×

ब्राह्मणवादी सरकारों के षड्यंत्रों से खड़ी होती शिक्षित बेरोजगारों की फौज

Published On :    17 Apr 2018   By : MN Staff
शेयर करें:


-



आजादी के 70 वर्षों में जिस गति से देश के मूलनिवासी बहुजन समाज में अशिक्षा, बेरोजगारी, गरीबी, भुखमरी का आलम शासक वर्ग द्वारा योजना बद्ध तरीके से पैदा की गयी है, उससे देश में बहुत ज्यादा क्रांति प्रवण माहौल पैदा हुई है। परन्तु देश के मूलनिवासी समाज में क्रांति करने योग्य असंतोष पैदा नहीं हुआ। असंतोष पैदा नहीं होने से आक्रोश पैदा नहीं हुआ। 


आक्रोश पैदा नहीं होने से व्यवस्था के शिकार लोगों का संगठन क्रांतिकारी स्वरूप प्राप्त नहीं कर सका। यदि भारत में जो सिथति है वैसा विदेशों में हो जाय तो वहाँ की जनता सारे काम छोड़कर शासक की मनमानी और गलत बयानी को खत्म करने के लिए सड़क पर ऊतर जाती है और सबसे पहले शासक को ही खत्म करती है। परन्तु भारत की बहुसंख्यक जनता ऐसा कब करेगी? क्या सांस लेने लायक नहीं रह जायेगी, तब?


जब भी कोई सरकार बदलती है और नई सरकार बनती है तो देश के बेरोजगारों की उम्मीदें औसत से कुछ ज्यादा ही होती हैं। देश का युवा बेरोजगार सरकार की तलवे चाटने वाली मीडिया में जी.डी.पी. के आंकड़े देखकर खुशी से झूमने लगता है कि उसका देश अब तरक्की कर रहा है और अब हमारी नौकरी पक्की है, ऐसा मान बैठता है। सत्ता और कुर्सी के खेल में लिप्त नेताओं के लच्छेदार भाषणों में बेरोजगारी को दूर करने की संकल्प लाखों बेरोजगार युवाओं में उत्साह भर देती है। 


उन्हें ऐसा लगने लगता है कि वे ही उनके पालन हार हैं और बहुत जल्द हर किसी को पलक झपकते ही नौकरी दे देंगे। परन्तु देश के मतदाताओं को चाहिए कि किसी भी पार्टी को वोट डालने के पूर्व या डालने के बाद भी उनका अन्धभक्त होने के बजाय उनके प्रति कठोर रवैया अपनाना चाहिए। 


कोई भी सरकारें बहुसंख्यक जनता को यह नहीं बताती हैं कि उनके कार्यकाल में कितनी रिक्तियाँ निकलीं और कितने लोगों को नौकरी दी, तथा नौकरी पाने वालों में कौन-कौन हैं? देश के मतदाताओं की अंध भक्ति अथवा लोकतांत्रिक अज्ञानता की वजह से ही देश आज तक आसानी से ठगा जा रहा है। 


काश! लोग तुलना करते कि आजादी से लेकर आजा तक देश पर हुकुमत करने वाली कांग्रेस तथा भाजपा ने अब तक बेरोजगारी खत्म करने के लिए कितने उपयोगी कदम उठाये? सरकारें कहती हैं कि बेरोजगारों को नौकरियाँ देने के लिए हमारे पास संसाधनों की कमी है। नौकरियाँ देने से हमारी विकास की रफ्तार कम हो जायेंगी। 


सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई केस लेने से इनकार करती है क्योंकि उसके पास अफसर से लेकर बाबू और चपरासी तक की कमी है। सरकार की एजेन्सियाँ विभिन्न क्षेत्र या लोगों से टैक्स का वसूल नहीं कर पा रही हैं, क्योंकि उनके पास मैन पावर की बेहद कमी है। न्यायालयों में करोड़ों मामले लम्बित हैं और देश के पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। 


क्योंकि जजों की कमी है। लोगों के काम नहीं हो पा रहे हैं। इसका मूल कारण हमारे देश का बेरोजगार युवा जानने की कोशिश नहीं कर रहा है। यदि कोशिश करता तो पता चलता कि इन सारी चीजों का मूल कारण भारत की सरकार पर काबिज ब्राह्मण और उसका वाद है। 


इसी वजह से मीडिया परमाणु बम, मिशाइलों की कहानियाँ सुनकर और पढ़ कर पाकिस्तान, बंग्लादेश और चीन पर आक्रमण करने की सलाह देता युवा वर्ग के पास सिनेमा के हीरो-हिरोइन और इन्टरनेट के अलावा सवाल पूछने और उसका सही जवाब जानने का समय नहीं है। 


रैली के दौरान खम्भों और बल्लियों पर चढ़कर मोदी-मोदी तथा राहुल-राहुल चिल्लाने वाले उनके सामने एक जुट होकर सवाल क्यों नहीं करते? देश का मूलनिवासी बहुजन समाज बेरोजगारों की फौज बनकर नौकरी पाने की लालसा में फंस कर आन्दोलन की राह से काफी दूर अपनी बारी का इन्ताजार कर रहा है। जो कि बारी आने की कोई गुन्जाइश ही नहीं बची है। 


ब्राह्मणों द्वारा प्रायः ऐसी अफवाहें उठाई ही जाती हैं कि नौकरी का असली फायदा आरक्षण वालों को मिलता है। लेकिन ये हरामखोर यह नहीं बताते कि इनके ही बाप-दादाओं ने उदारीकरण, निजीकरण एवं भूमण्डलीकरण करके देश के नौकरियाँ ही खत्म कर डाले। 


नौकरियाँ ही जब खत्म कर दी गयी तो आरक्षण का औचित्य तो अपने-आप खत्म हो गया। बेरोजगार मूलनिवासी बहुजन युवा देश की व्यवस्था बदल सकता है, परन्तु बड़ी सोच और विजन के अभाव में केवल रोटी की तलाश में भटक रहा है। 


कर्मचारियों की कमी की वजह से देश की सारी व्यवस्था जहाँ बाधित हो रही है वहीं बेरोजगार बहुजन युवा वर्ग संगठित होकर व्यवस्था पर काबिज अल्पसंख्यक ब्राह्मण विदेशियों को सड़क पर घसीट सकता है। परन्तु मामला वहीं अटक रहा है कि अपना वाजिब हक हासिल करने के लिए यह बहुजन उग्र होकर सड़कों पर उतर जाय तो निश्चित तौर पर फ्रांस की क्रांति की तरह भारत में भी स्थिति होगी। 


ऐसा किया जा सकता है। और निश्चित रूप से ऐसा होना ही चाहिए। मूलनिवासी बहुजन के लोग देश की सरकार पर काबिज ब्राह्मणों तथा उनकी चरणचाट मीडिया के आंकड़ों के भ्रम जाल पर जरा भी यकीन न करें, अपने महापुरूषों द्वारा बताये गये आन्दोलन की राह को प्रशस्त करें, यही सभी समस्याओं का समाधान है।

संपर्क करें

आपके पास अगर कोई महत्वपुर्ण जानकारी, लेख, ओडीयो, विडीयो या कोई सुझाव हैै तो हमें नीचे दिये ई-मेल पर मेल करें.:

email : news@mulniwasinayak.com


MN News On Facebook

लोक​प्रिय
देश की हवा सुधरे तो चार साल ज्यादा जिंदा रह सकते हैं भारती
पटना के एक आश्रय गृह में नाबालिग समेत दो महिलाओं की मौत
फर्जी एनकाउंटर मामले में सीआईसी ने दी गृह मंत्रालय को सख
मेहुल चौकसी को भारत भेजने से एंटीगुआ का साफ इनकार
देश में ज्यादातर कम शिक्षित सांसद, 66 साल में केवल 17 फीसदी ह
15 अगस्त की आज़ादी वामन मेश्राम की नजरिये से
कांग्रेस, बीजेपी दोनों मूलनिवासी बहुजनों के दुश्मन हैं-व
लाखों छात्रों का अधर में फंसा भविष्य
एमपी : दिव्यांग आदिवासी छात्राओं से हॉस्टल डायरेक्टर शर्
ईवीएम को खत्म करने के बजाए सुधारने में लगा आयोग
क्या सुकमा में नक्सलवाद के नाम पर फर्जी एनकाउंटर हुआ है?
जेएनयू के छात्र नेता उमर ख़ालिद पर अज्ञात ने चलाई गोली, बा
दंगों में भड़काऊ भाषण देने के आरोपी, बालियान-साध्वी प्रा
बुलेट ट्रेन के बाद अब सी प्लेन के नाम पर कर्ज लेने की तैया
केंद्रीय विश्वविद्यालयों और आईआईटी में अधिक पद खाली-मंत
घाटा झेल रहा एसबीआई अपनी दो गैर-निष्पादित परिसम्पत्तिया
देश में रोजगार को लेकर नहीं कोई आंकड़ा
रेलवे 1 सितंबर से खत्म कर देगा मुफ्त दुर्घटना बीमा योजना
भारत में 61 फीसदी बढ़े दुष्कर्म के मामले
भारत में सबसे ज्यादा तनावग्रस्त लोग-रिपोर्ट
COPYRIGHT

All content © Mulniwasi, unless otherwise noted or attributed.


ABOUT US

It is clear from that the lack of representation given to our collective voices over so many issues and not least the failure to uphold the Constitution - that we're facing a crisis not only of leadership, but within the entire system. We have started our “Mulnivasi Nayak“ on web page to expose the exploitation and injustice wherever occurring by the brahminical forces & awaken the downtrodden voiceless & helpless community.

Our Mission

Media is playing important role in democracy. To form an opinion is the primary work in any democracy. Brahmins and Banias have controlled the fourth pillar of the democracy, by which democracy is in danger. We have the mission to save the democracy & to make it well advanced in common masses.

© 2018 Real Voice Media. All Rights Resereved
 e - Newspaper