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मोदी सरकार की छत्रछाया में कंगाल होता बहुजन समाज

Published On :    31 Mar 2018   By : MN Staff
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देश में मोदी सरकार द्वारा लागू की गयी नोटबंदी का इतना व्यापक असर हुआ है कि लोगों को सकल वित्तय सम्पत्तियों में 4 लाख हजार करोड़ से अधिक की गिरावट आयी। 


जिसका खुलासा रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया की इसी तिमाही रिपोर्ट में हुआ। आरबीआई की तिमाही रिपोर्ट में यह सच सामने आया है कि मोदी सरकार द्वारा 8 नवम्बर 2016 को लागू की गयी नोटबंदी की मार सबसे अधिक आम लोगों पर पड़ी है। 

हाउस होल्ड, फाइनेंशियल एसेट्स एण्ड लायबिलटीज नाम से जारी की गयी इस रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास द्वारा पुराने नोट वापस लेने का स्पष्ट प्रभाव दिखाई दे रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया की रिपोर्ट के अनुसार सितम्बर 2016 में ग्रास फाइनेंशियल एसेट्स (सकल वित्तय सम्पत्तियों) का कुल मूल्य 141 ट्रिलियन रूपये था। जो दिसम्बर 2016 तक इसमें 4 ट्रिलियन की कमी आयी वो भी महाज 52 दिनों में। इतने दिनों में इसमें जो 4 ट्रिलियन कमी आई जिससे यह आंकड़ा 141 से घटकर 137 ट्रिलियन रह गया।


इतना ही नहीं देश की अर्थव्यवस्था पर भी गम्भीर असर देखने को मिला। देश की अर्थव्यवस्था नोटबंदी के मार से उभर भी नहीं पायी थी कि संघ की सरकार ने मूलनिवासी बहुजनों को कंगाल बनाने के लिए 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू कर दिया। 


मोदी सरकार द्वारा उठाये गये ये दोनों ही कदमों का व्यापक असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा जिसका सबसे अधिक फायदा पूंजीपतियों को हुआ, जिसका अथाह कालाधन नोटबंदी और जीएसटी की वजह से सफेद हो गया। यदि ऐसा कहा जाय कि मोदी सरकार पूंजीपतियों के कालेधन को सफेद बनाने के लिए ही नोटबंदी एवं जीएसटी नाम के अस्त्रों का प्रयोग किया तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगा।


जिससे अभी तक देश की खस्ता हाल अर्थव्यवस्था उबर नहीं पायी है। क्योंकि इन अस्त्रों के प्रयोग से देश का निर्यात घट गया है और कई हजारों की संस्था में छोटे और मध्यम उद्योग बन्द हो चुके हैं जिसका परिणाम सामने है कि देश का नौजवान आज बेरोजगारी का दंश झेल रहा है इसका सीधा सा मतलब है कि देश में रोजगार के अवसर लगातार खत्म हो रहे हैं।


ऐसे हालात देश में पैदा करके मोदी सरकार 8.5 लाख करोड़ का महा घोटाला किया है। जबकि संघ की सरकार अपने आपको दूध का धुला साबित करने में कोई भी कसर नहीं छोड़ रही है रही कसर विŸा वर्ष 2017-18 में पूरी हो गयी जिसमें देश को हजारों करोड़ों का चूना लगाकर अर्थात करोड़ का घोटाला करके मनुवादी लुटेरे विदेशों में पलायन कर गए वो भी मोदी सरकार की छत्रछाया में।


जिसने कांग्रेस की परम्परा को निभाते हुए भ्रष्टाचार के मामले में कांग्रेस को पीछे छोड़ने की पूरी कोशिश करते देखी जा सकती है। जिसकी सत्ता में पिछले कुछ दिनों पहले घोटालों की अचानक बाढ़ सी आई जिसमें देश की जनता की खून पसीने की कमाई साफ करने में कोई कसर नहीं लगायी। ऐसी ही साजिशों पर पर्दा डालने के लिए मोदी सरकार कई प्रकार के अस्त्र आजमा रही है।


जिसमें मनुवादी मीडिया ने अहम रोल अदा किया जिसके लिए वह जाना जाता है। वर्तमान समय में मीडिया के माध्यम से सनसनी खेज खुलासों की खबरों को प्रमुखता से छापा जा रहा है। जिससे देश में सरकार की नाकामियों पर पर्दा डाला जा सके। जिसका असर आज देखा जा सकता है कि आज घोटालों की चर्चा एक दम से बन्द हो चुकी है। 


इसी प्रकार की कलाकारी शासक वर्ग ने नोटबंदी और जीएसटी के घातक परिणाम पर पर्दा डालने के लिए गौमाता, राष्ट्रवाद, भारत माता और देशभक्ति जैसे मामलों को खड़ा किया था। लेकिन अब भारत मुक्ति मोर्चा एवं ऑफसूट संगठनों की जनजागृति के कारण शासक वर्ग के इन षड्यंत्रों की पोल पूरी तरह से खुल चुकी है क्योंकि यह भारत मुक्ति मोर्चा जैसे क्रांतिकारी संगठन की समतामूलक विचारधारा का परिणाम है कि आज शासक वर्ग के सारे अस्त्र विफल हो रहे हैं और वह दिन ब दिन नंगा हो रहा है।


जिसने देश को लूटने का सिलसिला चला रखा है जो ऐसी नीतियों को देश में लागू कर रहा है जिसका सबसे अधिक फायदा शासक जातियों को हुआ है जिसका परिणाम सामने है कि आज देश की 90 प्रतिशत सम्पत्तिय पर केवल सवर्णों का कब्जा है।


अगर आंकड़ों की बात करें तो देश में आज 53 प्रतिशत  सम्पत्तिय 1 प्रतिशत लोगों के नियंत्रण में जा चुकी है ये एक प्रतिशत लोग कोई और नहीं बल्कि विदेशी यूरेशियन लोग हैं। जो मोदी सरकार की छत्रछाया में विदेशों में ठिकाना बना रहे हैं, क्योंकि अब उन्हें इस बात का अच्छी प्रकार से पता चल चुका है कि अब देश का वास्तविक मालिक जागृत हो रहा है जो हमको किसी भी कीमत में माफ करने वाला नहीं है।


क्योंकि हम (ब्राह्मण) भारत के मूलनिवासी नहीं हैं जिसका 21 मई 2001 को आयी डीएनए रिपोर्ट में खुलासा हो चुका है। इस डीएनए रिपोर्ट ने देश की सत्ता में गैर कानूनी ढंग से काबिज शासक वर्ग की नींद हराम कर दी है इसीलिए वह देश को लूटकर और मूलनिवासियों को कंगाल बनाकर विदेश भाग रहा है जिसका परिणाम सामने है कि आज मूलनिवासी बहुजन समाज मूलनिवासी होने के बाद भी गरीबी, अशिक्षा, बेकारी, भुखमरी जैसी हजारों समस्याओं से आज भी जूझ रहा है।

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