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संदेह के घेरे में चुनावी प्रक्रिया

Published On :    1 Jun 2018   By : MN Staff
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इस समय सम्पन्न हुए उपचुनाव में भी भारत निर्वाचन आयोग एवं पूरी चुनाव पक्रिया ही शक के दायरे में आ गयी है। जिस प्रकार से हाल में सम्पन्न उपचुनाव में ईवीएम मशीनों एवं उसमें गड़बड़ी रोकने वाली मशीन यानि पेपर ट्रेल में खराबी सामने आयी है उससे पूरा चुनाव आयोग एवं सम्पूर्ण चुनावी प्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है, क्योंकि इन उपचुनावों में कई नेताओं एवं प्रत्याशियों ने एक बार फिर उसी बात को दोहराया है जिसको पिछले 3-4 सालों से बामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा कह रहा है कि ईवीएम से निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न होना सम्भव नहीं है। उसमें पेपर ट्रेल भी लगाया जायेगा तब भी पारदर्शी चुनाव सम्पन कराना सम्भव नहीं है। जब तक उससे निकलने वाली पर्ची को गिनती में शामिल नही किया जाता है तो इसका कोई मतलब नहीं है। आज भारत निर्वाच्न आयोग ईवीएम चुनाव से करवा कर देश की जनता की खून पसीने की कमाई पानी की तरह बहा रहा है क्योंकि ईवीएम से सम्पन्न हो रही चुनाव प्रक्रिया बहुत ही खर्चीली एवं महंगी है। जबकि बैलेट पेपर से सम्पन्न होने वाली चुनाव प्रक्रिया बहुत ही सस्ती है। मान लिया जाय कि ईवीएम से सम्पन्न हो रहे चुनाव में एक लाख रूपये खर्च होता है वहीं बैलेट पेपर चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न कराने महज 25 हजार खर्च ही आता है। 


फिर भी भारत निर्वाचन आयोग महंगी चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न करवा रहा है जिसमें इसके शुरूआत से ही गड़बड़ी करने के आरोप लगते रहे हैं इन्हीं आरोपों को तकनीकी विशेषज्ञों की उपस्थिति में सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वीकार किया है कि ईवीएम में घोटाला करना सम्भव है। जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने फैसला भी दिया कि इसमें गड़बड़ी रोकने का उचित प्रबंध किया जाय, जिसका प्रबंध किये बगैर चुनाव करवा कर निर्वाचन आयोग ने जिस प्रकार से 2004 और 2009 में कांग्रेस को सत्ता में ईवीएम घोटाले के माध्यम से पहुंचाया था ठीक उसी प्रकार से सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशन का उल्लंघन करके चुनाव करवा कर भाजपा की सत्ता में स्थापित किया है। जो इस बात का सबूत है शासक वर्ग की सत्ता का सूत्रधार निर्वाचन आयोग ही है जो ईवीएम गड़बड़ी के मामले में बार-बार यही राग अलाप रहा है कि ईवीएम तकनीकी रूप से फुलप्रूफ है।


यानि इसमें अब तकनीकी रूप से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है हाल ही में सम्पन्न उपचुनाव में भारी संख्या में ईवीएम एवं पेपर ट्रेल मशीनों में खराबी यह बात साबित करती है। कि इससे पारदर्शी एवं निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न नहीं कराये जा सकते हैं। इतना ही नहीं अब तो इसमें पेपर ट्रेल जोड़ने के बाद भी अब तो ईवीएम, पेपर ट्रेल दोनों में ही गड़बड़िया देखने को मिल रही है।


ईवीएम एवं वी.वी.पैट के माध्यम से चुनाव कराना लोकतंत्र की हत्या करना है क्योंकि आज देश में भारत मुक्ति मोर्चा एवं बामसेफ के माध्यम से इतनी जागृत तो आ चुकी है कि अब इस देश में कांग्रेस या भाजपा या अन्य मनुवादी पार्टी कोई भी दल पूर्ण बहुमत की सरकार नहीं बना सकती है। आज जो चाहे कांग्रेस की सरकार या फिर भाजपा की सरकार बन रही है वह केवल ईवीएम घोटाला के माध्यम से ही बन रही है या फिर कांग्रेस-बीजेपी बड़े दल के रूप में केवल ईवीएम गड़बड़ी के माध्यम से ही उभर रही है जिससे पारदर्शी, निष्पक्ष चुनाव कराना सम्भव ही नहीं बल्कि नामुमकिन है। आज शासक वर्ग की सफलता का सूत्रधार भारत निर्वाचन आयोग है।


जो लोकतंत्र की हत्या करके लोगों के संवैधानिक मौलिक अधिकारों का हनन कर रहा है। क्योंकि लोकतंत्र में सरकार या जनप्रतिनधियों को चुनने का अधिकार ही लोकतंत्र के मूल में होता है। और हर लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहली बड़ी कसौटी यही होती है कि चुनाव निष्पक्ष एवं पारदर्शी हो इसलिए चुनाव प्रणाली या मताधिकार या फिर वोटों की गिनती को लेकर सवालिया संदेह उठे तो लोकतंत्र के लिहाज से यह बहुत ही चिन्ताजनक है। हाल ही में सम्पन्न चार लोकसभा एवं दस विधानसभा सीटों के उपचुनाव सम्पन्न हुए जिसमें इलैक्ट्रानिक वोटिंग एवं पेपर ट्रेल मशीनों में खराबी की जो बड़े पैमाने पर शिकायतें सामने आयी है वह हैरान करने वाली है इससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होती है जो चुनाव प्रबंधन की विफलता ही कही जायेगी। क्योंकि देश में चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से भारत निर्वाचन आयोग के नियंत्रण में सम्पन्न होती है जिसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह बिना किसी रूकावट के चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न कराये। उपचुनाव में ईवीएम खराबी की सबसे अधिक शिकायतें उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में सामने आयी है।  जिसमें कई उम्मीदवारों और नेताओं ने कई सारी जगहों पर ईव्ीएम खराबी की लिखित शिकायतें की है। इतना ही नहीं कई नेताओं ने तो ईवीएम खराबी को चुनाव प्रभावित करने की साजिश बताया है।


जो निर्वाचन आयोग की साख पर गम्भीर सवाल है। जिसकी सफाई भारत में निर्वाचन आयोग केवल एक ही राग अलाप रहा है कि ईवीएम गड़बड़ी सम्भव नहीं है। जो उसकी अक्षमता का सबूत है और यह शासक वर्ग की एजेण्टगिरी का प्रमाण है जो ईवीएम गड़बड़ी के कई सबूतों के सामने आने के बाद भी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की बात को नकार रहा है जो पारदर्शी एवं निष्पक्ष चुनाव का सबसे पुख्ता प्रमाण है जिस पर कोई भी सवाल खड़ा नहीं कर सकता है।

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