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मोदी कार्यकाल में अन्नदाता का हाल

Published On :    29 May 2018   By : MN Staff
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26 मई 2014 को ईवीएम घोटाले से सत्तासीन हुई मोदी सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल में देश में गरीबी और भुखमरी से जूझ रही आम जनता और किसानों का कितना कल्याण किया है यह तो चार वर्ष का कार्यकाल पूर्ण करने के अवसर पर जारी आंकड़े ही दे रहे हैं। मोदी सरकार ने जन कल्याण की बजाय सिर्फ जुमलेबाजी में अपने कार्यकाल के चार वर्ष गुजारे हैं जिसमें मोदी ने सबसे अधिक विदेशी यात्राए की और अपनी विदेशी यात्राओं के माध्यम से भारत में विदेशी कम्पनियों को देश के करोड़ों किसानों मजदूरों को बेरोजगार बनाने के लिए आमंत्रित किया है यह काम उन्होंने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार से सीख लेकर किया जिसने इस देश को पूरी तरह से विदेशियों के हवाले करने में कोई भी कसर नहीं लगायी है। 


ठीक उसी सरकार के रास्ते पर चलकर संघ की सरकार ने नया कीर्ति मान स्थापित कर दिया है। जिसका नतीजा सामने है कि आज देश उन्नति के रास्ते पर जाने की बजाय अवनति के रास्ते पर जा रहा है। मोदी राज में लागू की गयी नोटबंदी एवं जीएसटी के आने से आज महंगाई चरम सीमा पर कर चुकी है। महंगाई की सबसे अधिक मार किसानों और मजदूर वर्ग पर पड़ रही है जिसके कारण उनको अपनी जीवन नैया चलाना भी मुस्किल हो गया है। मोदी सरकार के चार वर्षों में मंहगाई 72 प्रतिशत बढ़ चुकी है जिसका जीता जागता सबूत पेट्रोल-डीजल दे रहा है जिनकी कीमतें डेली बढ़ रही है। यह सिलसिला लगातार 16 दिनों से चल रहा है। जबकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम घट गये हैं।


यह इसलिए हुआ है क्योंकि मोदी सरकार ने ईधन तेल की कीमत तय करने का अधिकार तेल कम्पनियों को दे दिया है जिनका नियंत्रण कथित रूप से उच्च वर्गीय लोगों के हाथों में है जिनके कर्ता धर्ता, अंबानी, अदानी, मित्तल और अजीम प्रेम जी हैं। इनको मालामाल बनाने के लिए ही इन कम्पनियों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दिया है जिससे वे तेल की कीमतें खुद तय कर रहे हैं। अगर ये कहा जाय कि मोदी सरकार के पास चार वर्ष में कोई भी उपलब्धि नहीं है। क्योंकि मोदी सरकार आत्म प्रसंसा रूपी बीमारी की शिकार है। जब किसी के कल्याण के लिए कुछ किया ही नहीं है तो यही कहा जायेगा कि उसके पास उपलब्धियों कहां से आयेगी। क्योंकि अगर जनकल्याण के कार्य होते हैं तो वे किसी भी प्रचार के मोहताज नहीं होते हैं। 


सही अर्थों में कहा जाये तो मोदी सरकार आत्म प्रशंसा की बीमारी से ग्रस्त कहीं जा सकती है। इस सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल में अपने सारे संसाधन अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए झोंक दिये हैं। बीते चार सालों की उपलब्धियों में मोदी सरकार के पास अगर कुछ है वो है मोदी सरकार की खर्ची ली रैलिया संघ द्वारा गढ़े हुए अभिनय से भरे भाषण हैं। अगर देश की 125 करोड़ की आबादी के लिए भोजन की व्यवस्था करने वाले किसानों की बात की जाय कि मोदी सरकार ने देश के अन्नदाता का अपने चार वर्ष के कार्यकाल में कितना कल्याण किया है। उसका नतीजा सामने है कि 2014 लोकसभा चुनाव में मोदी ने वादा किया था कि किसानों को समर्थन मूल्य उसकी लागत का 50 प्रतिशत से ऊपर दिया जायेगा। मगर मोदी सरकार के चार सालों में हालत ये है कि सरकार किसानों का लागत मूल्य भी नहीं पायी है।


उदाहरण के लिए मूंग का लागत 5700 रूपये है और समर्थन मूल्य 5575 रूपये इसी प्रकार से जवार का लागत मूल्य 2089 है और इसका समर्थन 1700 रूपये ही है। यही हाल किसानों द्वारा पैदा की जा रही सभी फसलों का है जिनको अपनी फसलों की कीमत तय करने का अधिकार कथित आजादी के 70 साल बाद भी न मिल सका है जबकि देश के बनियों को अपनी सभी वस्तुओं का मूल्य निर्धारित करने का अधिकार इन मनुवादी सरकारों ने दिया है।


क्योंकि बनिया इन्हीं ब्राह्मणों का सगा भाई है। और किसान और मजदूर इस देश के मूलनिवासी है इसलिए शासक वर्ग इनकी हालत में कोई भी बदलाव नहीं चाहता है वर्तमान समय में चाहे धान हो, गेहूँ हो, चना हो या फिर मूंगफली वमुश्किल से किसानों को लागत मूल्य मिल रहा है। इतना ही नहीं मोदी सरकार ने किसानों का कितना कल्याण किया है यह इसी से समझा जा सकता है कि मोदी सरकार ने वर्ष 2016-17 में दालों के 221 लाख टन के अच्छे उत्पादन के बाद भी 44 रूपये प्रति किलों की 54 लाख टन दाल का आयात किया। इसके साथ-साथ 50 लाख टन गेहूँ  मुनाफा खोरों को आयात करने की छूटे दे दी जिसका घातक परिणाम किसानों को भुगतान पड़ा उनकी फसलों के दाम अचानक गिर गये। 


इसका परिणाम यह भी हुआ है कि देश में 24 घण्टों में 35 किसान आत्महत्या कर रहे हैं इतना ही नहीं किसानों के नाम पर चलाई जा रही फसल बीमा योजना में खरीफ 2016 और 2016-17 में मोदी सरकार ने पूंजीपतियों की कम्पनियों को 14828 करोड़ का लाभ पहुंचाया है जो किसानों की बजाय पूंजीपतियों के कल्याण करने का सबूत है। जिसको किसी भी हालत में किसान हितैषी सरकार नहीं कहा जा सकता है ऐसी सरकार को सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

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