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पीएनबी फ्रॉड जांच में चौंकाने वाला खुलासा

Published On :    22 Jun 2018   By : MN Staff
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पंजाब नैशनल बैंक में 13,000 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े की आंतरिक जांच में चौंकाने वाला सच पता चला है कि बैंक के जोखिम नियंत्रण एवं निगरानी तंत्र में गहरी खामियों की वजह से नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के साथ बैंककर्मियों की मिलीभगत पकड़ में नहीं आ सकी। 


पीएनबी के जिन अधिकारियों को आंतरिक जांच का जिम्मा सौंपा गया था, उन्होंने 162 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी है जिसमें कहा गया है कि फर्जीवाड़े के तार पीएनबी की कुछ नहीं बल्कि कई शाखाओं से जुड़े हैं। जांच रिपोर्ट कहती है कि पीएनबी फ्रॉड में क्लर्क, फॉरन एक्सचेंज मैनेजर और ऑडिटर से लेकर रीजनल ऑफिस के प्रमुख तक, पीएनबी के कुल 54 कर्मचारी-अधिकारी शामिल थे। 


इन्हीं 54 में से आठ लोगों के खिलाफ सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया है। इस जांच रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। रिपोर्ट में फर्जीवाड़े के बाद संदिग्ध अथॉरिटीज के खिलाफ नियम के तहत कार्रवाई नहीं करने का भी जिक्र है। 


फिर भी इसमें कहा गया है कि पीएनबी पर कोई भी जुर्माना नहीं लगाया गया और सीनियर मैनेजमेंट में किसी को भी नहीं हटाया गया। हालांकि, रिपोर्ट इस सवाल पर मौन है कि क्या निगरानी की जिम्मेदारी निभाने में असफल रहे अधिकारी फर्जीवाड़े से अवगत थे। 


जांच करने वाले पीएनबी अधिकारियों का मानना है कि वर्षों से चल रहा यह फर्जीवाड़ा इसलिए पकड़ में नहीं आया क्योंकि नई दिल्ली स्थित पीएनबी मुख्यालय में क्रेडिट रिव्यू और इंटरनेशनल बैंकिंग यूनिट्स जैसे अति महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारी गड़बड़ी थी। 


रिपोर्ट में साफ कहा गया है, (जिम्मेदारी के निर्वहन की) असफलता के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। स्पष्ट है कि नियमों का उल्लंघन, अनैतिक व्यवहार, गैरजिम्मेदारी की मानसिकता ने बैंक को इस बड़े संकट में डाला है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक के इंटरनेशनल बैंकिंग सिस्टम और आईटी डिविजन ने इंटेग्रेशन वर्क में देरी की। 


उन्होंने 2016 में आरबीआई की ओर से आए निर्देशों का भी पालन नहीं किया जिसमें स्विफ्ट सिस्टम की व्यापक ऑडिटिंग का सुझाव था। जांच में खुलासा हुआ है कि मुंबई स्थित ब्रैडी हाउस ब्रांच में नियम के तहत बेसिक डेली स्विफ्ट रीकंसिलिएशन का काम हुआ करता तो फर्जीवाड़ा पकड़ा जा सकता था। 


रिपोर्ट कहती है कि सिर्फ इसी काम से पूरा फर्जीवाड़ा पकड़ में आ जाता। हालांकि, इस तरह की लापरवाही सिर्फ ब्रैडी हाउस ब्रांच में नहीं बल्कि अन्य कई शाखाओं में भी हुई। प्रोटोकॉल के मुताबिक, डेली रीकंसिलिएशन रिपोर्ट्स पीएनबी के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में जाना चाहिए था। 


इस रिपोर्ट पर ब्रैडी हाउस ब्रांच हेड का दस्तखत होता और हर महीने इसे मुंबई सिटी के रीजनल ऑफिस में भेजा जाता। यहां से उन्हें ऑल-क्लियर सर्टिफिकेट मिलते। लेकिन, पिछले साल ब्रैडी हाउस ब्रांच से 12 महीने में सिर्फ दो महीने की रिपोर्ट मिलने के बावजूद रीजनल ऑफिस ने झूठे कंप्लायंस सर्टिफिकेट पर दस्तखत कर दिया। 


रिपोर्ट यह भी कहती है कि इससे ब्रैडी हाउस ब्रांच में सबकुछ ठीकठाक होने का प्रमाण मिलता रहा। इतना ही नहीं, पेपर ट्रेल में बड़ी गड़बड़ी के बावजूद 2010 से 2017 के बीच 10 बार जांच के लिए आए सीनियर इंस्पेक्शन ऑफिसरों में एक भी ने किसी तरह की खामी रिपोर्ट नहीं की। 


पीएनबी की आंतरिक जांच रिपोर्ट कहती है कि नीरव मोदी की कंपनियों के साथ डीलिंग की वजह से ब्रैडी हाउस ब्रांच स्टार परफॉर्मर बना हुआ था। इसका इंपोर्ट और एक्सपोर्ट ट्रांजैक्शन मार्च 2017 तक सिर्फ 12 महीने में ही 3.30 अरब डॉलर हो गया था। 


यह आंकड़ा पिछले दो सालों के आंकड़े से 50 प्रतिशत ज्यादा था। इस तरह की आश्चर्यजनक ग्रोथ को नोटिस किया जाना चाहिए था। रिपोर्ट कहती है कि गोकुल नाथ शेट्टी अप्रैल 2010 में पीएनबी के फॉरेक्स डिपार्टमेंट जॉइन किया था। 


ब्रैडी हाउस ब्रांच ने इंटरनल बैंकिंग सिस्टम को दरकिनार करते हुए स्विफ्ट मेसेजेज के जरिए नीरव मोदी को पहली बार मार्च 2011 में 1 अरब रुपये की फर्जी क्रेडिट गारंटीज दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले कुछ वर्षों में शेट्टी ने 1200 से ज्यादा फर्जी क्रेडिट गारंटीज जारी कर दी थी। 


मध्यम दर्जे के कर्मचारी के रूप में शेट्टी को सीनियर ऑफिसरों के दस्तखत के बिना 25 लाख रुपये तक का ट्रांजैक्शन अप्रूव करने का अधिकार ही होना चाहिए था। लेकिन उसे असीमित लेनदेन की स्वीकृति प्रदान करने का अधिकार दे दिया गया। 


मई 2017 में रिटायरमेंट से कुछ महीने पहले शेट्टी ने नीरव मोदी ग्रुप से जुड़े बड़े फॉरेक्स ट्रांजैक्शन को लेकर अपने पर्सनल याहू ईमेल ऐड्रेस से 22 ईमेल भेजे थे। इनमें 18 ईमेल आधी रात को भेजे गए थे। रिपोर्ट यह भी कहती है कि बैंक के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने पर्सनल ईमेल के इस्तेमाल को नजरअंदाज कर दिया। 


पीएनबी पॉलिसी के तहत कोई भी अधिकारी एक ही ब्रांच में तीन साल से ज्यादा वक्त तक नहीं रह सकता है, लेकिन शेट्टी ब्रैडी हाउस ब्रांच में सात वर्ष तक रहकर रिटायर किया। उसके कार्यकाल के दौरान तीन ट्रांसफर ऑर्डर्स जारी हुए थे, लेकिन उसे कभी हटाया नहीं गया। 


रिपोर्ट कहती है कि ब्रांच के स्टाफ को फर्जीवाड़े का पता नहीं चला होगा, यह समझ से परे है। अब तक पंजाब नेशनल बैंक की तरह ही अन्य बैंकों में भी हेराफेरी बगैर स्टाफ संभव नहीं है।

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