×

भारत निर्वाचन आयोग की धोखेबाजी और दादागिरी

Published On :    16 Apr 2018   By : MN Staff
शेयर करें:


-



इस देश में लोकतंत्र का गला घोंटकर शासक वर्ग की सत्ता का सूत्रधार बन रहा है। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है कि इस बात के एक नहीं कई प्रमाण मौजूद हैं कि देश में पहले आम चुनाव से लेकर आज तक सम्पन्न सभी चुनावों में भारत निर्वाचन आयोग केवल शासक जातियों को सत्ता में स्थापित करने का काम किया है इसके लिए पूर्व में रेगिंग का सहारा लिया,  बाद सरकारी मशीनरी का गैर कानूनी ढंग से इस्तेमाल किया इसके बाद गुण्डों का इस्तेमाल बूथ कैप्चरिंग का सहारा लिया और जब इन्हीं गुण्डों का इस्तेमाल लालू, मुलायम, देवीलाल, देवेगौडा, कांशीराम जैसे मूलनिवासी नेता ने किया तो शासक वर्ग ने तुरन्त ही कहना शुरू कर दिया कि अब राजनीति का अपराधीकरण किया जा रहा है ऐसा आरोप शासक वर्ग की पार्टियों भाजपा, कांग्रेस कम्युनिष्ट ने लगाया। 


जबकि सच तो यही है राजनीति में गुण्डों को सबसे पहले कांग्रेस ने इस्तेमाल करके चुनाव जीतना शुरू किया यानि कि राजनीति का अपराधीकरण कांग्रेस-भाजपा ने किया। यह सिलसिला सन् तक लगातार चलता रहा इसके 6 दिसम्बर 1978 को अस्तित्व में आये क्रन्तिकारी बामसेफ ने सदियों से शोषित पीड़ित मूलनिवासी बहुजन समाज (जिसकी संख्या 85 प्रतिशत) को जागृत करने का प्रयास शुरू किया क्योंकि शासक वर्ग ने देश के पाठ्यक्रम में ऐसे विषयों को शामिल किया जिससे मूलनिवासी बहुजनों को अपने वास्तविक इतिहास की जानकारी नहीं हो सके और नहीं अपने महापुरूषों के क्रान्तिकारी संघर्ष और इतिहास का पता चल सके। 


बामसेफ ने यह काम जिस दिन से अपने हाथों में लिया है, इसके लिये मूलनिवासी समाज के इतिहास और संवैधानिक अधिकारों को आधार बनाया है उस समाज से मूलनिवासी बहुजन अपने मौलिक अधिकारों के प्रति जागृत हुआ है, इसके बाद बामसेफ ने देश की लोकतांत्रिक मशीनरी में 52 प्रतिशत ओबीसी के हक एवं अधिकारों की लड़ाई बहुजन नायक डी.के. खापर्डे और मान्यवर कांशीराम साहब के नेतृत्व में शुरू की क्योंकि (मा. कांशीराम ही उस समय बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे) बामसेफ के प्रयासों से जिस समय मण्डल कमीशन ही नहीं मूलनिवासी बहुजनों को संवैधानिक अधिकारों को राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बनाया तो सबसे अधिक हलचल मूलनिवासी बहुजन समाज (एससी, एसटी, ओबीसी एवं धर्मपरिवर्तित तबको) में दिखाई दी और उस वर्ग में दिखाई दी जिसको मनुवाद ने शूद्र घोषित किया है जिसको आज ओबीसी कहा जाता है जिसको विदेशी यूरेशियन लोग हमेशा ही अपनी व्यवस्था को आधार मानता रहा है 


सम्पूर्ण आजादी एवं संवैधानिक अधिकारों की जनजागृति से शासक वर्ग (यूरेशियन लोगां) को यह एहसास होने लगा कि अब हमारी सत्ता एवं व्यवस्था को खतरा पैदा हो सकता है। अभी तो हम एससी, एसटी, से ही परेशान हैं अगर ओबीसी भी यदि जानकार बनने के बाद अपने संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई लड़ने लगा तो फिर हमारा क्या होगा?


इसे ध्यान में रखकर शासक जाति के लोगों ने ओबीसी की अन्धभक्ति का नाजायज फायदा उठाने के लिए आस्था रूपी राममन्दिर का मुद्दा खड़ा किया जिससे शासक वर्ग ओबीसी को अपने समर्थन में खड़ा करने में कामयाब हो गया क्योंकि ओबीसी अपने अधिकारों से हमेशा ही अंजान रहा है लेकिन बामसेफ ने अपना प्रयास जारी रखा जिसके माध्यम से तेजी से फैल रही जनजागृति से अब शासक वर्ग को पूरी तरह से यह आभास हो चुका कि अब बामसेफ संगठन ने हमारी सत्ता के सभी षड्यंत्रों का राजफाश कर दिया है। 


उसी समय उन्होंने अपनी सत्ता के लिए ईवीएम को स्थापित किया जिसने भारत निर्वाचन ने जिसमें घोटाला करके 2004 और 2009 में कांग्रेस की सत्ता में स्थापित किया जब इसकी भनक भाजपा को लगी तो उसने इस घोटाले को हाईकार्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जहां विशेषज्ञों की उपस्थिति में यह प्रमाणित हो गया कि ईवीएम में गड़बड़ी करना सम्भव है। जिसके खिलाफ 8 अक्टूबर 2013 को कोर्ट ने फैसला दिया कि इसमें गड़बड़ी न हो ऐसा प्रबन्ध किया जाय। 


जिसपर चुनाव आयोग ने लिखित शपथ देकर गड़बड़ी रोकने का आश्वासन दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करके चुनाव आयोग ने 2014 का लोकसभा चुनाव सम्पन्न कराया। जिसका नतीजा सामने है कि मोदी सरकार सत्ता में काबिज है। आज 19 राज्यों में भाजपा सत्ता में स्थापित है। ईवीएम धोखाधड़ी के साथ-साथ शासक वर्ग ने शासक वर्ग के चुनाव जिताने का एक और हथियार का निर्माण किया है वह यह है कि अब वोटर लिस्टों से वोटर्स के नाम गायब करने का मामला सामने आया है जिसका सबूत कर्नाटक में देखने को मिला जिसमें अल्पसंख्य समुदाय के 15 लाख वोटरों के नाम गायब कर दिये गये हैं जो चुनाव जीतने का नया हथकण्डा है। 


इसी धोखाधड़ी को लेकर बामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा ने इसको राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बना दिया है तथा सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने पर चुनाव आयोग को ही सुप्रीम कोर्ट में खींच लिया है जहां मूलनिवासी योद्धा वामन मेश्राम के सवालों का जवाब चुनाव आयोग को देते नहीं बन रहा है। वहीं अब निर्वाचन आयोग ने कर्नाटक अर्थात राज्य की जनता को भयभीत करने का काम कर रहा है जबकि देश के लोकतांत्रिक इतिहास में यानि भारत के गणतंत्र घोषित होने आज तक के इतिहास विधायिका द्वारा ऐसा कोई भी कानून नहीं बनाया है कि देश की जनता को अपनी बात शासक सत्ता के विरोध करने से रोका जा सके। 


और आम जनता को भयभीत किया जा सके जब देश में ऐसा कोई भी कानून नहीं तो कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग की ईकाई किस आधार पर दादागिरी दिखा रही है। क्योंकि संविधान के अनुसार जनमत की कद्र करना सभी संस्थाओं की जिम्मेदारी है। भारत निर्वाचन आयोग को कर्नाटक राज्य ईकाई पर तुरन्त ही कार्यावाही करना चाहिए। और इस असंवैधानिक कदम के लिए आम जनता से तुरन्त ही माफी मांगना चाहिए। 

संपर्क करें

आपके पास अगर कोई महत्वपुर्ण जानकारी, लेख, ओडीयो, विडीयो या कोई सुझाव हैै तो हमें नीचे दिये ई-मेल पर मेल करें.:

email : news@mulniwasinayak.com


MN News On Facebook

लोक​प्रिय
सीएम वसुंधरा ने 22 करोड़ की लागत से ‘मंत्र प्रतिष्ठान’ बनव
फेसबुक ने फिर बताया कि उसके 5 करोड़ यूज़र्स की जानकारियां कि
यूपी में दिनदहाड़े कार सवार बदमाशों ने किया छात्रा का अप
समय पूर्व विधानसभा भंग होने पर चुनाव आचार संहिता तत्काल
26 साल में बेटे के लिए मां को मिला न्याय, हत्यारे पुलिसवालो
बंगाल में भूख से 68 वर्षीय महिला की मौत, बारिश के कारण भीख न
शरद पवार ने मोदी की राफेल डील का समर्थनकिया तो तारिक अनवर
व्यापमं घोटाला मामले में दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और ज्योति
निजी कम्पंनि द्वारा सरकारी नौकरियों की परीक्षा कंडक्ट क
विवाहेत्तर सम्बन्ध अब नहीं होगा अपराध, कानून को सुप्रीम
डिफेन्स मिनिस्ट्री के वरिष्‍ठ अधिकारी ने राफेल डील पर जत
अपनी सोशल मीडिया टीम से बोले शाह- सच्‍चा हो या झूठा, जो चाह
सीएम योगी के भड़काऊ भाषण मामले में याचिकाकर्ता पर गैंगरे
एमपी : ABVP कार्यकर्ताओं की कॉलेज में गुंडागर्दी से परेशान ह
कनवर्टेड ब्राह्मण वसीम रिज़वी बोला- “मैंने सपने में भगवान
मुख्यमंत्री योगी को मर्डर केस में कोर्ट का नोटिस, 19 साल पह
SC का फैसला: सरकारी नौकरियों के प्रमोशन में SC/ST का प्रतिनिधि
गुजरात गणेशोत्सव देखने पर दो मूलनिवासियों को ठाकुरों ने
बैंक खाते से आधार लिंक फैसला रद्द, सिम और स्कूल एडमिशन के
COPYRIGHT

All content © Mulniwasi, unless otherwise noted or attributed.


ABOUT US

It is clear from that the lack of representation given to our collective voices over so many issues and not least the failure to uphold the Constitution - that we're facing a crisis not only of leadership, but within the entire system. We have started our “Mulnivasi Nayak“ on web page to expose the exploitation and injustice wherever occurring by the brahminical forces & awaken the downtrodden voiceless & helpless community.

Our Mission

Media is playing important role in democracy. To form an opinion is the primary work in any democracy. Brahmins and Banias have controlled the fourth pillar of the democracy, by which democracy is in danger. We have the mission to save the democracy & to make it well advanced in common masses.

© 2018 Real Voice Media. All Rights Resereved
 e - Newspaper