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कांग्रेस की संविधान बचाओ मुहिम महज राजनैतिक नाटक

Published On :    26 Apr 2018   By : MN Staff
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इसमें कोई शक नहीं है कि आज ब्राह्मणों की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस आज खत्म होने के कगार पर पहुंच गयी है जिसका सीधा कारण है उसका कोई भी षड्यंत्र कामयाब नहीं हो पा रहा है जिसकी बदौलत वह लम्बे समय तक देश की सत्ता में काबिज रही है जिसने आज अपना मुख्य विपक्ष होने का हक भी खो दिया है क्योंकि कांग्रेस की आज यह स्थिति बामसेफ, भारत मुक्ति मोर्चा चल रही जनजागृति का परिणाम है क्योंकि इन जनजागृति के माध्यम से कांग्रेस ही नहीं बल्कि भारत की राजनीति में संक्रिय सभी मनुवादी पार्टियां के षड्यंत्र उजागर हो रहे हैं जिनका नेतृत्व 3.5 प्रतिशत यूरेशियन करता है जिसकी संख्या ही इस बात को प्रमाणित करती है कि वह अल्पसंख्यक है जिसकी आज पांच राष्ट्रीय स्तर की पार्टियां हैं जिसमें कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी, सीपीएम (मार्क्सवादी कम्युनिष्ट पार्टी) सीपीआई (कम्युनिष्ट पार्टी ऑफ इण्डिया) एआईडीएमके (जय ललिता) तथा त्रणमूल कांग्रेस भी राष्ट्रीय पार्टी के रूप में निर्वाचन आयोग में पंजीकृत है। 


अगर संख्या के आधार पर आकलन किया जाय तो संख्या के आधार पर अल्पसंख्यक यूरेशियन ब्राह्मण कभी भी देश का शासक वर्ग नहीं हो सकता है। शासक बनने की बहुत ही दूर की बात है वह ग्रामसभा का मेम्बर (वार्ड मेम्बर) तक नहीं बन सकता है। इसलिए वह हमेशा ही देश की सत्ता पर धर्म के आधार, जाति के आधार पर, राष्ट्रवाद के आधार तथा किसी न किसी भावनात्मक मुद्दों को आधार बनाकर सत्ता पर सवार होते आया है। 


उसने अपने आपको बहुसंख्य बनाने के लिए हमेशा ही छल, कपट और बदमासी का सहारा लेता रहा है जिसमें उसने मूलनिवासी बहुजनों की अज्ञानता का भरपूर फायदा उठाने का प्रयास किया है जिसमें उसने हमेशा ही मूलनिवासी बहुजनों को आपस में झगड़ा लगाने का काम किया है। जिसमें एससी, एसटी को ओबीसी को एससी, को मुस्लिमों से, मुस्लिमों को सिखों से तथा ओबीसी को मुस्लिमों में झगड़ा लगाने का काम किया है जिनको सीढ़ी बनाकर वह हमेशा ही सत्ता पर सवार हुआ है। 


उसी प्रकार से आज ईवीएम नाम का धोखा लाकर आज भारतीय जनता पार्टीसत्ता में सवार होकर उसी इतिहास को दोहरा रही है जिस इतिहास को कांग्रेस ने 57 वर्ष की सत्ता में सवार होकर बनाया है यह वही कांग्रेस पार्टी है जिसने सबसे पहले डा. स्वर्ण सिंह के नेतृत्व में मूलनिवासी बहुजनों के हक एवं मानवीय अधिकारों के दस्तावेजी प्रमाण डा. बाबासाहब अम्बेडकर के समतामूलक संविधान खत्म करने के लिए समीक्षा आयोग बनाया था वही कांग्रेस आज राजनैतिक हासिये पर खड़ी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है जिसने लम्बे समय तक सत्ता में रहकर एक एक करके मूलनिवासी बहुजनों के हक एवं अधिकारों को खत्म करने का काम किया है जिसका भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा साथ और सहयोग दिया है दोनों ने मिलकर मूलनिवासी बहुजनां के हक एवं अधिकारों को खत्म करने का काम किया है जिससे देश की लोकतांत्रिक मिशनरी पर आज एससी, एसटी, ओबीसी एवं मायनॉरिटी के संवैधानिक अधिकार लगभग समाप्त हो चुके हैं। 


जो हमें मौलिक अधिकार के रूप में संविधान के माध्यम से प्राप्त हुए थे इन अधिकारों को खत्म करने का सिलसिला कांग्रेस ने सन् 1990 में नई आर्थिक नीतियों को लागू किया जिसका भरपूर साथ और सहयोग भारतीय जनता पार्टी में किया आज जिसे एलपीबी, सेज और एफडीआई के नाम से जाना जाता है इन षड्यंत्रों को कांग्रेस ने भाजपा के साथ और सहयोग से लागू किया है जिसका परिणाम यह है कि आज तक मूलनिवासी बहुजनों को उनकी संख्या के अनुपात में कोई अधिकार नहीं मिला है जिसके लिए कांग्रेस और भाजपा सहित सभी मनुवादी पार्टियां जिम्मेदार है जो इन कांग्रेस और बीजेपी की चाटुकारिता करके अपने समाज का सत्यानाश कर रही है जिसमें सपा, बसपा, जदयू और रिपब्लिकन पार्टी के सभी घडे कर रहे हैं जिनका नेतृत्व आज अखिलेश यादव, मायावती, रामविलास पासवान, उदितराज, रामदास आठवले जैसे नेता ब्राह्मणवाद के पोषक बनकर काम कर रहे हैं ये उन्हीं मनुवादी पार्टियों की दलाली कर रहे हैं जिन्होंने डा. बाबा साहब अम्बेडकर के अथक संघर्ष और बहुमूल्य त्याग का दस्तावेजी प्रमाण संविधान को खत्म करने में कोई भी कसर नहीं लगायी है यही काम आज भारतीय जनता पार्टी सरकार कर रही है जिसने अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में संविधान को खत्म करने का कुत्सित प्रयाय किया था। 



यह इस बात का सबूत और प्रमाण है कि सत्ता चाहे कांग्रेस की रहे या फिर भारतीय जनता पार्टी की रहे दोनों ने हमेशा ही संविधान को खत्म करने का लगातार प्रयास किया है। प्रयास ही नहीं किया है बल्कि मूलनिवासी बहुजनों को संवैधानिक अधिकार संविधान को हाथ लगाए बगैर ही खत्म कर दिए हैं अधिकार ही खत्म नहीं किए बल्कि आज जितनी भी भयानक समस्याओं से भारत का मूलनिवासी समाज जूझ रहा है वह केवल ब्राह्मणों की सत्ता का परिणाम है जिन्होंने अशिक्षा, बेकारी, गरीबी, रोटी, कपडा और मकान जैसी हजारों समस्याए इन्होंने ही पैदा की है जिसके लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों ही बराबर की जिम्मेदार है। 



इतनी विकराल समस्याएं पैदा करने वाली एवं संवैधानिक अधिकारों पर डाका डालने वाली कांग्रेस आज संविधान बचाओ का नाटक दिखा रही है जो केवल मूलनिवासी बहुजन समाज में पनप रहे गुस्से को शान्त करने का षड्यंत्र है। जिसको किसी भी हालत में माफ नहीं किया जा सकता है क्योंकि आज बामसेफ, भारत मुक्ति मोर्चा एवं ऑफसूट संगठनों के माध्यम से मूलनिवासी बहुजनों को यह पता चल चुका है कि हमारा असली दुश्मन भाजपा कांग्रेस तथा इनका नेतृत्व करने वाला यूरेशियन ब्राह्मण है इसलिए हम अपने बहुसंख्यक मूलनिवासी बहुजनों समाज से यही विनम्र आग्रह करते हैं कि कांग्रेस, भाजपा एवं उनकी चाटुकारिता करने वाले संविधान विरोधी लोगों को सबक सिखाने का सुनहरा मौका हाथ नहीं जाने देना चाहिए क्योंकि ये एक दिन हाथ जोड़ने के बाद 4 वर्ष 364 दिन हमारे ऊपर जुल्म और अत्याचारों का कहर वरपाते है। साथ ही काम के लिए चक्कर पर चक्कर लगवाते हैं।
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