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देश की बजाय विदेश में परोपकार

Published On :    8 Jun 2018   By : MN Staff
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यूरेशियन विदेशी लोगों ने हमेशा ही इस बात का परिचय दिया है कि उनका इस देश या यहां की बहुसंख्य आबादी से कुछ भी लेना देना नहीं है जिसका सबूत इस देश से अरबो-खरबों की काली कमाई को देश की बजाय विदेशी में लगाकर परोपकार कर रहे है जिसमें नंदन नीलेकर्णी सहित उच्च वर्ग के कई अरबपति लोग शामिल हैं जो अपनी आधी संपत्ति देश की बजाय विदेशों में दान करने को साहस दिखा रहे हैं यनि देश में 95-90 प्रतिशत लोग आज गरीबी और भुखमरी से जूझ है जिनका परोपकार करने की बजाय विदेशी में परोपकार की दरिया दिली दिखाना कहां तक उचित है? 


इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। कि देश के पूंजीपति देश के प्रति कितने वफादार है इसका ताजा सबूत सामने आया है जिसमें इम्फोसिस के सहसंस्थापक व चेयरमैन नंदन नीलेकर्णी और उनकी पत्नी रोहिणी नीलेकणी सहित देश के उच्च कोटि के तीन अरबपति अपनी संपत्ति का आधा हिस्सा दान करेंगे जिन्होंने दुनिया के सबसे उच्च कोटि रईस विल गेट्स एवं मिलिंडा गेट्स और वारेन वाफेट द्वारा शुरू की गयी परोपकारी पहल को जॉइन किया है। जो अपनीसम्पत्ति का आधा हिस्सा चैरिटी देने को प्रतिवद्ध करता है। 


मतलब ये रईस अपने देश में परोपकार नहीं करना चाहते हैं। ये अपनी सम्पत्तिभारत में क्यूँ नहीं लगाना चाहते हैं क्योंकि ये उन्हीं लोगों के वंशज हैं जिन्होंने अपनी खूनी जाति, वर्ण छुआछूत, क्रमिक असमानता, स्त्रीदासता पर आधारित व्यवस्था का गुलाम बना रखा है इसलिए उनके अन्दर किसी भी प्रकार हम दर्दी नहीं दिख रही है। 


बल्कि इण्टर नेशनल स्तर पर परोपकार करने में अत्यधिक हमदर्दी दिख रही है इण्टर नेशनल स्तर पर ये लोग परोपकार के नाम पर उन लोगों की मदद करना चाहते हैं। जो इन्हीं के वंशज विदेशी में रह रहे है। क्योंकि ये ऐसे लोगों के साथ में शामिल हो रहे हैं जो जिनके अन्दर इन्हीं का डीएनए पाया जाता है। यानि वे अपने ही भाईयों की परोपकार के नाम पर आर्थिक मदद करना चाहते हैं। 


यदि वे भारत में रहकर उनकी सीधे दौर पर मदद करते हैं तो इसमें कई राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय कानून बाधक बनने का भय है। इस लिए इन लोगों ने नया तरीका निकाला है अलावा इन्होंने दूसरा रास्ता भी लम्बे समय से अपना रखा है। भारत में विदेशी निवेश के माध्यम से जो भी कम्प्नियां आ रही है वे कम्पनियां किसी और लोगों की नहीं बल्कि इन्हीं यूरेशियन लोगों के सगे भाइयों की कम्पनियां हैं।


जिनको अपनी विदेश यात्राओं के माध्यम मनमोहन सिंह ने भारत में आने का निमंत्रण दिया और उन्हीं के नक्से कदम पर चलते हुए नरेन्द्र मोदी ने अपनी ताबड़तोड़ विदेश यात्राओं के माध्यम से निमंत्रण दिया है। 


जिसमें प्रधानमंत्री ने किसानों मेहनत कशों अर्थात जनता की खून पसीने की कमाई को पानी की तरह बहाया इनकी विदेश यात्राओं पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यवस्था करते हुए राष्ट्रीय किसान मोर्चा के प्रभारी रामसुरेश वर्मा ने कहा था कि पीएम मोदी विदेश यात्राओं के माध्यम से किसानों मजदूरों का हित करने नहीं बल्कि अपने अपने आका मोहन भागवत की मंशानुसार एक प्रकार से ब्राह्मणों के हित में ही विदेश यात्राएं की जा रही हैं जिनके माध्यम से इस देश में जो विदेशी कम्पनियां आ रही हैं जिनको युवाओं के रोजगार के अवसर पैदा करने के नाम पर लाया जा रहा है अगर इसका बारीकी से अध्ययन करें तो पता चलता है कि इन विदेशी कम्पनियों के आने से और अधिक बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है इसका मतलब साफ है कि देश में रोजगार पैदा होने की बजाय लगातार खत्म हो रहा है।


जिसका मूलकारण है कि आज देश में रिकार्डतोड़ बेरोजगारी बढ़ रही है। जिसका हाल में मीडिया में आयी वह खबर दे रही है जिसमें 90 हजार पदों के लिए तीन करोड़ से अधिक युवाओं ने आवेदन किया जिसमें हाईस्कूल, इण्टर के साथ-साथ इंजीनियर डिग्रीधारी युवाओं ने भी आवेदन किया उस समय यह खुलासा भी हुआ कि वर्तमान भारत में 40 करोड़ से अधिक शिक्षित बेरोजगार हैं। 


इन बेरोजगारों में अधिकाश मूलनिवासी बहुजन समाज के युवा है जिनके रोजगार के मौलिक अधिकारों के खिलाफ जाकर मोदी सरकार विदेशी कम्पनियों को भारत में स्थापित करने की होड़ में लगी हुई है। देश के पूंजीपति अपना पैसा भारत की बजाय विदेशों में खर्च कर रहे हैं जिनको मोदी सरकार पूरी तरह छूट दे रही है जिसका नतीजा सभी के सामने है देश के जाने मोन औद्योगिक पूंजीपति घराने देश की बजाय विदेशों में पैसा लगाने में अपनी ज्यादा शान समझ रहे हैं। 


जो देश के संविधान एवं देश के साथ गद्दारी है। ऐसे लोगों को देश का गद्दार ही कहा जा सकता है। जिनका देश के युवाओं, महिला, पुरूषों से कोई भी लेना देना नहीं है। देश की सत्तासीन सरकार की पूंजीपति समर्थन नीतियों के चलते ही देश के पूंजीपति अपनी काली कमाई परोपकार के नाम पर विदेशों लगा रहे हैं जो गैर कानूनी ढंग कमाई गई सम्पत्ति है। यह कांग्रेस और बीजेपी की सरकारों का परिणाम है। जिनको सबक सिखाने का समय आ चुका है। 

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