनिज लत्वों को हासिल करने के उद्देश्य से पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने सन् 1991-92 में नई आर्थिक नीति के नाम षड्यंत्रकारी अभियान चलाया इस षड्यंत्रकारी अभियान को कांग्रेस ने अपने शासन काल में चलाया और उन कीमती खनिज तत्वों को हथियाने के लिए अपने पूंजीपतियों औद्योगिक घरानों को उन क्षेत्रों में स्थापित करके आदिवासियों को बेघर बनाने का काम किया है। वही काम आज केन्द्र की सत्ता ईवीएम घोटाले से काबिज हुई संघ की सरकार भी कर रही है।


जब यही आदिवासी सरकार की संविधान विरोधी नीतियों का विरोध करते हैं तो सरकारों द्वारा उनके खिलाफ सेना और सुरक्षा बलों का इस्तेमाल करके उनका नरसंहार किया जाता है जिसका ताजा सबूत महाराष्ट्र गढ़चिरौली में 39 निर्दोष आदिवासियों का नरसंहार उस समय किया गया। जब वे अपने रिस्सेदातों के पास शादी समारोह में शामिल होने के लिए जा रहे थे जिनका नक्सल या नक्सलवादी मूवमेन्ट से कोई भी लेना देना नहीं था इतना ही उनके खिलाफ फर्जी सबूतों का निर्माण सरकारों के दिशा निर्देशन में कार्यरत पुलिस और सुरक्षाबलों के लोग तैयार करते हैं जो उनके बाये हाथ का काम है। 


इसी प्रकार का षड्यंत्र करके छत्तीसगढ़ के बीजापुर क्षेत्र में 15 निर्दोष आदिवासियों को गिरफ्तार किया गया है जिसमें हिडवो माडबी (42 वर्ष), मंगलू मडकाम (33 वर्ष), आयतु माडवी (22 वर्ष), कोमामडवी (23 वर्ष), वामन माडवी (23 वर्ष), रमेश कुमार मडकामी (33 वर्ष), राजू माडवी (32 वर्ष), पाण्डु (21 वर्ष), कोसाकरटमी (38 वर्ष), जोगी माण्डवी (43 वर्ष), लिंगे कुजानी (28 वर्ष) शामिल है जिनको नक्सलवाद के नाम पर गिरफ्तार किया गया है जो निर्दोष आदिवासियों को नक्सलवादी बनाकर उनका नरसंहार करने का घातक षड्यंत्र है। अगर नक्सलवाद के इतिहास को आधार बनाकर उसका विश्लेषण करें तो यह निष्कर्ष सामने आता है आदिवासी भारत का मूलनिवासी है जिन्होंने अन्तिम सास तक विदेशी यूरेशियन लोगों की दासता स्वीकार नहीं किया है। ऐसा नहीं करके के कारण आज यूरेशियन ब्राह्मण उनकी संस्कृति, सभ्यता, रीतरिवाज, परम्पराओं को खत्म करने का षड्यंत्र कर रहा है जो उनके कस्टमरी लॉ में शामिल है। 


इतना नहीं संविधान लागू होने के 67 साल बाद भी उनका खुद की जमीनों का मालिकाना हक इन कांग्रेस और भाजपा की सरकार ने आज तक नहीं दिया है जिसका उनका जायज संवैधानिक अधिकार बनाता है क्योंकि ये मनुवादी सरकारें नहीं चाहती हैं कि आदिवासियों को कोई भी हक एवं अधिकार मिलें।

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