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देश का शासक वर्ग कौन?

Published On :    4 Apr 2018   By : MN Staff
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मीडिया में चार प्रकार का मीडिया है। पहला-इलेक्ट्रोनिक मीडिया है, जिस पर 100 फीसदी ब्राह्मणों का कब्जा है। दूसरा प्रिंट मीडिया है, जिसमें दो विभाग होते हैं, एक अखबार और दूसरा किताबों का प्रकाशन होता है। 


सारे प्रकाशन समूह ब्राह्मणों के ही है, और सारे अखबार जैसे टाईम्स ऑफ इण्डिया, इण्डियन एक्सप्रेस, दैनिक जागरण और अमर उजाला तथा बंगाली भाषा में संभवतः भारत का सबसे ज्यादा बिकनेवाला ‘आनंद बाजार’ भी ब्राह्मणों का ही है, इण्डियन एक्सप्रेस लिमिटेड का मालिक विवेक गोयंका और टाईम्स ऑफ इण्डिया ग्रुप का मालिक विनीत है।


हिन्दी के सभी अखबार भी उन्हीं लोगों के हैं। महाराष्ट्र में लोकमत है। इस तरह से सारे देशभर में जितने भी अखबार हैं वे सारे ब्राह्मणों के ही हैं। उसके बाद तीसरा मीडिया ट्रेडिश्नल (पारम्परिक) मीडिया है। मुरारी बापू, आशाराम बापू, डोंगरे महाराज, ओझा महाराज जैसे जितने भी महाराज हैं, ये सारे-के-सारे लोग ब्राह्मण धर्म असमानता के प्रचारक हैं। 



आज आम लोग इन्हें संत कहते हैं, जबकि ये लोग संत नहीं हैं, ये ब्राह्मण धर्म के प्रचारक हैं। ब्राह्मण धर्म का मतलब है भेद-भाव पैदा करना, असमानता पैदा करना और उसको बरकरार रखना। ये जितने भी कथित संत हैं, ये सभी लोग ब्राह्मणों के असमानता के पोषक धर्मग्रंथों का प्रचार करते हैं। इस तरह से ट्रेडिशनल मीडिया पर भी अल्पसंख्य ब्राह्मणों का ही कब्जा है। 


चौथा मीडिया मौखिक मीडिया है। इस देश में लगभग 1562 भाषाओं के अंतर्गत 4500 बोली भाषा बोली जाती है। मगर इनमें से किसी भाषा को इस देश में शासन से मान्यता नहीं दी है। ब्राह्मण ग्रंथ भाषा बोलता है और ‘ग्रंथ भाषा’ ही लिखता है जिसे शासन ने मान्यता दे रखी है। इस प्रकार लोकतंत्र के जो चार स्तम्भ हैं, इन सारे स्तम्भों पर ब्राह्मणों का कब्जा हैं। 


उसके अलावा मिलिट्री पर अल्पसंख्य ब्राह्मणों का नियंत्रण है। राज्यों के राज्यपाल जो संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राज्यों पर नियंत्रण करते हैं, राज्यपालों पर भी उन्हीं अल्पसंख्यकों का नियंत्रण है। विश्वविद्यालय, शिक्षा प्रणाली पर नियंत्रण करनेवाले उप कुलपति भी अल्पसंख्य ब्राह्मण है। विश्वविद्यालयों पर उनका नियंत्रण है। 


सिलेबस पर भी अल्पसंख्य ब्राह्मणों का नियंत्रण है अर्थात पढ़ने का अधिकार आपका जरूर होगा, परन्तु आपको क्या पढ़ना है यह तय करने का अधिकार सिलेबस के जरिये ब्राह्मणों को ही है। सारी किताबें लिखने का अधिकार ब्राह्मणों ने अपने नियंत्रण में रखा हुआ है। वो अपने हिसाब से किताबें लिखते हैं। 



उसके बाद उच्च शिक्षा (हायर एजुकेशन), व्यवसायिक शिक्षा (प्राफेशनल एजुकेशन), सूचना तकनीकि (इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी), जैव तकनीकि (वायो एण्ड टेक्नोलॉजी), रिसर्च शिक्षा (रिसर्च एजुकेशन) तथा विदेश शिक्षा (फॉरन एजूकेशन) पर भी सारा-का-सारा ब्राह्मणों के ही नियंत्रण में है। यानि लोकतंत्र के प्रत्येक स्तम्भों का मुखिया (हैड ऑफ द डिपार्टमेन्ट) अल्पसंख्यक ब्राह्मण ही है। 


राज्यों के जो मुख्यमंत्री हैं, उन्हें दिल्ली से नामित (नॉमीनेट) किया जाता है। सामान्य लोग समझते हैं कि राज्यों की सत्ता राज्य के लोगों के पास में है, यह गलत सोच है। क्योंकि केन्द्र जो ब्राह्मणों के नियंत्रण में हैं, अगर वे लोग मुख्यमंत्रियों को नामित करते हैं वास्तविक सत्ता उनके पास होती है,सत्ता उनके पास नहीं होती है, जिन्हें नामित किया जाता है। 


जबकि राज्यों की संवैधानिक व्यवस्था अलग है। फिर भी अल्पसंख्य ब्राह्मणों ने राज्यों पर इस तरह से योजना बनाकर कब्जा किया है। इसलिए किसी को इस गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए कि इस देश का वास्तविक शासक वर्ग ब्राह्मणों के सिवा कोई और है। इसलिए शासक वर्ग अल्पसंख्य ब्राह्मणों ने 83 करोड़ लोगों को प्रतिदिन 6 रूपये और अधिकतम 20 रूपये जीने के लिए बाध्यकारक बना दिया है। 



ये 83 करोड़ लोग मूलनिवासी बहुजन समाज के लोग हैं। अगर 121 करोड़ में से 85 प्रतिशत निकाल दिया जाय तो 100 करोड़ लोग मूलनिवासी हैं, और 100 करोड़ लोगों में से आज 83 करोड़ लोग कम-से-कम 6 रूपये और अधिकतम 20 रूपये प्रतिदिन की आमदनी में जीवन जीने को मजबूर हैं। 


आज अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ी जाति और इनसे धर्म-परिवर्तित लोगों के अन्दर जो लोग कर्मचारी और अधिकारी निर्माण हुए हैं, उनकी जिम्मेदारी बनती है कि मूलनिवासी बहुजन समाज में जो लोग जीवन के संघर्ष में पिछड़ गये हैं, उन्हें भी जीवन के संघर्ष में खड़े होने का अवसर उपलब्ध करायें और उनका साथ-सहयोग करें। 


इसके लिए कर्मचारियों का बामसेफ नामक संगठन बनाया गया है। अवसर का लाभ लेकर जो लोग कर्मचारी और अधिकारी निर्माण हुए हैं उनको, समाज के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराने के लिए और सामाजिक ऋण से मुक्त होने के लिए बामसेफ नाम का कर्मचारियों का संगठन बनाया गया है, ताकि समाज में पिछड़ गये लोग भी जीवन के हर क्षेत्र में संघर्ष करने लायक हो सकें। यह बामसेफ का मौलिक लक्ष्य है। जिसने अपना टाइम वोन्ड कार्यक्रम बना रखा है। 

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