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भाजपा राज में मासूम और बेटियों पर बढ़ती अमानवीयता

Published On :    17 Apr 2018   By : MN Staff
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देश की कथित आजदाी से लेकर आज तक पूर्ववर्ती सरकारों की आज भी महिलाओं के साथ अमानवीयता हो रही है, जिसमें संविधान के बाद भी किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं आयी है, बल्कि वर्तमान मोदी राज में तो देश में इस कदर से अराजकता का माहौल निर्माण कर दिया गया कि महिलाअें के साथ मासूम बेटियां भी पुरूष सत्ताक व्यवस्था की तो सबसे पहले हमें यह मालूम होना चाहिए कि पुरूष सत्ताक क व्यवस्था क्या होती है? वर्तमान समय में जो समाज व्यवस्था हमारे देश में कार्य कर रही है जिसमें सबसे अधिक अधिकार सम्पन्न पुरूषों को माना जाता है।, 


जिसको पूरी तरह से आजादी है। वह कभी भी कहीं बिना किसी रोकटोक के आ जा सकता है और उसके आत्मनिभर्य का अधिकार है। वहीं इस व्यवस्था में महिलाओं को पूरी तरह से बांधकर रखा गया है। महिलाओं को केवल दूसरों के अधिन रहने की व्यवस्था की गयी है। अर्थात मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि आज भारत में महिलाओं को कोई भी अधिकार नहीं है। उसे हर प्रकार के कार्यों के लिए अपने घर के पुरूषों की इजाजत पर ही निर्भर रहना होता है। 


जबकि यह देश प्राचीन समय में मातृव्यवस्था कायम था। इस व्यवस्था में पुरूषसत्ताक व्यवस्था का एकदम उलटी व्यवस्था था जिसमें महिलाओं को पूरी तरह से आजादी थी। कोई भी सार्वजनिक कार्य महिलाओं के बगैर सम्पन्न नहीं होता था, तथा बेटा मां के नाम से जाना जाता था। महिलाओं के जीवन के किसभी भी क्षेत्र में जाने के लिए किसी से इजाजत की जरूरत नहीं होती थी अर्थत वह अपनी बुद्धि और विवेक के अनुसार अपने भविष्य के सारे फैसले करने के लिए स्ववतंत्र थीं।


इतिहास के अनुसार इस देश में आर्यों का आक्रमण हुआ, उस समय भाारत में मातृ सत्ताक व्यवस्था स्थापित थी और इस गौरवशाली धारती पर महिलाओं का ही शासन-प्रशासन था। जिसके कारण इन विदेशी डकैतों का सीधा मुकाबला भारत की मातृ शक्ति से हुआ, जिसमें महिलाओं ने इन विदेशी आर्यरूपी डकैतों को युद्ध में छठी का दूध याद दिला दिया था। 


र्थात कहने का तात्पर्य यह है कि आर्य रूपी यूरेशियन विदेशियों को बूरी तरह से परास्त किया, लेकिन उन्होंने हार को ध्यान मे रखकर यहां की व्यवस्था का अध्ययन किया और उन कमियों को मापकर आर्यों ने अपनी छलकपट, दम्भ पाखंड जैसे षड्यंत्रों का सहारा लेकर धोखेबाजी करके यहां के शासन सत्ताक में काबिज महिलाओं को गुलाम बनाने में कामयाब हुए। वहीं धोखेबाजी आज भी उनके खून में देखी जा सकती है। वहीं धोखेबाजी, छलकपट का सहारा लेकर यूरेशियन विदेशी आज भी भारत के मूलनिवासी बहुजनों को लड़ाने का काम कर रहा है। 


उसी करारी हार को ये यूरेशियन आज तक पचा नहीं पाया है। इसी का परिणाम सबके सामने है कि इस देश की सत्ताक एवं व्यवस्था पर धोखेबाजी से कब्जा करने के बाद भारत की मातृ शक्ति के शिक्षा संबंधित और अधिकार से वंचित कर दिया और भारत की मूलनिवासी महिलाओं को तरह-तरह की पाबंदियों या गुलामी में जकड़ दिया और देश में महिलाओं की सम्प्रभुता सम्पन्न मातृ सत्ताक व्यवस्था को खत्म करके पुरूषसत्ताक व्यवस्था में बदल दिया। 


जहां पर महिलाओं की आजादी का खात्मा करके इन लोगों ने जितनी भी ग्रंथों की रचना की उसमें उस करारी हार को इन बेईमान आर्यरूपी ब्राह्मणों ने महिलाओं के अस्तित्व को ही मिटाने की कोशिश की है। आज इन्हीं पाखंडी ग्रंथों की विचार धारा आज के पुरूषो के दिमाग में घुसी हुई है। उसी विचारधारा की वजह से आज लोगों के दिमांग में महिलाओं के प्रति स्त्रीदासता  की व्यवस्था राज कर रही है। जिसका मूल स्रोत मनुस्मृति है। 


इस विचारधारा को प्रस्थापित करने वाला कोई और नहीं, बल्कि यूरेशियन ब्राह्मण है। आज इन्हीं ब्राह्मणों की विचारधारा का घातक परिणाम है जिसमें इन विदेशी लोगों ने महिलाओं को उपभोग की वस्तु, पापयोनि, दुगुर्णों की खान, बच्चे पैदा करने की मशीन की संज्ञा देती है। इस विचारधारा का भयावह रूप आज बलात्कार, छेड़ाखानी, गैंगरेप के रूप में देखने को मिल रहा है। इसी ब्राह्मणवादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार देश मीडिया देश का चैथा स्तम्भ कहा जाने वाला ब्राह्मण, बनिया प्रचार माध्यम भी करता है। 


जिसमें आज कई विज्ञापन, धारावाहिक, ड्रामा या फिल्म का प्रसारण होता है तो महिलाओं एवं मासूम बच्चियों को सेक्सुअल दृष्टि से मसाला लगाकर दिखाता है जिसके चलते आज पुरूषों की महिलाओं के प्रति गंदी सोच का निर्माण होता है, जिसका घातक परिणाम उन्नाव और कठुआ जैसे इन्सानिय को शर्मसार करने वाले मामले भारत में घटित हो रहे हैं। 


उन्नाव गैंगरेप और कठुआ गैंग रेप तो  एक ट्रायल है ऐसे ही हजारो भेड़िए महिलाओं, बेटियों यहां तक की आसिफा जैसी मासूम का भी शिकार कर रहे हैं। गुलाम भारत में ऐसे मामले नगण्य है लेकिन जिस समय से इस देश की बागडोर अंग्रेजों के हाथों से निकल यूरेशियन ब्राह्मणों के हाथों में आयी है उसी समय से महिलाओं को निवाला बनाया जा रहा है।


इस देश में शासन चाहे भाजपा का रहे चाहे कांग्रेस का रहे, इन महिलाओ के साथ होने वाली  अमानवियता में कोई कमी नहीं आ रही है, बल्कि ब्राह्मणवादी सरकारों की सत्ताक में महिलाओं पर हो रहे अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है। इस मोदी राज में तो एक प्लान की तरह महिलाएं, बेटियों और मासूम बच्चियों को हवस का शिकार बनाया जा रहा है। 


जिसके लिए पूरी तरह से ब्राह्मण और ब्राह्मणवादी विचारधारा ही जिम्मेवार है, जिसके पोषण संघ की सरकार में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। मोदी सरकार में तो इसमे बेतहासा वृद्धि हो रही है। इसलिए सभी मूलनिवासी बहुजनो को संगठित होकर ब्राह्मणवादी राज एवं उनकी अत्याचारी व्यवस्था का खात्मा करने के लिए भारत मुक्ति मोर्चा के सााि आना होगा जो मूलनिवासी महिला, पुरूषों के सम्पूर्ण आजादी का आंदोलन चला रहा है।

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