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संघ की रोहिंग्यों के प्रति इतनी नफरत क्यों?

Published On :    19 Mar 2018   By : MN Staff
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देश में यूरेशियन लोगों की गैरबराबरी, क्रमिक असमानता पर आधारित व्यवस्था को मजबूत करने वाले एक मात्र संगठन आरएसएस एवं उसके आनुषांगिक संगठन इस समय रोहिंग्या मुस्लिमों को देश के लिए खतरा बता रहे हैं जिसमें बहुत बड़ा षड्यंत्र छिपा हुआ है। तो सबसे पहले तो इस षड्यंत्र जानने की जरूरत है कि संघ इन निर्दोष रोहिंग्या मुस्लिमों के प्रति इतनी अधिक नफरत का इजहार क्यों कर रहा है? ये रोहिंग्या कोई और नहीं बल्कि भारत के ही मूलनिवासी हैं जिनको आज संघ सुरक्षा के लिए खतरा बताकर उनको वापस भेजने की बात कर रहा है। ये वही लोग हैं जिन्हे भारत की सत्ता में काबिज यूरेशियन लोगों ने आज तक देश की नागरिकता प्रदान नहीं की है जो आज भारत, बांग्लादेश और बर्मा के बीच फुटबाल बने हुए हैं जिनको शासक वर्ग भारत का नागरिक मानने को तैयार नहीं है क्योंकि इनका दोष सिर्फ इतना है कि इन्होंने मानवता के सच्चे हितैषी विश्वरत्न डा. बाबासाहब अम्बेडकर को खुलना, फरीदपुर, बोरीसाल और जस्सौर क्षेत्र से चुनाव जिताकर संविधानसभा में भेजा था जिनके लिए यूरेशियन लोगों ने संविधान सभा के दरवाजे ही नहीं खिड़कियाँ भी बन्द कर रखी थीं। ये वही नमो शूद्राय आन्दोलन के समर्थक मूलनिवासी हैं। इन्होंने ही संविधानसभा में बाबा साहब को भेजकर पूरे बहुजन समाज के अधिकारों का रास्ता खोलने में अहम भूमिका अदा की थी ,जिसकी सजा देने के लिए इन विदेशी यूरेशियन लोगों ने उस क्षेत्र को पाकिस्तान को दे दिया था जो आज बांग्लादेश के नियंत्रण में चला गया है। इन लोगों को शासक वर्ग ने शरणार्थी घोषित कर रखा है। इन्हीं शरणार्थियों को आज तक ठीक से रहने का ठिकाना नसीब नहीं हो रहा है जो आज खानाबदोश जिन्दगी जीने को मजबूर कर दिए गए हैं। इन्हीं को देश का शासक वर्ग देश के लिए खतरा बता रहा है।

जबकि देश के लिए सबसे बड़ा खतरा तो सही अर्थों में शासक वर्ग (यूरेशियन लोग) हैं। जो गैरकानूनी ढंग से भारत की सत्ता पर काबिज हैं जो न तो भारतीय संविधान के अनुरूप है और न ही यू.एन.ओ. के प्रावधानों के अनुसार उचित कहा जा सकता है। ये रोहिंग्या बाबा साहब अम्बेडकर को संविधान सभा भेजने की सजा आज भी भुगत रहे हैं। इसीलिए संघ के लोग इन रोहिंग्यों (मुस्लिमों) को दुश्मन मान रहा है। संघ और संघ के लोग तो वैसे भी संविधान निर्माता को आज भी स्वीकार नहीं कर रहे हैं जिस समय संविधानसभा में संविधान को अंगीकार करने की बहस चल रही थी, वह समय था 26 नवम्बर 1949 उसके तुरन्त बाद ही इन संघियों ने मानवता के सच्चे हितैषी डा. बाबासाहब के पुतले को 11 दिसम्बर 1949 को दिल्ली के रामलीला मैदान में जलाये थे। यानि मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि संघ के लोग जब संविधान निर्माता को कथित आजाद भारत में स्वीकार नहीं कर रहे हैं तो वे उन लोगों को कैसे हजम कर सकते हैं जिन्होंने डा. बाबा साहब अम्बेडकर को संविधान सभा में चुनकर भेजा था।


इसके पीछे इतना भयानक राज छिपा हुआ है जिसकी जानकारी शायद ही मूलनिवासी बहुजन समाज को होगी क्योंकि शासक वर्ग का इतिहास ही इस बात का गवाह है कि वह हमेशा ही इतिहास से प्रेरणा लेकर ही बहुजन समाज के विरोध में कोई भी षड्यंत्र करता है और हमेशा ही उसने मूलनिवासी महापुरूषों को अपनी कुत्सित मानसिकता का निशाना बनाया है साथ ही उनके अनुयायियों के खिलाफ साजिश करने की कोशिश में रहता है। वही हाल रोहिंग्या (मुसलमानों) के खिलाफ किया जा रहा है। जिसमें उनको भारत के लिये खतरा बताया जा रहा है। जो व्यक्ति स्वतः ही बेसहारा हो तो वह देश के लिए खतरा कैसे हो सकता है? उनको खतरा बता कर संघ एक बार फिर उनको खतरा बनाकर आतंकी साबित करने की फिराक में सक्रिय हो चुका है दूसरी तरफ उनको नागरिकता से भी वंचित करने का षड्यंत्र कर रहा है। शासक वर्ग का यह षड्यंत्र देश की कथित आजादी के समय से लगातार चला आ रहा है जो आज गम्भीर समस्या बना हुआ है जिसके जिम्मेदार पूरी तरह से कांग्रेस एवं भाजपा की सरकारें ही हैं जो एक दूसरे की पूरक रही हैं और आज भी बनी हुई हैं।

कांग्रेस का पाखण्ड

कांग्रेस ने ही इस देश में संघ को पूरी तरह संरक्षित करने का काम किया है क्योंकि कांग्रेस ही वह पार्टी है जिसने इस कट्टर मनुवादी षड्यंत्रकारी संगठन आरएसएस को एक बच्चे की तरह पाल पोसकर बड़ा किया है जो आज देखने भर के लिए आरएसएस का विरोध कर रही है। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि कथित आजादी के समय से इस देश में सबसे लम्बे समय तक कांग्रेस ने ही शासन चलाया है जिसने अपने शासन काल में देश का सबसे अधिक सत्यानाश किया है और मूलनिवासी बहुजन समाज को अपनी मनुवादी व्यवस्था में उनकी गुलामी को दृढ़ करने का काम किया है। वही कार्य आज भाजपा को हराने के लिए अन्य दलों से हाथ मिलाने की कोशिश में देखी जा सकती है। वहीं आज वह आरएसएस संघ को देश की आजादी एवं लोकतंत्र के लिए खतरा बता रही है जिसने आरएसएस को सबसे ज्यादा पालने-पोसने का काम किया आज उसे वह लोकतंत्र एवं आजादी के लिए खतरा बता रही है। सच्चाई तो यही है कि कांग्रेस ने ही अपने शासन काल में संघ को आधार बनाकर भाजपा की सत्ता की इबारत लिखी है। अयोध्या में मन्दिर-मस्जिद का विवाद इसी कांग्रेस ने ही पैदा किया। था उस विवादित जगह पर कांग्रेस में ही शिलान्यास कराया और ताला भी कांग्रेस ने ही खुलवाया उसी को सीढ़ी बनाकर संघ आज पूरी तरह से सत्ता पर काबिज होकर मूलनिवासी बहुजन समाज का कत्लेआम कर रहा है तथा पूरे देश को साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने का काम कर रहा है जिसके लिए पूरी तरह से कांग्रेस ही जिम्मेदार है। यानि संघ की मम्मी कांग्रेस और बीजेपी को सबक सिखाने का अवसर आ चुका है जिसका फायदा सभी मूलनिवासी बहुजन को मिलकर उठाना होगा अर्थात इनको ऐसा सबक सिखाना होगा कि उनका अस्तित्व ही खत्म हो जाय।

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