×

नरेन्द्र मोदी का लोकतंत्र घातक प्लान

Published On :    22 Apr 2018   By : MN Staff
शेयर करें:


-



नरेंद्र मोदी की सरकार लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के उपाय तलाशने में जुटी है। नीति आयोग भी इसको लेकर मुकम्मल तरीका निकालने में जुटा है। इससे वर्ष भर होने वाले चुनाव और उस पर आने वाले खर्च को कम करने में मदद मिलने और विकास कार्यों में बाधा न आने की दलील दी जा रही है। 


लेकिन, आईडीएफसी इंस्टीट्यूट के अध्ययन से मिले आंकड़ों पर भरोसा करें तो ‘एक देश, एक चुनाव’ के परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होने पर विपक्ष का अस्तित्व ही समाप्त हो सकता है। 


इंस्टीट्यूट द्वारा छापी गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा होने पर 77 फीसद ऐसी संभावना हो सकती है कि मतदाता राज्यों में भी उसी पार्टी को वोट दे जिसके लिए उन्होंने केंद्र में मतदान किया है। लिहाजा, केंद्र के साथ राज्यों में भी एक ही दल का शासन होगा। ऐसे में, पूरे देश से विपक्ष का वजूद ही खत्म हो सकता है। ‘ब्लूमबर्ग’ की रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर साल औसतन छह राज्यों में चुनाव होते हैं।

‘लोकतंत्र और संघीय ढांचे के लिए खतरा’ बनी पीएम मोदी की ‘एक देश, एक चुनाव’ की योजना का जोरदार विरोध भी किया जा रहा है। आलोचक इस कदम को लोकतंत्र और देश के संघीय ढांचे के लिए खतरा मानते हैं। उनका कहना है कि ऐसा होने से किसी भी राज्य की सरकार को सत्ता से बेदखल करना आसान हो जाएगा। 


थिंक टैंक सीएसडीएस के निदेशक संजय कुमार ने कहा, “इससे देश का संघीय ढांचा तबाह होना तय है। लोकसभा चुनाव से विधानसभा के चुनाव प्रभावित होंगे यानि जो क्षेत्रीय दलों के हितों को खत्म करने का षड्यंत्र है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई.कुरैशी लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की योजना को कठिन मानते हैं। 


उन्होंने कहा, क्षेत्रीय पार्टियां जिस तरह से अपनी संघीय स्वायत्तता और राजनीतिक स्वच्छंदता की लगातार तसदीक कर रहे हैं, उसे देखते हुए वर्ष 2019 में एक साथ चुनाव (लोकसभा और विधानसभा) कराने में दिक्कत पेश आएगी। इस मसले पर राजनीतिक सहमति बनाना भी बहुत मुश्किल होगा। बता दें कि भारत में बहुदलीय पद्धति को अपनाया गया है। 


ऐसे में, देश भर में एक चुनाव कराने के लिए सरकार को संविधान में संशोधन करना पड़ेगा। इसके लिए संसद के साथ दो-तिहाई राज्यों की विधानसभाओं का समर्थन भी अनिवार्य होता है। इसीलिए ईवीएम इस्तेमाल करके दो तिहाई राज्यों में भाजपा को सत्ता दी गयी है। जिससे एक देश, एक चुनाव के षड्यंत्र को कामयाब बनाया जा सके। जबकि यह षड्यंत्र पूरी तरह से संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है।

चुनावी खर्च में व्यापक बचत की संभावना ‘एक देश, एक चुनाव’ के पीछे मोदी सरकार धन, समय और ऊर्जा बचत की भी दलील देती है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के आधार पर नीति आयोग का आकलन है कि पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा का चुनाव एक साथ कराने पर 45 अरब रुपए का खर्च आएगा। 


यहां यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में 38.7 अरब रुपए खर्च हुए थे। ऐसे में, तकरीबन 7 अरब रुपए और खर्च कर देश भर में एक साथ चुनाव कराना कहां तक उचित है। बता दें कि वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में तकरीबन 11 अरब रुपए खर्च हुए थे जो 2014 में अचानक से बढ़ गया था। 


आईडीएफसी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्येक विधानसभा चुनाव में औसतन 3 अरब रुपए का खर्च आता है। भारत में कुल 29 राज्य हैं। इसके अलावा दो केंद्र प्रशासित क्षेत्रों दिल्ली और पुड्डुचेरी में भी विधानसभा के चुनाव होते हैं।

संपर्क करें

आपके पास अगर कोई महत्वपुर्ण जानकारी, लेख, ओडीयो, विडीयो या कोई सुझाव हैै तो हमें नीचे दिये ई-मेल पर मेल करें.:

email : news@mulniwasinayak.com


MN News On Facebook

लोक​प्रिय
आयुष्मान भारत के फर्जी प्रचार पर 89 वेबसाइट-ऐप पर प्रतिबंध
लाठियों के साथ रैली निकालने पर संघचालक मोहन भागवत को नोट
जवान ने 11 हजार फुट ऊंचाई से लगाई छलांग, पैराशूट नहीं खुला ह
हरियाणा के रेवाड़ी में सीआईए इंचार्ज की गोली मारकर हत्या.
टिकट नहीं मिला तो सभी नेता छोडेंगे कांग्रेस मुस्लिम नेत
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष अंकिव बैसोया एबी
बदल दो 125 करोड़ भारतीयों का नाम हार्दिक पटेल का योगी सरकार
रोजगार के लिए गए थे विदेश, जिहादी बनकर लौट रहे कश्मीरी युव
सीएम चंद्रशेखर राव की पांच साल में बढी 3000 फीसदी इनकम ना को
20 साल से नहीं आया फिच की रेटिंग में सुधार, मोदी सरकार हुई फ
केशव प्रसाद मौर्य को स्पेशल कोर्ट ने दी चेतावनी सुनवाई प
दलित’ शब्द के इस्तेमाल के प्रतिबंध को भारतीय प्रेस परिषद
34 साल बाद भी सिख दंगा पीड़ितों को मुआवजा नहीं पीलीभीत और बर
एक साल में 14 करोड़ रुपये के चादर-तौलिया ले गए एसी यात्री
दूसरे राज्यों में आरक्षण नहीं मांग सकते सुप्रीम कोर्ट क
कांग्रेस और भाजपा में कोई अन्तर नहीं अखिलेश यादव का बडा ह
आंध्र प्रदेश में बिना इजाजत नहीं घुस पाएगी सीबीआई चंद्र
सोना-चांदी के आभूषण के लिए अब हॉलमार्क अनिवार्य केंद्री
अब जमीन के बदले कंपनी में मिलेगी हिस्सेदारी नीति आयोग तय
सीवीसी की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा से मांगा जवा
COPYRIGHT

All content © Mulniwasi, unless otherwise noted or attributed.


ABOUT US

It is clear from that the lack of representation given to our collective voices over so many issues and not least the failure to uphold the Constitution - that we're facing a crisis not only of leadership, but within the entire system. We have started our “Mulnivasi Nayak“ on web page to expose the exploitation and injustice wherever occurring by the brahminical forces & awaken the downtrodden voiceless & helpless community.

Our Mission

Media is playing important role in democracy. To form an opinion is the primary work in any democracy. Brahmins and Banias have controlled the fourth pillar of the democracy, by which democracy is in danger. We have the mission to save the democracy & to make it well advanced in common masses.

© 2018 Real Voice Media. All Rights Resereved
 e - Newspaper