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ईवीएम द्वारा यूरेशियन को पीएम बनाने का प्रयास

Published On :    11 Jun 2018   By : MN Staff
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देश में बामसेफ, भारत मुक्ति मोर्चा एवं ऑफसूट संगठनों ने भारत में इस प्रकार का माहौल निर्माण कर दिया है कि अब भारत में यूरेशियन ब्राह्मण कभी भी प्रधानमंत्री के पद पर आसीन नहीं हो सकता है। 


क्योंकि बामसेफ जैसे क्रान्तिकारी संगठन ने अपने चालीस वर्षों के अथक परिश्रम से उस समाज को जागृत कर दिया है जिसको इन यूरेशियन रेश वाले लोगों की अत्याचारी सत्ता और व्यवस्था के बारे में कुछ भी मालूम नहीं था जिसको बामसेफ के माध्यम यह पता चल रहा है कि हमारा दोस्त और हमारा दुश्मन कौन है। 


जैसे जैसे देश के एससी, एसटी ओबीसी एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों को इन विदेशी यूरेशियन की व्यवस्था के बारे में मालूम हो रहा है वह तुरन्त यूरेशियन सवर्णों से दूरी बनाता जा रहा है। बामसेफ ने आज ब्राह्मणों की पांच राष्ट्रीय पार्टियों का भण्डाफोड़ कर दिया है यही वह संगठन जिसने ऐसी राजनैतिक स्थिति का निर्माण कर दिया है कि आज स्थिर सरकारों की जगह गठबन्धन सरकारों का दौर शुरू हो चुका है। 


आज केन्द्र में दो गठबन्धन दिखायी दे रहे हैं जिसमें यूपीए जिसका नेतृत्व कांग्रेस कर रही है और दूसरा है राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन है जिसका नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी कर रही है। इन दोनों गठबन्धनों का नेतृत्व यूरेशियन ब्राह्मण ही कर रहे हैं केन्द्र में विपक्ष नाम की कोई चीज ही नहीं है। 


ये गठबन्धन, बामसेफ के माध्यम चल रही जनजागृति का ही परिणाम है क्योंकि एक समय था जब इन ब्राह्मणों की सबसे पुरानी राजनैतिक पार्टी कांग्रेस को दो तिहाई बहुमत से सरकार बनाने का अवसर मिलता था जिसको उस समाज का अंधा समर्थन मिलता था जिसको कांग्रेस और भाजपा की मिली भगत ने कहीं का नहीं छोड़ा है देश में जिस उद्देश्य को लेकर संविधान लागू किया गया था उसको कथित आजाद भारत में 70 साल बाद भी प्राप्त नहीं किया जा सका है। 


तो उसका मूलकारण यही भाजपा कांग्रेस की मिली भगत का ही परिणाम है क्योंकि इन दोनों को ही राष्ट्रीय पार्टियों ने संघ के गोपनीय एजेण्डे को लागू करने के लिए संविधान के विरोध में जाकर काम किया है यानि मूलनिवासी बहुजनों का अपने हक एवं अधिकारों के प्रति अनभिज्ञता का फायदा कांग्रेस और भाजपा की मिलीभगत के माध्यम से ब्राह्मणों ने उठाया है। 


जो आज बामसेफ के माध्यम से तेजगति से जागृत हो रहा है। जिसमें एससी, एसटी के साथ ओबीसी भी शामिल हैं जिसको ब्राह्मणों ने हमेशा ही अपनी सत्ता की सीढ़ी बनाकर सत्ता हासिल की है और सत्ता में बैठकर हमेशा ही मूलनिवासी बहुजन को मिले संवैधानिक अधिकार को खत्म करने का काम किया है।


जिसका नतीजा आज यह हुआ है कि 70 साल बाद मूलनिवासी बहुजनों (एससी, एसटी, ओबीसी एवं धर्मपरिवर्तित अल्पसंख्यकों) को उनकी संख्या के अनुपात में हिस्सेदारी नहीं मिल सकी है। जिनकी हिस्सेदारी कथित रूप से 3.5 प्रतिशत ब्राह्मणों ने हजम की है जिसका नतीजा ये है कि आज कार्यपालिका में 80 प्रतिशत, न्यायपालिका में 98 प्रतिशत, विधायिका में 70 प्रतिशत और मीडिया में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी एक ही जाति। 


वंश के हाथों में केन्द्रित हो गयी है जिसका खुलासा करने वाला एकमात्र संगठन बामसेफ है। जिसने अपने 40 वर्षों की जनजागृति से पूरी मनुवादी व्यवस्था की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। 


बहुजनों में आयी जागृति को भापकर ही शासक वर्ग इस देश में लोकतंत्र की हत्या करने वाली ईवीएम लेकर आया क्योंकि उसको यह भय पैदा हो गया कि बैलेट पेपर से सम्पन्न होने वाली चुनाव प्रक्रिया के बारे में लोग बामसेफ के माध्यम से तेजी से जागृत हो रहे हैं और वैसा हुआ भी कि बैलेट पेपर की व्यवस्था से अस्थिर सरकारों यानि बहुमत की सरकारों का दौर खत्म हो चुका है और कांग्रेस और भाजपा के बहुमत की हुकूमत का खात्मा हो गया जिसके कारण इन दोनों ही मनुवादी पार्टियों को गठबंधन की राजनीति स्वीकार करनी पड़ी जिसमें एक दल के साथ कई कई दल शामिल है।


आज कांग्रेस या बीजेपी जो भी बहुमत की सरकार बनाने में कामयाब हो रहे हैं वे जनमत की सरकारें नहीं बल्कि ईवीएम धोखाधड़ी की सरकारें ही बन रही है क्योंकि यदि आज भारत में बैलेट पेपर चुनाव करवा दिया जाय तो इन मनुवादी पार्टियां का राष्ट्रीय रूतबा भी संकट में पड़ सकता है। 


क्योंकि देश भर में बामसेफ के माध्यम से आ रही जनजागृति से यूरेशियन और उनकी व्यवस्था की जड़े हिलने लगी है। इस जनजागृति से एक बात का संकेत तो स्पष्ट रूप से मिल रहा है कि अब देश में यूरेशियन प्रधानमंत्री कभी नहीं बन सकता है। 


लेकिन वर्तमान समय में ईवीएम से सम्पन्न हो रही चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की संदिग्ध भूमिका यह काम ईवीएम में घोटाला करके कर सकते हैं। जिसका संकेत नागपुर में सम्पन्न संघ के कार्यक्रम से मिल चुका है कि वह अब यूरेशियन ब्राह्मण को पीएम बना सकते है जो केवल इलैक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के माध्यम करने का संकेत हैं जिस पर भारत से लेकर विदेशों तक में गम्भीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं जिसमें धोखाबाजी करना आसान है क्योंकि ईवीएम एक इलैक्ट्रानिक डिवाइस है जिसमें कोई भी छेड़छाड़ कर सकता है।

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