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बहुजन क्रान्ति मोर्चा के बढ़ते प्रभाव से दहशत में यूरेशियन ब्राह्मण

Published On :    4 Jun 2018   By : MN Staff
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पिछले चार साल से केन्द्र की सत्ताधारी सरकार के माध्यम से आज आरएसएस सत्ता में काबिज है इस समय देश के अन्दर जो भी गतिविधियां चल रही है वो सभी की सभी संघ के दिशा निर्देशन में चलरही हैं। लेकिन भारतीय राजनीति में इस समय आरएसएस द्वारा एक सुनियोजित रणनीति के तहत काम शुरू किया जा चुका है क्योंकि केन्द्र की सत्ता में प्रस्थापित संघ का झुकाव अब भारतीय जनता पार्टी की तरफ न होकर कांग्रेस की तरफ रहा है क्योंकि मोदी सरकार की जनता में साख लगातार गिर रही है। चुनावों में जो उसको सफलता मिल रही है वह केवल ईवीएम घोटाले के माध्यम से ही मिली है। जिसकी लोकप्रियता की झलक हाल ही में सम्पन्न 4 लोकसभा एवं 10 विधानसभा उपचुनाव में पता चल रही है जिसमें भाजपा को महज 14 सीटों में से सिर्फ दो सीटें ही मिल सकी हैं। 


संघ को अच्छी तरह से मालूम हो चुका है कि अब भारतीय जनता पार्टी से देश की बहुसंख्यक जनता विद्रोह कर रही है इसीलिए संघ ने वही काम शुरू कर दिया है जो काम उसने देश की कथित आजादी के समय से आज तक किया है। जब उसको ऐसा समझ में आता है कि अब उसकी राजनैतिक शाखा भाजपा का समय लद गया है तो वह कांग्रेस का समर्थन करता है और जब कांग्रेस का समय खराब होता है तो वह भाजपा का समर्थन चुनाव में करता है जैसा उसने 2014 के लोकसभा चुनाव में किया और भाजपा को सत्ता में लाने के लिए संघ ने कांग्रेस से ऐसा समझौता किया और ईवीएम के माध्यम से लोकतंत्र की हत्या करके भारत निर्वाचन आयोग के साथ सहयोग से जनमत का गला घोटकर भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में स्थापित किया। जिसकी साख में लगातार गिरावट आ रही है जो केन्द्र के कार्यों की बानगी है।


अब उसके चार वर्ष से अधिक के शासन काल में केन्द्र की मोदी सरकार की हवा निकल चुकी है। जिसका अच्छी तरह से संघ को भी एहसास हो चुका है जिसके कारण संघ ने अब कांग्रेस के पक्ष में हवा बनाना शुरू कर दिया है। इसी रणनीति के तहत ही राहुल गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है। जो उसकी मजबूरी है क्योंकि बामसेफ की बढ़ती जनजागृति से उसकी हवा निकल चुकी है। जो देश में बामसेफ के माध्यम से चलाई जा रही देशव्यापी जनजागृति का परिणाम है।


जिसका प्रभाव इस समय पूरे देश में महसूस किया जा रहा है। जिसका एकमात्र उद्देश्य 85 प्रतिशत मूलनिवासी बहुजनों को विदेशी यूरेशियन ब्राह्मणों की गुलामी से आजादी दिलाना है। जिसका प्रभाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है इसके कारण ही ब्राह्मणी व्यवस्था के पोषक संघ में घबराहट और खलबली मची हुई है। जिसका नतीजा सामने है कि महाराष्ट्र में अत्याचारी पेशवाई के खात्में की जंग  भीमा कोरेगांव युद्ध के 200 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम को हिंसक बनाने की असफल बौखलाहट कोशिश की यह बामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा एवं बहुजन क्रान्ति मोर्चा के बढ़ते हुए कारवां का सबूत है।


क्योंकि इस देश में जबरन थोपे जा रहे ब्राह्मणवाद की चूले हिल गयी है और महाराष्ट्र राज्यव्यापी यात्रा के कारण विदेशी यूरेशियन ब्राह्मणों की सत्ता एवं व्यवस्था लगातार एक्सपोज हो रही है जो वर्णव्यवस्था, जातिव्यवस्था, भेदभाव, स्त्रीदासता एवं क्रमिक असमानता पर आधारित है। जिसकी बामसेफ एवं उसके ऑफसूट संगठनों के प्रभावशाली कार्यक्रमों से देश का मूलनिवासी बहुजन (एससी, एसटी, ओबीसी एवं धर्मपरिवर्तित अल्पसंख्यक) को इन विदेशी यूरेशियनों की असली करतूतों की सच्चाई से परिचित हो रहा है जिन्होंने समाज को इसकी जानकारी न हो इसके लिए शिक्षारूपी बुनियादी जरूरत पर इन्होंने पाबन्दी लगायी जिन्होंने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ने दिया। 


अब बामसेफ के साथ बहुजन क्रान्ति मोर्चा के बढ़ते प्रभाव के कारण आज शासक वर्ग की सभी राजनैतिक पार्टियों एवं संगठनों में स्पष्ट रूप से घबराहट देखी जा सकती है। क्योंकि बामसेफ के साथ साथ बहुजन क्रान्ति मोर्चा के  राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों में अब लाखों लोगों की भीड़ उमड़ रही है। जिसका सबूत हाल ही में महाराष्ट्र सहित पूरे देश में भी देखने को मिल रहा है। भीड़ पूरी तरह से मूलनिवासी बहुजन संगठित हो चुके हैं। क्योंकि बामसेफ, भारत मुक्ति मोर्चा ने राष्ट्र ही नहीं बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के शासक वर्ग को बेनकाब कर दिया है। बस अब भारत के मूलनिवासी बहुजन समाज को जोरदार आवाज उठाने की जरूरत है इसके लिए मूलनिवासी जागो और संगठित होकर अपनी आवाज बुलन्द करों जो समय की मांग है।

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