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मोदी सरकार के चार साल

Published On :    28 May 2018   By : MN Staff
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26 मई 2014 को ईवीएम घोटाले से सत्तासीन हुई मोदी सरकार ने चार साल का कार्यकाल पूरा किया है। इस सरकार ने सत्ता में बैठकर कितना सबका साथ सबका विकास किया है यह तो पिछले चार साल के आंकड़े बता रहे हैं जहां एक सरकार के लोग चार साल बाद भी हवाई दावें करके अपने मुंह मिया मिट्ठू बन रहे है तो सबसे अहम सवाल खड़ा होता है देश की तरक्की की इवारत लिखने वाले युवा मजदूर से लेकर किसान तक आज बेहाल देखे जा सकते हैं। मोदी सरकार की द्वारा लागू की गयी स्कीमों को बात की जाय जिसमें चाहे मेक इन इण्डिया हो स्टार्ट अप इण्डिया हो या फिर स्किल इन इण्डिया हो जिनको मोदी सरकार की महत्वकांक्षी योजना के नाम पर लागू किया गया। मोदी राज के चार साल में ये योजनाएं सिर्फ प्रचार में ही दिखती है वे जमीन पर आज तक नहीं दिखी है। इसका मतलब है कि ये सभी योजनाएं सिर्फ कागजों पर दौड़ रही है। और यदि मोदी सरकार के मंत्रियों की बात करें तो मंत्रियों का भ्रष्टाचार या राफेल सौदा कमीशन खोरी यानि अपने चहेते पूंजीपतियों के विकाश के लिए देश के संविधान को भी ताक पर रख दिया है। वहीं देश की सबसे खूबसूरत वादिया आज खून से सनी हुई नजर आ रही है जिसमें देश के हजारों आम नागरिकों एवं देश की सीमाओं की रक्षा में अपने प्राण निछावर करने जाबाज सैनिकों को आतंकवाद के नाम पर प्रतिदिन मरते हुए देखा जा सकता है।


जिसमें अब तक हजारों विवाहिताओं की मांग सूनी हो चुकी है जिसकी जिम्मेदार कोई और नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ही दोषी है जिसने जुमलेबाजी में अपने चार सालों का कार्यकाल 26 मई 2018 को पूरा किया। और चार साल के जस्न में देश की आम जनता की खून पसीनों की कमाई वहा रही है जिसका सबूत सभी के सामने है। मौजूदा मोदी सरकार ने विज्ञापन पर खर्च करने के सारे रिकार्ड तोड़ दिये हैं। मई 2014 में ईवीएम घोटाले के माध्यम से सत्ता हासिल करने वाली सरकार ने दिसम्बर 2017 के बीच अपनी सरकार की नाकाम उपलब्धियों के प्रचार प्रसार में पौने चार हजार करोड़ पानी की तरह बहाये हैं जो सफल मिशन मंगलयान के खर्च से सात गुना अधिक हैं, जिसका आगामी आम चुनाव में बेतहासा बढ़ना तय है। जिसने पिछले 


लोकसभा चुनाव में 30,000 करोड़ से अधिक खर्च किया था। जो भारतीय जनता पार्टी को औद्योगिक घरानों और कारपोरेक्टर द्वारा मिला था। जो इस बात का प्रमाण है कि देश का बजट इसीलिए इन्हीं पूंजीपतियों के हित में बनाया जाता है जिसमें देश के आमजन, किसान, मजदूरों और मेहनत कसों हमेशा ही गायब रहते हैं। मोदी सरकार जिसको मुद्दा बनाकर सत्ता में आयी थी। वह कालाधन चार साल बीतने के बाद भी तक वापस नहीं आ सका है।


जिसको वापस लाकर प्रत्येक व्यक्ति के बैंक खाते ने 15-15 लाख आने की बात कहीं गयी थी। इसी के साथ मोदी सरकार ने देश के लोगों को अच्छे दिनों के दर्शन कराने का भी हवाई वादा किया था जिसके चार साल बाद भी कहीं भी दर्शन होते नहीं दिख रहे हैं साथ ही चार साल बाद लोकपाल का कहीं भी नामोनिशान नहीं दिख रहा हैं मोदी राज में कालाधन आना तो दूर बल्कि भ्रष्टाचार के नये कीर्तिमान स्थापित हो चुके हैं जिसमें देश का पूरा बैंकिग सेक्टर ही चरमराकर बैठ गया है। इतना ही नहीं सरकार की 


सरपरस्ती में देश का 61036 करोड़ बैंकों का सफेद धन नीरव मोदी और मेहुल चौकसी जैसे लुटेरे लूट कर विदेशी भाग चुके हैं। मोदी सरकार कालाधन तो नहीं ला पायी बल्कि देश में काले चोरों को गोरा बनाने वाली फेयर एण्ड लवली रूपी स्कीम नोटबंदी जरूर लेकर आई। नोटबंदी भी मोदी सरकार ने देश के पूंजीपति, औद्योगिक घरानों की काली कमाई सफेद करने के लिए लागू की जिसका खामियाजा किसान मजदूरों और महिलाओं को भुगतना पड़ा वे अपने ही पैसों के लिए नोटबंदी के चलते लाइनों में खड़े नजर आये जिसमें करीब 120 लोगों की जान तक चली गयी है। फिर भी मोदी सरकार का दिल नहीं पसीजा। मोदी राज में बैंकों का फसा हुआ कर्ज 2.5 लाख करोड़ से बढ़कर चार वर्षों में 8.5 लाख करोड़ हो गया है जिसको देश के पूंजीपतियों ने लोन लेने के बाद आज तक वापस नहीं किया है। और ना ही सरकार ने उसको वसूल करने की कोशिश की है। यह सरकार किसानों, मजदूरों की बजाय पूंजीपतियों का कर्जा माफ करने में सबसे आगे रही है सायद यही इसका सबका साथ और सबका विकाश है।


अगर देश का अन्नदाता या मेहनत कस कोई व्यक्ति कुछ हजार रूपये बैंकों से कर्ज लेता है तो उसके अदा न करने पर सरकार उसकी रिकवरी करवाती है और यहां तक कि कुर्की का ऑर्डर भी निकाल देती है। जबकि पूंजीपति औद्योगिक घरानों द्वारा 8.5 लाख करोड़ वापस नहीं करने पर आज तक इस सरकार ने न तो उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही की है और ना ही करने वाली है क्योंकि किसानों मजदूरों से उसको क्या मिलता है? बल्कि इन पूंजीपतियों से सभी मनुवाद पोषक पार्टियों को चुनावी चन्द मिलता है इसलिए इनके खिलाफ किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं होती है बल्कि उनका कर्जा माफ कर दिया जाता है। अगर शिक्षित बेरोजगारों की रोजगार देने की बात की जाय तो मोदी ने अपने चुनावी वादे में मुखरता से दो करोड़ नौकरियां प्रति वर्ष देने की बात की थी मगर उनकी सरकार चार साल बाद सिर्फ 4.16 लाख रोजगार ही युवाओं को उपलब्ध कर पा रही है। 


मोदी राज के चार साल में देश में नौकरी देना तो दूर विदेशों तक में भारतीयों की नौकरियों पर खतरा मडरा रहा है। अब अगर देश आधी आबादी यानि मातृशक्ति की बात करें तो मोदी सरकार में प्रतिदिन 106 महिलाए बलात्कार (अमानवीयता) की शिकार हो रही है इतना ही नहीं पहले महिला बलात्कार की शिकार होती थी लेकिन मोदी राज में महिलाए ही नहीं बल्कि मासूम बच्चियां गैंगरेप का शिकार बन रही है वे अपने घरों तक में सुरक्षित नहीं है कुल मिलाकर मोदी सरकार के चार सालों में मूलनिवासी समाज का हर तबका अपने आपको भयाक्रान्त महसूस कर रहा है क्योंकि इस समय देश में संघी गुण्डों का राज चल रहा है जिसको सरकार का पूरा समर्थन हासिल है। जिनकी गुण्डई खत्म करने का वक्त आ रहा है जिसमें बहुजन समाज को इन संघियों को अच्छा सबक सिखाना चाहिए। वह वक्त है आम चुनाव 2019 जिसमें वोटिंग के माध्यम से इनको अच्छा सबक सिखाया जा सकता है।

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