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भारत में शासक वर्ग की सत्ता का सूत्रधार चुनाव आयोग

Published On :    18 Jun 2018   By : MN Staff
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अमरीका में जब ईवीएम मशीन ने अपना खेल दिखाना शुरू किया तो वहां की मिशीगन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अलेक्स हिल्डरमैन ने इलेक्शन कमीशन से ईवीएम मांगी और फिर उसे अधिकारियों और पब्लिक के सामने आसानी से हैक करके दिखाया। इसके बाद क्या हुआ? 


इसके बाद यह हुआ कि अमरीका के इलेक्शन कमीशन ने उन्हें अपने फ्रॉड रिकग्निशन डिपार्टमेंट में जाँच अधिकारी का पद देते हुए सम्मानित किया। जब यह बात भारत में हैदराबाद के एक सॉफ्टवेयर एक्सपर्ट ‘‘हरी प्रसाद’’ को पता चली तो उन्होंने अमरीका के इस प्रोफेसर अलेक्स हिलडर्मन और नीदरलैंड के एक हैकर रोबर्ट वेल्टीजिन को अपने खर्चे पर भारत बुलाया और भारतीय चुनाव आयोग से ईवीएम में हैकिंग सिद्ध करने के लिए ईवीएम उपलब्ध करवाने की मांग की। 


चुनाव आयोग बोला कि भाई हमारी मशीन हैक हो ही नहीं सकतीं, हम बहुत निष्पक्षता और पारदर्शी तरीके से काम करते हैं। हरी प्रसाद ने कहा आप जब तक ईवीएम नहीं देंगे तब तक कैसे पता चलेगा? चुनाव आयोग बोला अरे भाई बोल दिया न, हमने जो बोला वो पत्थर पर लकीर है। (कुल मिला कर एक साल तक चुनाव आयोग हरी प्रसाद और उनकी टीम को टरकाते रहा।


हतोत्साहित होकर हरी प्रसाद ने मुम्बई के ओल्ड कस्टम हाउस के गोदाम से एक ईवीएम को अपनी जान और करियर पर खेल कर चुरा लिया और शांति से बैठ कर अपनी टीम के साथ ईवीएम की धोखधड़ी का पर्दाफाश किया कि कितनी आसानी से राजकीय संरक्षण प्राप्त लोग इसे हैक कर सकते हैं। 


उन्होंने ईवीएम हैकिंग का वीडियो अपनी वेबसाइट पर डाला और पूरा हैकिंग रिसर्च पेपर भी प्रकाशित किया। अब ये बात मीडिया को पता चली तो चुनाव आयोग तक भी पहुंच गयी। इसके बाद चुनाव आयोग ने हरी प्रसाद को जेल में डाल दिया। 


अब याद करो की अमरीका में जिस व्यक्ति ने ईवीएम हैक करके दिखाई थी उसे अमरीका सरकार ने लोकतंत्र बचाने की खातिर सम्मानित किया था और अपने चुनाव आयोग में विशेषज्ञ के तौर पर जॉइनिंग भी दी थी, लेकिन वहीं विश्वगुरु भारत में हरी प्रसाद को एक जागरूक नागरिक होने के कारण जेल मिली।


जब जेल से हरी प्रसाद बाहर निकले तो उन्हें वापस अमरिका बुलाया गया और वहां द फ्रांसिस्को के एक इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन ने भारतीय ईवीएम पर रिसर्च करने के लिए 2010 में उन्हें सम्मानित किया। अब यहां पर सवाल यह है कि सही काम के लिए भी हरी प्रसाद को सम्मान की जगह अपमान क्यों मिला?


हरी प्रसाद काण्ड है 2010 का और इस काण्ड के बारे में 2010 और उससे पहले से ही आडवाणी, जीवीएल नरसिम्हाराव और ये सुब्रमण्यम स्वामी बोल तो बहुत दिनों से रहे थे की ईवीएम हैक हो रही है, ईवीएम हैक हो रही है, लेकिन कोई भी टेक्निकल सबूत नही दे पा रहा था वहीं हरी प्रसाद ने वो ही टेक्निकल सबूत उपलब्ध कराये और बाकायदा वीडियो भी दिखाया ईवीएम को उनके असली ईवीएम हैकिंग का। 


इस बात पर उस समय के मुख्य चुनाव आयुक्त ‘नवीन चावला’ भड़क गए और टेक्निकल सबूतों को साइड करते हुए बड़ी चालाकी से ईवीएम चुराने के मामले में हरी प्रसाद को जेल में ठूंस दिया। जब 2010 में हरी प्रसाद ने ईवीएम हैक करके दिखाई तो उस वक्त नवीन चावला इंडिया के चीफ इलेक्शन कमिश्नर थे, इनपर भाजपा सरकार में वित्त मंत्री रहे जसवंत सिंह और तमाम विसिलब्लोअर्स ने आरोप लगाया था कि इस आदमी को चीफ इलेक्शन कमीशन मत बनाओ ये आदमी ने फ्रॉड किया है, ये सोनिया गांधी का पिछलग्गू है, इन्हें जयपुर आदि में फ्री में जमीन आवंटित की गयी है इनके खिलाफ जयपुर पुलिस में एफआईआर तक दर्ज हो चुकी है। 


यही नहीं यह बात राष्ट्रपति तक पहुँच गयी, हुआ क्या? कुछ नही हुआ, बल्कि पूरे टशन से अपना कार्यकाल पूरा किया। इतनी सारी प्रक्रिया कांग्रेस के समय में हुआ था, उसके बाद क्या हुआ?


उसके बाद यह हुआ की अचानक से अडवाणी चुप, जीवएल नरसिम्हा राव चुप और स्वामी सुब्रह्मण्यम भी चुप और 2014 में कांग्रेस ईवीएम से चुनाव हार गयी और बीजेपी उसी ईवीएम से चुनाव जीत गयी। अब लेटेस्ट ये है कि ये चुनाव आयोग केन्या सरकार को ये ही फ्रॉड ईवीएम बेच रहा है और वहां चुनाव करवा रहे हैं। 


जब भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम ने 2014 के चुनाव बाद बीजेपी पर ईवीएम हैक से चुनाव जीतने का सबूतों के साथ आरोप लगाया तो 2010 के बाद फिर कुछ रिसर्चरों की नींद टूटी। भारत चुनाव आयोग किसी को ईवीएम देता ही नहीं है तो वो लोग पहुँच गये केन्या की यहाँ से ईवीएम प्राप्त कर लेंगे और सबको इसे हैक करके दिखाएंगे। 


जब चुनाव आयोग को इस बात की भनक लगी की भारत से कुछ लोग यहाँ गये हैं ईवीएम हैकिंग दर्शाने के लिए तो केन्या सरकार पर दबाव डाल कर उन सभी को वहां से भगाया गया, इससे खिन्न होकर उन्होंने एक ईवीएम डेमो बनाया और उसे दिल्ली विधानसभा में मात्र 90 सेकंड में हैक करके दिखा दिया। 


जब ज्यादा ही रायता फैल गया तो भारतीय चुनाव आयोग को अंततः कुछ शर्म आयी और उन्होंने सभी पार्टियों को सीना ठोककर ओपन चौलेंज किया कि आओ और निकाल लो अपनी भड़ास, दम है तो हैक करके दिखाओ, लेकिन इसमें भी एक शर्त रखकर बेशर्मी का सबूत दिया कि आप ईवीएम हैक तो करके दिखा सकते हो, लेकिन हम इसे आपको छूने नहीं देंगे। 


क्यों? क्योकि हम निस्पक्ष, पारदर्शी और बेहतरीन चुनाव करवाते हैं ये सबको पता है, आपको हम पर विश्वास करना ही होगा। फिर वो सब लोग दीवारों में सिर मारकर घर वापिस आ गये। यही नहीं निर्मल बाबा को पकड़ो, आसाराम को जेल से निकाल कर उसकी सेवाएं लो या फिर रामपाल महाराज के चरणों में लोट कर इनसे अनुनय विनय करो, क्योकि दुनिया में मात्र यही कुछ लोग हैं जो किसी भी चीज या मशीन को बिना छुए प्रभावित कर सकते हैं। ये ही हैक कर सकते हैं। 


यहा एक और बात है वह यह कि 2010 में जब नवीन चावला मुख्य चुनाव आयुक्त थे तब एक डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर ‘अलोक शुक्ला’ ये कालर खड़ा करके गये अमेरिका जहाँ एक कॉन्फ्रेंस में ईवीएम पर डिस्कशन होना था। वहां इन्होंने जाकर बयान दिया कि हम भारत में  ‘निस्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित चुनाव करवाते हैं और भारतीय ईवीएम तो महा सेफ हैं उनमे कोई चालबाजी हो ही नहीं सकती। 


अब इन बेचारों का दिन खराब था, क्योकि इन्हें उसी कॉन्फ्रेंस में मिल गए अलेक्स हिल्डेर्मन जिन्होंने हरी प्रसाद के साथ भारतीय ईवीएम को हैक करके दिखाया था। अलेक्स ने वहां जन सभा में कहा कि क्यों झूठ बोल रहे हो, शर्म नहीं आ रही क्या? हरी प्रसाद का क्या हाल किया तुमने क्या किसी को पता नहीं है किसने जेल में सड़ाया इतने बुद्धिमान आदमी को? वहां भयंकर बवाल इसलिए हुआ क्योंकि भारतीय चुनाव आयोग एक ही बात रिपीट कर रहा था की भारतीय निर्वाचन आयोग निस्पक्ष पारदर्शी और सुरक्षित चुनाव करवाता है।


ईवीएम तो 2010 में ही बंद हो जाती अगर ये नवीन चावला मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं होता जिन पर फ्रॉड के बेहद सीरियस केस लगे थे, तभी हरी प्रसाद को जेल में डालने के बजाय सम्मानित कर देते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, अब क्यों नही किया ये हम सब जानते हैं और कोई जानता भी नहीं, ये कांग्रेस का अपॉइंटमेंट वैसे ही था जैसे अब बीजेपी ने अपॉइंटमेंट कर रहे हैं, जिनकी वजह से पीएनबी घोटाला हुआ है यही सत्य है। भारत में 2004 और 2019 से लगातार लोकतंत्र की हत्या हो रही है जिसका मुख्य वजह भारत निर्वाचन आयोग है।

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