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राम राज्य का खूंखार चेहरा...

Published On :    8 Jul 2018   By : MN Staff
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जब से केन्द्र में मोदी सरकार आयी है तब से भाजपा देश और 20 राज्यों में राम राज्य होने का डंका पीट रही है। लेकिन इस राम राज्य का खूंखार चेतरा किसी को भी दिखाई नहीं दे रहा है। जबकि राम राज्य के नाम पर पूरे देश आतंक मचाया जा रहा है, अगर आंकड़ा देखें तो पूरा देश खून में सना नजर आयेगा। 


देश मे चारों तरफ सामुहिक बलात्कार और निर्मम हत्याएँ, जातीय हिंसा, मंहगाई, धार्मिक उन्माद फैलाए जा रहे हैं। देश की जनता नन्ही मासूम बच्चियों के लहू को धो रही है, जिनका इन दरिंदों ने कुर्सी हथियाने के लिए सामुहिक बलात्कार के साथ हत्याएँ भी करवा दी हैं, इनमें से बहुत सारे पेड लोग हैं जो इन दरिंदे नेताओं के इशारे पर ऐसे घिनौने अपराधों को अंजाम देते हैं। 


क्योंकि भारतीय जनता को भयभीत करने के लिए ये दरिन्दे सामुहिक बलात्कार एवं हत्याओं का वीडियो तक बनाकर शोसल मीडिया पर डलवा रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अभी तत्कालीन कुछ वीडियो फेसबुक या वॉट्एप पर अपलोड किए गए हैं, जिनको देखकर सब समझ में आता है। क्योंकि कोई भी अपराधी जुर्म छुपकर करता है, लेकिन अब तो जुर्म करने वाले सरेआम खुद अपने जुर्म का वीडियो बनाकर सार्वजनिक भी कर रहे हैं। आखिर कौन हैं ये लोग? किसके इशारे पर बेखौफ जुर्म किया जा रहा है? हम 97 प्रतिशत भारतियों को समझने की जरूरत है।


बता दें कि बीते हफ्ते दो बड़े मुद्दे देश में छाए रहे। पहला, मॉब लिंचिंग यानी अफवाह या किसी पर संदेह के आधार पर भीड़ द्वारा इतनी पिटाई कर देना कि उसकी मौत हो जाए। दूसरा, मंदसौर, सतना समेत देश के बाकी शहरों में बच्चियों से दुष्कर्म। 


अब तक भीड़ की पिटाई से कितनी मौतें हुईं, इसके आंकड़े सरकारी एजेंसियों के पास नहीं हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) का कहना है कि 2017 के आंकड़े जब जारी किए जाएंगे, उनमें मॉब लिंचिंग की घटनाओं का जिक्र रहेगा। वहीं, नाबालिगों के खिलाफ यौन हिंसा के मामले कितने बढ़े हैं, इसका पता इसी बात से चलता है कि बीते 15 साल में बच्चियों से दुष्कर्म की घटनाओं में करीब 1700 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।


12 राज्यों में 2000 से लेकर 2012 के बीच डायन बताकर भीड़ ने 2097 हत्याएं कीं। 2011 जनवरी से 2017 जून के बीच मॉब लिंचिंग की घटनाएं 20 प्रतिशत बढ़ गईं। 2017 के पहले छह महीनों के दौरान 20 हमले गौहत्या की अफवाह पर हुए। 


ये 2016 से 75 प्रतिशत ज्यादा थे। देश के 10 राज्यों में 2018 में भीड़ की पिटाई में मौत के 14 केस दर्ज हुए हैं। इनमें 31 लोगों की मौत हुई। 14 में से 11 केस में अफवाह बच्चा चोरी की थी। हालांकि, ऐसे आंकड़ों का कोई ऑफिशियल रिकॉर्ड अब तक नहीं है। एनसीआरबी का कहना है कि क्राइम इन इंडिया 2017 पब्लिकेशन में वह पहली बार ऐसे आंकड़ों को शामिल करेगा।


अफवाहों की तीन बड़ी घटनाओं से पूरा देश दहल उठा है। पहली, भीड़ की पिटाई में सबसे पहले डायन बताकर हमला करने के मामले सामने आए। दूसरी, उसके बाद गौहत्या की अफवाहें सबसे ज्यादा रहीं। तीसरी, पिछले कुछ दिनों में बच्चा चोर होने का आरोप लगाकर भीड़ द्वारा पिटाई के मामले देखे जा रहे हैं। 


एक सनसनीखेज रिपोर्ट से पता है कि 2002 से इन बड़ी घटनाओं में सबसे ज्यादा वृद्धि होना शुरु हुआ है। हालांकि इसके पहले भी ऐसी बहुत घटनाएं हुई हैं। 2002 में पहला बड़ा मामला सामने आया, जब हरियाणा में गौहत्या की अफवाह के चलते भीड़ ने पांच दलितों को पीट-पीटकर मार डाला। 


यही अफवाह मुजफ्फरनगर और कोकराझार में दंगों का कारण बनी। इंडिया स्पेंड वेबसाइट के मुताबिक 2010 से 2017 के बीच दर्ज 63 केस में से 97 प्रतिशत पिछले तीन साल में दर्ज हुए। 63 में से 61 केस गौरक्षक दल बनाने और गौमांस पर रोक लगाने के बाद दर्ज हुए।


एनसीआरबी के मुताबिक, नाबालिग से दुष्कर्म के मामले 2015 से 2016 के बीच 82 प्रतिशत बढ़ गए। 2015 में ऐसे 10 हजार 854 केस थे। 2016 में 19 हजार 765 केस दर्ज हुए। 2016 में बच्चों की तस्करी के 14 हजार 183 मामले दर्ज हुए। यह 2015 से 27 प्रतिशत ज्यादा थे। 


2016 में दर्ज मानव तस्करी के मामलों में से 59 प्रतिशत मामले 18 साल से छोटे बच्चों से जुड़े थे। 2016 में लापता हुए 63 हजार 407 बच्चों में 41 हजार 67 लड़कियां थीं। गुमशुदा बच्चों में लड़कियों का प्रतिशत 65 था। 45 प्रतिशत बच्चे जबरन मजदूर बनाए गए। 35 प्रतिशत को यौन शोषण के लिए बेच दिया गया। 4980 को जिस्मफरोशी और 162 को पोनोग्राफी में धकेला गया।


2016 में नाबालिगों से दुष्कर्म के सबसे ज्यादा 2467 केस मध्यप्रदेश में दर्ज हुए। महाराष्ट्र में 2292, उत्तरप्रदेश में 2115, ओडिशा में 1258 और तमिलनाडु में 1169 केस दर्ज हुए। जम्मू-कश्मीर में 2015 में नाबालिग से दुष्कर्म का एक भी केस दर्ज नहीं हुआ। 


लेकिन 2016 में ऐसे 21 केस दर्ज हुए। हरियाणा जो महिलाओं और बच्चों के लिए असुरक्षित माना जाता रहा है वहां 2015 में 224 केस दर्ज हुए और 2016 में इनकी संख्या 532 पहुंच गई थी। गुजरात में 2015 में 1059 और 2016 में 1120 केस दर्ज हुए। असम में 2015 में 542 और 2016 में 586 केस दर्ज हुए। 


यदि केवल बच्चों से दुष्कर्म के मामले पर प्रकाश डालें तो पता चलेगा कि 1689 प्रतिशत की बेतहासा बढ़ोत्तरी हुई है। आंकड़ों पर गौर करें तो 2001 में बच्चों से दुष्कर्म और गंभीर यौन अपराधों के 2013 मामले सामने आए थे। 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर 36 हजार 22 हो गया। 


यह वृद्धि 1689 प्रतिशत करीब 1700 प्रतिशत रही। 2017 और 2018 के आंकड़े अब तक रिलीज नहीं किए गए हैं, लेकिन पिछले सालों के मुकाबले ये बढ़े ही हैं। जबकि अकेले यूपी में केवल 07 महीने में कुल 4000 से ज्यादा बलात्कार के मामले दर्ज हुए हैं।

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